छिंदवाड़ा दर्पण

सूचना के अधिकार में हुआ खुलासा

विनय प्रकाश ठाकुर के नाम दान की गणपति मठ की जमीन,

पांढुरना जबलपुर दर्पण । प्रस्तावित जिला कलेक्टर भवन निर्माण मामले में और एक नया खुलासा हुआ है। जिसमे वीर शैव लिंगायत मठ उर्फ गणपती मठ संस्थान सराभराकार ने लगभग चार एकड़ जमीन को दान पत्र में विनय प्रकाश ठाकुर प्रभारी तहसीलदार के नाम रजिस्टर्ड रजिस्ट्री करवा दी है। इस पूरे दान-पत्र को देखा गया तो ग्रहिता मध्यप्रदेश शासन की और से कलेक्टर द्वारा अधिकृत हस्ताक्षर कर्ता प्रभारी तहसीलदार है। दान पत्र के पहले पन्ने पर मात्र विनय प्रकाश ठाकुर का नाम, पता पांढुरना तहसील जिला पांढुरना लिखा है। इस पर सवाल खड़ा हो रहा है कि मध्यप्रदेश शासन की ओर से कलेक्टर ने दान-पत्र के लिए अधिकृत किया तो, तहसीलदार के पद का नाम के पीछे उल्लेख क्यों नही किया गया-?
जब कि दानदाता का सम्पूर्ण नाम पद आधार एड्रेस दर्ज है। इसी प्रकार पेज नम्बर दो पर भी तहसीलदार के पद का कोई उल्लेख नहीं है। तीसरे नम्बर पेज पर सम्पत्ति रेलवे पटरी के उस तरफ का क्षेत्र होना बताया गया है। दानदाता का पूरा उल्लेख है, दान ग्रहिता मध्यप्रदेश शासन की ओर से कलेक्टर पांढुरना ने अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता विनय प्रकाश ठाकुर प्रभारी तहसीलदार को ही क्यों बनाया। जब कि राजस्व स्तर पर एसडीएम सर्व-सर्वहा होना बताया जा रहा है। जमीन दान-पत्र में एसडीएम का उल्लेख नहीं करने के पीछे क्या मंशा रही होगी यह समझ के परे है। दान की गई जमीन का विवरण इस प्रकार है, दान में दी जा रही सम्पत्ति मौजा पांढुरना हल्का न. 51 ब.न. 234 में स्थित होकर इससे सम्बंधित भु-अधिकार एवः ऋण-पुस्तिका भाग क्र.-1 एवः 2 क्रमांक एलसीएन 180040727 पर दर्ज है। इसमें खास बात तो यह है कि तहसीलदार के अलावा गवाहों के भी आधार एड्रेस का इस दान पत्र में उल्लेखित नही है, गवाहों में एक नरेंद्र भांगे नामक व्यक्ति ओर दूसरा सुरेश धनराज साबारे और तीसरा तहसीलदार का खास आउटसोर्स कर्मचारी धीरज हजारे है, पूरे दानपत्र में देखा जाए तो महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि मठ की दान वाली जमीन पर मात्र मठ के महाराज वीर रूद्र मुनि शिवाचार्य का फोटो दर्शाया गया है। जब कि ऐसी कोई रजिस्टर्ड दान या रजिस्ट्री दो पक्षो के फोटो के बगैर नही होती है। इसमे यह मालूम पड़ता है कि प्रभारी उप-पंजीयक अधिकारीयो के दबाव में होना प्रतीत हो रहा है। ऐसी जिला कलेक्टर की क्या मजबूरी थी जिन्होंने दान पत्र में इतनी सारी त्रुटियां होने के बावजूद दानपत्र आनन-फानन में उप पंजीयक से रजिस्टड करवाया। जानकारों का कहना है कि, मठ की जमीन दान देने के पीछे जिला कलेक्टर की ऐसी क्या मंशा थी, जिन्होंने दानपत्र को उप पंजीयक से रजिस्टर्ड करवाया।

दान की गई जमीन का शासकीय मूल्य:-
जिला कलेक्टर ने अमरावती सड़क पर स्थित शनि मंदिर के सामने वीर शैव लिंगायत मठ उर्फ गणपती मठ संस्थान की लगभग 11 एकड़ का रकबा स्थित है। जिसमे से चार एकड़ जमीन दानपत्र में उल्लेखित सम्पत्ति का बाजार मुख्य 89 लाख 28 हजार तीनसौ पच्चीस रुपये साठ पैसे होना बताया जा रहा है। इस आशय की जानकारी भू-माफियाओ को लगने के पश्यात एक करोड़ रुपये एकड़ के भाव से भु-माफिया आजू-बाजू की जमीन खरीदने में लगे है।

जिला कलेक्टर कार्यालय भवन का निर्माण हो लोक हित में :-
जिला प्रशासन ने फरवरी 2025 में गणेश मठ की जमीन का दान पत्र रजिस्टर्ड कराकर उस जमीन पर कलेक्टर कार्यालय का निर्माण करने कि पुरी तैयारी कर ली थी, जिसमे PWD बीआरसी शाखा को निर्माणकार्य करने नक्शा डिजाइन टेंडर की प्रक्रिया करने की कार्यवाही लगभग पूर्ण हो चुकी थी। निर्माणकार्य सुरु होने की तैयारी के बीच यह जिला कलेक्टर कार्यालय भवन निर्माण का मुद्दा शहर में ऐसे गुजा की राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक संगठनों के लोगो ने इसमे पीछे कुछ राजनीतिक के आकाओं को लाभ दिलाने की बाते धीरे-धीरे उजागर हुई तो यह मुद्दा शहर का एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। इस पर अब तक एक माह में कई संघटनो ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौपकर जिला कलेक्टर कार्यालय सर्व लोक-हित सुविधा में निर्माण करने की मंशा जाहिर की है।

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