ध्यानलिंगम मंदिर वेलिंगिरि पर्वतमाला की तलहटी में शिवजी का है एक मंदिर
कोयंबटूर से 30 किलोमीटर दूर वेलिंगिरि पर्वतमाला की तलहटी में शिवजी का एक मंदिर है जिसे ध्यानलिंगम मंदिर कहा जाता है । यहां कोई स्तुति,आरती अथवा कर्मकांड नहीं होता है। कोई भी भक्त यहां आकर ध्यानलिंग में संचित ऊर्जा को ग्रहण कर सकता है। गुरु शिष्य का भाव लिए ध्यानलिंग को मन में गुरु को प्रतिष्ठित कर कुछ क्षण अपलक दर्शन कर फिर नेत्र बंद कर नियत स्थान पर बैठना यही पर्याप्त है। ध्यानलिंगम् मंदिर का निर्माण एक योगी एवं रहस्यवादी सद्गुरु संत जग्गी वासुदेव ने 24 जून 1999 को किया था। गर्भगृह को एक डोम के आकार का बनवाया था जिसमें ईंट, चूना, मिट्टी, रेती, नौसादर एवं विभिन्न जड़ी-बूटियों से निर्मित घोल का उपयोग हुआ था। डोम वास्तुकला के अनुसार बनवाया था। यह ध्यानलिंगम मंदिर संसार का प्रथम मंदिर है । ध्यानलिंगा मंदिर में नाद अराधाना (ध्वनि की एक भेंट) और ओमकर ॐ ध्यान का आयोजन होता है। नाद आराधना द्वारा ध्यानलिंग की ऊर्जा एक ठोस दीवार भी बन सकती है, और जो इसे भेद लेता है यह उसके लिए बहुत अद्भुत होता है, ऐसा योगी जी ने बताया था। श्रीमती शिप्रा परिहार का यही एक सपना,अनुष्ठान है की शहर से दूर उसका अपना एक आश्रम हो और उसमें ध्यानलिंगम का मंदिर हो । पूरा आश्रम भक्ति भाव, छायादार व फलदार वृक्षों से भरा हो। आश्रम में निःशुल्क भंडारे, प्रसाद हों । हर समय कुछ न कुछ धार्मिक आयोजन होते रहे हों । शांति का वातावरण हो । शिप्रा परिहार की यह भी प्रबल इच्छा है कि उमरिया छापडोर मानपुर के 95 वर्षीय उनके पूज्य गुरु, स्वामी संत शरण जी महाराज के श्रीचरण एक बार इस आश्रम में अवश्य पड़े । पूज्य गुरुजी इस आश्रम में पधारें और ठहरें। प्रभु श्रीराम की अनन्या भक्त क्षिप्रा की प्रभु राम ने सुन ली। शिप्रा परिहार के जीवनसाथी रवि सिंह परिहार ने अपनी जीवनसंगनी का अनुष्ठान पूर्ण करने का विश्वास जाग्रत किया । उन्होंने शहर से बाहर आश्रम के लिए कुछ जमीन क्रय कर ली है । आश्रम का स्वरूप देने के लिए जन सहयोग भी मिलना प्रारंभ हो गया है। शीघ्र ही यह आश्रम अपना स्वरूप ले लेगा ऐसा क्षिप्रा का विश्वास है। धर्मपरायण श्रीमती शिप्रा ने अपने घर के अंदर एक बहुत ही रमणीक मनमोहक अनूठा श्रीराम जी का मंदिर बनवा रखा है। इस मंदिर में श्री राम जी और पूरा परिवार मय पवनपुत्र हनुमान जी के विराजमान हैं । श्री तुलसीदास जी के चौपाई को चरितार्थ करती हुई – कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरज सुन्दरम् – श्री रामचंद्र जी की प्रतिमा है। श्री रामचंद्र जी माता जानकी प्रभु लक्ष्मण और श्री हनुमान जी की प्रतिमाएं इतनी सुंदर है इतनी सुंदर हैं ऐसा लगता है जैसे कि वे स्वयं शिप्रा के घर विराजमान हों । अपने घर के मुख्य द्वार पर एक चित आकर्षक धनुष बाण भी निर्मित किया हुआ है जिसे निहारते ही बनता है । श्रीमती शिप्रा परिहार नित विधि विधान से इनकी पूजा करती है और हर वर्ष राम जन्मोत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाती है । इस अवसर पर श्री रामायण जी का अखंड पाठ की समाप्ति पर अपने परिवार, पूरी सोसाइटी अपने रिश्तेदार संबंधियों और इष्ट मित्रों को भोजन प्रसाद कराती है । श्री रामचंद्र भगवान की कृपापात्र श्रीमती शिप्रा परिहार हर समय मुखपर सौम्य शालीन मर्यादित मुस्कान लिए रहती है। एक बेटी है श्रुति और एक बेटा है अभिषेक, दोनों ही बच्चे बहुत ही समझदार और प्रतिभावान हैं। धर्म परायणता के संग संग सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी इन्हें सदैव अग्रणी देखा है़। श्रीमती शिप्रा ने सभी के कहने पर सोसाइटी का प्रभार भी लिया हुआ है। अपनी विवेक क्षमता सहनशीलता और सहजता से शिप्रा सोसाइटी के अंतर्गत हर कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न किए जा रही हैं। लिए चित निश्छलता पावनता निर्मलता प्रांजलता श्रीमती शिप्रा परिहार श्री राम जी के मन में पैठ कर चुकी है। निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा । श्री रामायण की चौपाई शिप्रा परिहार पर अवश्य चरितार्थ होगी, विश्वास है।



