साहित्य दर्पण

धर्मपथ ..श्रेष्ठ ..श्रीलता प्रसाद

आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी के एक जिले का नाम है नरसापुरम जो गोदावरी तट पर स्थित है । श्री आदि केशव एम्बरमनार‌ स्वामी मंदिर 300 साल पुराना वैष्णव मंदिर है जिसका निर्माण ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अनुवादक प्रसन्नाग्रेसरा पुप्पला रामनप्पा नायडू द्वारा हुआ था। यह तमिलनाडु के प्रसिद्ध श्रीपेरंबुदूर मंदिर के समान है, जो संत रामानुजाचार्य के अवतार स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। श्री नायडू ने श्री यू.वी यूनी रामानुजाचार्य स्वामी द्वारा श्री रामायण प्रवचनम/कलाक्षेपम में भाग लिया। प्रवचन हो जाने के बाद, श्री नायडू स्वामी जी को गुरु दक्षिणा देना चाहते थे । स्वामी जी ने नायडू को नरसापुरम में श्री पेरुम्बुदूर में स्वामी कोवेला के साथ आदि केशव एम्बरुमनार स्वामी कोवेला का निर्माण करने का निर्देश दिया । स्वामी जी के निर्देशानुसार नायडू जी श्रीपेरंबदूर गए। श्रीपेरंबदूर में, स्वामी एम्बरुमनार की एक और थिरुमनी को एकसनम (एक ही वेदी) में एम्बरुमनार के मूल थिरुमनी के साथ व्यवस्थित किया गया । दोनों थिरुमेनिस के लिए तिरुवरधनम के छह महीने के बाद, नई थिरुमेनी को नरसापुरम में पालकी में लाया गया और श्री आदिकेशव स्वामी कोवेला में स्थापित किये गये। यह एकमात्र मंदिर है जहां देवी लक्ष्मी का नाम भगवान के एक भक्त के नाम पर रखा गया है। नायडू परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी इस मंदिर की सेवा कर रहा है। और नरसापुरम की श्रीमती श्रीलता प्रसाद नायडू परिवार की आठवीं पीढ़ी हैं। और सौभाग्य से इस सोसाइटी में रहती है। श्रीमती श्रीलता के दादाजीपुपाला पानकाल राव पिताश्री पी वी एल एन नायडू माताश्री स्व श्रीमती पी सुंदरी नायडू भाई पी आदित्य नायडू और बहन रितिका सभी ने इस मंदिर की समर्पित भाव से खूब सेवा की है और कर रहे हैं । और स्वयं श्रीमती श्रीलता प्रसाद जब प्रभु आदिकेशव जी अवसर देते हैं वह भी नरसापुरम में सेवा में लग जाती है।
श्रीलता-शेखर को फूलों की विभिन्न प्रजातियों से बेहद प्रेम है। दोनों ने मिलकर अपने घर की दो तरफ गमलों में, क्यारी में और छत पर अति मनभावन फूलवारी खिला कर रखी है जिसमें मुख्य है अलामांडा गुलाब गेंदा बारहमासी सदाबहार चम्पा रातरानी ब्रह्मकमल सदा सुहागन कनेर अडेनियम पीस लिली बेला क्रोटोन बेलपती समी आंवला पान और यहां तक अनार भी हैं। जब सोसाइटी में घूमता हूं तो मैं श्रीलता को सुबह-सुबह और शाम को फूलों में पानी देता देखता हूं । नित निंदाई गुड़ाई करना ऐसा मैंने श्रीलता को घूमते समय देखा है। अपने बच्चे समझकर इन पौधों का लालन पोषण कर रही है । सरसता और सत्यता का मिश्रण है श्रीलता । दिल की बिल्कुल साफ। प्रभु प्रति आस्था और निष्ठा जैसे इसके रक्त के हर कण में हो। सोसाइटी में कुछ महिलाओं ने एक ग्रुप बना रखा है। इसका उद्देश्य नर्मदा मैया के शारदा माता बरेला मंदिर के और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन करना है। श्रीलता प्रसाद भी इस ग्रुप में हैं। बिना किसी सजावट के साधारण रहकर दर्शन करने इस ग्रुप के साथ जाती हैं। जब सभी महिलाएं सेल्फी‌ अथवा तस्वीरें अपने अपने मोबाइल से लेती हैं उस श्रीलता सबसे पीछे खड़ी रहती हैं । श्रीलता का मानना है कि मन की सुंदरता होनी चाहिए यही मुझे अच्छा लगता है।श्रीलता प्रसाद पति शेखर प्रसाद पुत्र तनिष्क, ज्येष्ठजी राजा प्रसाद जेठानी स्वाति प्रसाद के साथ रहती हैं। जेठानी के संग तो बहनों सा प्यार है। आज के युग में एक किचन में देवरानी जेठानी संग काम करे, इस असंभव को श्रीलता प्रसाद ने संभव बना कर रखा हुआ है। जेठानी श्रीमती स्वाति प्रसाद भी उतना ही प्यार अपनी देवरानी श्रीलता को करती‌ है, मेहमानों की आवभगत करना तो गजब की है‌ इनकी। घर का मंदिर तो श्रीलता ने बहुत ही सुंदर सजा कर रखा है। नायडू कुल से मंदिर की सेवा के संस्कार पाए हुए हैं श्रीलता प्रसाद ने । बड़े मनोयोग से समर्पित सेवा भाव से अपने घर के अंदर के मंदिर की सेवा में जी जान से जुटी रहती है।
गत वर्ष श्रीलता की माताश्री श्रीमती पी सुंदरी नायडू आदिकेशव के श्रीचरणों में नमन कर गई थी। अभी तक श्रीलता का रोते-रोते बुरा हाल है। उसे ऐसा लगता है कि जैसे साक्षात आदिकेशव उससे बिछड़ कर दूसरे लोक में चले गए हैं। प्रभु आदिकेशव की कृपा से अभी धीरे-धीरे संभल रही है। धर्मपरायणता की मूर्ति श्रीलता प्रसाद को बहुत ही आदर भाव से देखा जाता है। धर्म पथ पर चलने वाली श्रीलता प्रसाद सच में हमारी प्रेरक है।

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