नियुक्ति तिथि से चयनित वेतनमान की प्रभावी व्यवस्था की जायेःधर्मेंद्र गहलोत

जबलपुर दर्पण। राजस्थान में 1978 से 1985 के मध्य नियुक्त तृतीय श्रेणी शिक्षक की अध्यापको को नियक्ति तिथि से चयनित वेतनमान में हो रहे विरोधाभास को समाप्त कर नियुक्ति तिथि से चयनित वेतनमान की प्रभावी व्यवस्था करवाने के लिए राजस्थान शिक्षक संघ (प्रगतिशील) के मुख्य महामत्री धर्मेन्द्र गहलोत ने राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एंव शिक्षा मंत्री डाॅ. बी.डी. कल्ला से हस्तक्षेप की मांग की।
राजस्थान शिक्षक संघ(प्रगतिशील)के प्रदेश मीडिया प्रभारी गुरुदीन वर्मा के अनुसार संघ (प्रगतिशील) के प्रदेश मुख्य महामत्री धर्मेन्द्र गहलोत ने ने बताया कि राजस्थान में तृतीय श्रेणी अध्यापक के पद पर 1978 से 1985 के मध्य नियुक्तिया पंचायत समितियों के माध्यम से अस्थाई तौर से किये जाने का प्रावधान प्रचलित था। अस्थाई शिक्षको का स्थाईकरण आदेश दो-दो साल बाद वर्ष पश्चात् पचायत समिति की स्टेडिंग कमेटी द्वारा स्थाईकरण आदेश जारी करने में अनावश्यक विलंब हो जाता था लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है उक्त अवधि में नियुक्त शिक्षकों को जब प्रथम नौ वर्षीय एसीपी एवं द्वितीय 18 वषीर्य एसीपी नियुक्ति तिथि से दे दिया जाता है लेकिन 27 वर्षीय एसीपी चयनित तिथि से दिया जाना किसी भी स्थिति में न्यायोचित नहीं है। जिससे राज्यभर के हजारो शिक्षको को नियुक्ति तिथि से चयनित वेतनमान मिले बगैर ही सेवा निवृत होना पड़ा। जिससे सेवानिवृत अध्यापको को भारी नुकसान उठाना पड़ा। जबकि इन शिक्षको ने दुर दराज, दुर्गम पवर्तीय स्थलो, रेगिस्तान जैसे दुरस्थ गांवो में सेवा देकर सेवानिवृत हुए है। ज्ञात रहे प्रथम नियुक्ति तिथि से चयनित वेतनमान देने का फैसला 1998 में अशोक गहलोत सरकार के सत्तासीन होने के बाद ही लिया गया था लेकिन धीरे-धीरे शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इसकी परिभाषा को बदलते हुए नियुक्ति तिथि के स्थान पर चयनित तिथि का विरोधाभाषी शब्द शामिल कर शिक्षकों को प्रताड़ित करने का नया हथकंडा अपनाया गया जबकि कई शिक्षक नियुक्ति तिथि से चयनित वेतनमान लेकर सेवानिवृत हुए है। कई शिक्षको ने माननीय न्यायालय में परिवाद दायर कर नियुक्ति तिथि से वेतनमान लेने में सफल हुए है। लेकिन बड़े खेद का विषय है अलग-अलग तरह से शिक्षको को चयनीत तिथि के नाम से प्रताड़ित करने के रवैय पर अंकुश लगाकर नियुक्ति तिथि से चयनित वेतनमान देने के पुनः आदेश प्रसारित कर हजारो शिक्षक जो सेवानिवृत होने वाले है व जो सेवानिवृत हो चुके है उन्हें आर्थिक लाभ मिल सके।



