आसामाजिक तत्वों द्वारा लगाई जा रही आग

जबलपुर दर्पण। मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार शहर सीमा के आसपास ऐसे अनेक पिकनिक स्पॉट/भ्रमण स्थानों पर नवयुवक एवं युवतियों परिवार सहित समय-समय पर भ्रमण करने जाते रहते हैं। कभी कभी भोजन भी बनाया जाता है। वहीँ कुछ लोगों द्वारा धुम्रपान भी किया जाता है किन्तु आनंद में डूबे यह लोग जलती बीड़ी, सिगरेट एवं माचिस की जलती तीली बिना सोचे समझे आस-पास फेंक देते हैं। अत्यधिक गर्मियों में सूखी घास, पत्तियों में आग पकड़ लेनें से ही आस-पास का हरा जंगल भी आग की चपेट में आकर समाप्त हो जाता है। इस तरह से लगभग प्रत्येक वर्ष शहरी क्षेत्रों के आसपास का जंगल अग्नि की भेंट चढ़ जाता है।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर के अनुसार शासन प्रशासन एवं वनविभाग की हीलाहवाली के कारण आसामाजिक तत्वों का डेरा भी जमा रहता है।शहर से लगा मदन महल, शारदा देवी मंदिर, देवताल, दरगाह पहाड़ी , पाठ बाबा,पिसनहारी जैन मन्दिर के पीछे, सैनिक सोसायटी से दानव बाबा पहाड़ी, संग्राम सागर तालाब से लगी पहाड़ीयां एवं बरगी हिल्स के पीछे तरफ़ में जब-तब गर्मी के समय असामाजिक शरारती तत्वों कुछ निजी स्वार्थ के लिए बड़ी मशक्कत मेहनत के बाद तैयार झाड़ -पेड़ों- पौधे, घांस एवं वनस्पतियों को जानबूझकर आग लगा कर आनंदित होते हैं, जिसमें अनेक प्रकार से जीव-जंतु एवं वन प्राणियों को भी नुक्सान पहुंचता है। पूर्व में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर इन क्षेत्रों में बसी झुग्गी-झोपड़ी हटाईं गई थी तत्पश्चात अनेकों पौधे रोपित किए गए थे किन्तु उन्हें सुरक्षित करना आमजनता,शासन,प्रशासन एवं वनविभाग विभाग का नैतिक कर्तव्य है जो अतिआवश्यक है। हर वर्ष पौधे रोपित किए जाते हैं किन्तु इन्हें सुरक्षित करना चाहिए नहीं तो एक तरफ हम प्रति वर्ष पौधे रोपकर अपना नाम गिनीज रिकॉर्ड में दर्ज करवाते हैं दूसरी तरफ असामाजिक शरारती तत्वों द्वारा इन्हें नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती है।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के दिलीप सिंह ठाकुर, भास्कर गुप्ता, ऋषि पाठक, शैलेश पंड्या, संजय उपाध्याय, शिवेंद्र परिहार, अरविन्द विश्वकर्मा, विश्वनाथ सिंह, नितिन तिवारी, धर्मेंद्र परिहार, सुधीर गौर, संदीप परिहार, आकाश भील, आदेश विश्वकर्मा, जी आर झारिया, विशाल सिंह, रवि विश्वकर्मा, दुर्गेश खातरकर, राकेश मून, कमलेश दुबे, माधव पाण्डेय, सतीश खरे, अजब सिंह, अंजनी उपाध्याय, सुल्तान सिंह, देवराज सिंह, इमरत सेन, डेलन सिंह, आसाराम झारिया, समर सिंह, चंद्रभान साहू, महेश मेहरा, भोजराज सिंह, सुरेंद्र परसते, गंगाराम साहू, भोगीराम चौकसे, अजय लोधी, अफ़रोज़ खान, रवि केवट, बहादुर पटेल, आशीष यादव, आशीष विश्वकर्मा, अजय श्रीपाल, रामदयाल उइके, रामकिशोर इपाचे, मनोज कोल, पवन सोयाम, गगन पटेल, देवेंद्र राजपूत, राशिद खान, पुष्पा रघुवंशी, चंदा सोनी, ब्रजवती आर्मो, राजेश्वरी दुबे, अर्चना भट्ट, अम्बिका हँतिमारे, योगिता नंदेश्वर, पूर्णिमा बेन, गीता कोल, सरोज कोल, कल्पना ठाकुर, सुमिता इंगले, प्रेमवती सोयाम, शबनम खान, शायदा खान, सिया पटेल, क्षिप्रा सिंह, रौशनी महोबिया इत्यादि ने शासन -प्रशासन एवं वन विभाग से मांग की है,कि वनसंरक्षक प्रकृति जो कि शहर से लगीं है, जिसको निहारने देश विदेश से पर्यटक भ्रमण करने आते हैं, उसके बचाव हेतु कोई ठोस कदम एवं करवाईं अतिशीघ्र करें।



