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कारगिल: बहादुरी की वो कहानियां जो रोंगटे खड़े कर देंगी

कैप्टन विक्रम बत्रा का नाम करगिल युद्ध के उन जवानों में शामिल था, जिन्होंने दुश्मन छक्के छुड़ा दिए थे. कैप्‍टन बत्रा ने कारगिल में प्वाइंट 4875 को पाकिस्‍तान के क‍ब्‍जे से आजाद कराया था. पाकिस्तान की ओर से विक्रम बत्रा का कोडनेम शेरशाह रखा गया था। मेजर राजेश सिंह अधिकारी ने भी करगिल युद्ध में अहम भूमिका अदा की थी. 18 ग्रेनेडियर्स के जवान राजेश सिंह का जन्म उत्तराखंड के नैनीताल में 1970 में हुआ था. वह अपने मकसद को पूरा करने के लिए अपनी कंपनी का नेतृत्व कर रहे थे. मिशन के दौरान कई दुश्मनों को मौत के घाट उतारा था नायब सूबेदार योगेंद्र सिंह यादव घातक प्लाटून का हिस्सा थे और उन्हें टाइगर हिल पर करीब 16500 फीट ऊंची चोटी पर स्थित तीन बंकरों पर कब्जा करने का काम सौंपा गया था. उनकी बटालियन ने 12 जून को टोलोलिंग टॉप पर कब्जा कर लिया था. कई गोलियां लगने के बावजूद उन्होंने अपना मिशन जारी रखा था.करगिल युद्ध के हीरो में शुमार रहे लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे का नाम भी गर्व से लिया जाता है. मनोज कुमार पांडे 1/11 गोरखा राइफल्स के जवान थे. इन्होंने अपने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी. उनकी टीम को दुश्मन सैनिकों को खदेड़ने का काम सौंपा गया था. उन्होंने घुसपैठियों को वापस पीछे धकेलने के लिए कई हमले किए थे.        – करगिल युद्ध में मेजर एम सरावनन पर 14 हजार से अधिक फीट की ऊंचाई पर बैठे दुश्मनों ने फायरिंग शुरू कर दी. जवानों ने जुब्बार पहाड़ी पर विजय हासिल कर बिहार रेजिमेंट की वीरता का ध्वज लहराया था.- कारगिल युद्ध की बहादुर महिला योद्धाओं में एक नाम बहुत प्रसिद्ध है. इस कारगिल योद्धा का नाम फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना है. फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना पहली भारतीय महिला पायलट थीं, जिन्होंने युद्ध में पाकिस्तान को पराजित किया था|

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