हिन्दी की गूंज संस्था ने सावन काव्य संध्या का किया आयोजन

जबलपुर दर्पण। दिल्ली, देश की अग्रणी साहित्यिक संस्था हिंदी की गूंज के तत्वाधान में “सरस सावन मनभावन” काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न भागों से प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन देश के सुप्रसिद्ध संचालक खेमेन्द्र सिंह तथा डॉ ममता श्रीवास्तवा ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री अशोक अंजुम जी ने की तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में जुड़ी रेनू हुसैन जी। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ ममता श्रीवास्तव ने मां सरस्वती की वंदना से किया, तत्पश्चात संस्था के संयोजक श्री नरेंद्र सिंह नीहार जी ने शब्द गुच्छ से सभी अतिथियों का स्वागत किया। “देख सखी फिर सावन आया” सुनाकर जहां एक ओर डॉ ममता श्रीवास्तव ने सभी को सावन ऋतु के आने का संकेत दिया तो वही श्यामसुंदर श्रीवास्तव ने प्यार का मनुहार करते हुए अपना गीत- ‘बैठो कभी पास मेरे भी दे दो पल दो पल’ सुनाकर सभी का मन मोह लिया। साधना मिश्रा ने- अवलोक प्रकृति की सुंदरता मन आज मेरा फिर मुग्ध हुआ सुनाकर सभी को मुग्ध कर दिया, तो वहीं मुंबई से जुड़ी डॉ वर्षा महेश ने भी- ‘बीता जेठ रिमझिम लिए आषाढ़ आया’ सुनाकर सभी को सावन के सौंदर्य से सराबोर कर दिया। नेहा सोनी ने भोले शंकर को याद करते हुए बहुत ही सुंदर भजन -‘कंकर-कंकर शिव है और बूंद-बूंद जलधार’ सुनाकर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया, तो वही मुंबई से जुड़ी वरिष्ठ कवयित्री लता विनोद नोवाल जी ने- ‘रिमझिम बारिश आई कोयल गाए राग तराना’ सुनाकर सावन के मौसम का बखान किया। सुमधुर कवि डॉ विनोद चौहान प्रसून ने- बात पन्नों ने की है डायरी एक पुरानी मिली है’ सुनाकर सभी को प्रेम के रंग में सराबोर कर दिया। देश की सुप्रसिद्ध वरिष्ठ कवयित्री रेणु हुसैन जी ने बेटियों का बखान करते हुए अपनी गजल- ये नेमत हर किसी को मिलती नहीं है’ सुनाया तो दिल्ली से जुड़ी तरुणा पुंडीर तरुनिल ने -पावस की ऋतु आ गई मन मयूर मुस्काय गरम पकौड़े संग में अदरक वाली चाय’ सुनाकर सभी को चाय के लुत्फ़ से जोड़ दिया। चेन्नई से जुड़ी देश की प्रसिद्ध साहित्यकार रोचिका अरुण शर्मा ने – रूठ गई है बदरिया बरसे खूब’ सुनाकर बारिश के विकराल रूप का वर्णन किया। संस्था के संयोजक नरेंद्र सिंह नीहार जी ने-‘ आई है बरसात सजन तुम आ जाना, बन जाएगी बात सजन तुम आ जाना’ सुना करके सभी को बरसात के मौसम से जोड़ दिया। कार्यक्रम के अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन में सभी प्रतिभागियों की तथा हिन्दी की गूँज संस्था की सराहना करते हुए डॉ अशोक अंजुम जी ने कहा कि- ‘कविता जीवन में मंगल ढूंढती है’ साथ ही साथ उन्होंने अपनी सुप्रसिद्ध गज़ल -“अरे बादल मत जाना बिन बरसे इस बार, बिटिया का घर बस जायेगा इस बार” सुना कर के बारिश के किसानों के जीवन में महत्व का बहुत ही सुंदर वर्णन किया। कार्यक्रम के अंत में खेमेंद्र सिंह चंद्रावत जी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। लगभग दो घंटे चले कार्यक्रम में निर्मला जोशी, गिरीश जोशी, प्रमोद कुमार चौहान, विमला रस्तोगी, रमेश गंगेले अनंत भावना अरोड़ा ,डा संजय कुमार सिंह,शिक्षक अमृतलाल आदि ने अपने संदेशों के माध्यम से सभी का उत्साहवर्धन किया और सरस सावन मनभावन का लुत्फ उठाया।



