जबलपुर दर्पण

डॉ. संजय मिश्रा, प्रभारी सीएमएचओ जबलपुर के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही, विभागीय जांच प्रारंभ

जबलपुर दर्पण । संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मध्यप्रदेश ने आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के अनुमोदन और संभागीय कमिश्नर, जबलपुर संभाग के माध्यम से डॉ. संजय मिश्रा, प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जबलपुर के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने हेतु मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम के अंतर्गत आरोप पत्र जारी किया है। आरोप पत्र पर बचाव पक्ष का लिखित उत्तर 45 दिवस के अन्दर प्राप्त नहीं होने की स्थिति में उनके विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही करने का लेख किया है। आरोप पत्र में शिकायतकर्ता नरेन्द्र कुमार राकेशिया की शिकायत के आधार पर आरोप प्रस्तावित किए जाने के कारण उन्हें सरकारी गवाहों की सूची में शामिल किया गया है। गौरतलव है कि उक्त आरोपपत्र की प्रति लोकायुक्त कार्यालय मप्र के उप विधि सलाहकार को उनके यहा दर्ज लोकायुक्त प्रकरण कमांक 91/ई/2024 के संदर्भ में प्रेषित की गई है।
संजय मिश्रा की निजी लैबों में हिस्सेदारी, फर्जी दस्तावेज, दो विवाह और बेनामी संपत्ति के आरोप प्रमाणित होने के चलते आरोप पत्र जारी किया गया
आरोप पत्र में डॉ. मिश्रा पर कुल पांच प्रमुख आरोप लगाए गए हैं- 1. निजी पैथोलॉजी लैब में हिस्सेदारी 2. दो विवाह करना 3. सेवा पुस्तिका में फर्जी पन्ने 4. बिना अनुमति अचल संपत्ति खरीदना और 5. अवैध रूप से नियुक्ति प्राप्त करना।
गौरतलब है कि शासकीय उपमहाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली द्वारा न्यायालय को आरोप पत्र में डॉ मिश्रा के विरूद्ध वर्णित इन्हीं आरोपों की जांच के लिए शासन स्तर से की गई कार्यवाही की जानकारी नहीं दिए जाने के चलते आरोप पत्र में वर्णित इन्हीं आरोपों की लोकायुक्त जांच करने के लिए पत्रकार प्रहलाद साहू द्वारा दायर याचिका उच्च न्यायालय द्वारा 50,000 रूपए जुर्माने के साथ खारिज कर दी गई थी।
डॉ. मिश्रा ने खुद मानी निजी लैबों में हिस्सेदारी-
आरोप पत्र में आरोप क्रमांक 1 के अंतर्गत शासन द्वारा अभिकथन किया गया है कि शिकायतकर्ताओं द्वारा की गयी शिकायत में यह आरोप लगाया गया कि. डॉ. संजय मिश्रा के द्वारा बिना शासन की अनुमति के म.प्र. शासन के प्रचलित नियमों के विरूद्ध पैथोलाजी सेंटरों का संचालन किया जा रहा है और उक्त आरोप के उत्तर में प्रस्तुत डॉ संजय मिश्रा के द्वारा दिए अपने कथन में स्वयं यह स्वीकार किया गया है कि एप्पल पैथोलॉजी लैब, फेथ पैथोलॉजी लैब एवं दिव्यता इंस्ट्रीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस जैसे निजी केंद्र पहले उनके नाम से पंजीकृत थे, जिनका संचालन उनके द्वारा किया गया था। इसके अलावा, परफेक्ट इंडोकेयर लैब के संचालन संबंधी रजिस्ट्रेशन में डॉ. संजय मिश्रा का नाम आज भी दर्ज पाया गया है। म.प्र. शासन के द्वारा समय-समय पर शासकीय अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों द्वारा नर्सिंग होम/निजी चिकित्सालय/प्राइवेट क्लीनिक आदि में निजी प्रैक्टिस करने के सम्बंध में अनेक परिपत्र जारी किए गए है और डॉ संजय मिश्रा के द्वारा उनका स्पष्ट रूप में उल्लघन किया जाकर नियम विरुद्ध तरीके से चार पैथोलॉजी लैबों का संचालन कर महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर रहने के बावजूद अपने पदीय अधिकारों का दुरूपयोग किया गया है। इससे शासन द्वारा शिकायतकर्ताओं का यह आरोप पूर्णतः प्रमाणित माना गया।
दो विवाह और संपत्ति खरीदने में अनियमितता
आरोप पत्र में आरोप क्रमांक 2 के अंतर्गत शासन द्वारा अभिकथन किया गया है कि आपके द्वारा पहली पत्नी तृप्ति मिश्रा के जीवित रहते हुये दूसरी महिला इशिप्ता सिंह मिश्रा से विवाह किया गया है जो कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 22 का घोर उल्लघंन कर कदाचरण किया गया है। आपके द्वारा पूर्व में स्वयं यह स्वीकार किया गया कि तृप्ति मिश्रा आपके घर पर रहकर आपकी अस्वस्थ माँ की देखभाल करती थी। इसी कारण पेंशन प्रपत्रों में पत्नि के कॉलम में तृप्ति मिश्रा का नामांकन किया गया। प्रस्तुत सेवापुस्तिका का सूक्ष्मता से परीक्षण करने पर यह पाया गया कि सेवापुस्तिका में पृष्ठ क्रमांक 01 से 08 (कुल 08) पृथक से जोड़े गये है। डॉ. संजय मिश्रा के द्वारा स्वयं अपने हस्ताक्षरयुक्त बयान दिनांक 30.08.2024. 06.2.2024 एवं 03.04.2025 में यह कथन किया गया है कि उनके द्वारा अपनी सेवापुस्तिका में श्रीमती तृप्ति मिश्रा का नामांकन पेंशन फॉर्म में पत्नी के रूप में किया है। डॉ. संजय मिश्रा द्वारा स्वयं यह स्वीकार किया गया है कि उन्होंने कोषालय सॉफ्टवेयर आई.एफ.एम.आई.एस. में दर्ज परिवार विवरण में 2017 के पश्चात पत्नि के नाम में परिवर्तन किया है।
शिकायत में आरोप है कि आपके द्वारा इप्शिता सिंह मिश्रा के साथ मिलकर संयुक्त नाम से रामपुर जिला जबलपुर स्थित ओजस इम्पीरिया नामक हाउसिंग प्रोजेक्ट में बिना शासन के अनुमति के फ्लैट क्रं- 1201 अचल संपति का क्रय किया है। इस आरोप का सत्यापन जिला पंजीयक, जबलपुर से कराया गया। उनके द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार डॉ. संजय मिश्रा एवं श्रीमति इशिप्ता सिंह मिश्रा के द्वारा 50 लाख का भुगतान कर दिनाक 22.07.2021 को फ्लेट खरीदा गया है। डॉ. मिश्रा के द्वारा फ्लेट क्रय करने की अनुमति लेने के सम्बंध में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया होने से बिना सक्षम स्वीकृति के अचल संपत्ति खरीदने सम्बंधी आरोप प्रमाणित है।
सेवा पुस्तिका में जोड़ दिए गए फर्जी पेज
आरोप पत्र में आरोप क्रमांक 3 के अंतर्गत शासन द्वारा अभिकथन किया गया है कि आपके द्वारा संस्था प्रमुख (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) के पद पर रहते हुये सेवा अभिलेखों / सेवा पुस्तिका में कूटरचित तरीके से षडयंत्रपूर्वक पृथक से 08 पृष्ठ जोड़े गये हैं जिसमें दूसरी पत्नी के रूप में तृप्ति मिश्रा का नाम दर्ज था। इस प्रकार आपने शासकीय अभिलेखों एवं सेवा पुस्तिका में हेराफेरी व छेडछाड़ की गई है। जो कि अपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता हैं। डॉ संजय मिश्रा ने इसका जवाब देते हुए माना कि उन्होंने पेंशन फॉर्म में तृप्ति मिश्रा को पत्नी के रूप में दर्ज कराया, क्योंकि वह उनकी मां की सेवा करती थीं और घर में रहती थीं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आई.एफ.एम.आई.एस. सॉफ्टवेयर में परिवार विवरण में 2017 के बाद नाम परिवर्तन किया गया।
संचालनालय की जांच में यह सामने आया कि डॉ. मिश्रा का यह बयान उनके पहले के बयानों से मेल नहीं खाता। सेवापुस्तिका में आठ पृष्ठों को अलग से जोड़ा जाना एक गंभीर प्रशासनिक कदाचार और फोरजरी माना गया।
कोषालय सॉफ्टवेयर में किया अवैध नामांकन परिवर्तन-
आरोप पत्र में आरोप क्रमांक 4 के अंतर्गत में शासन द्वारा अभिकथन किया गया है कि आपके द्वारा बिना सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के कोषालय सॉफ्टवेयर (आई.एफ.एम.आई.एस.) में नामांकन परिवर्तन किया गया है जो कि घोर कदाचरण की श्रेणी में आता है। म.प्र. सिविल सेवा नियमों के अनुसार शासकीय सेवक सूचना देकर नामांकन निरस्त करा सकता है, परन्तु यह कि वह ऐसी सूचना के साथ एक नया नामांकन प्रस्तुत करेगा। डॉ. संजय मिश्रा के द्वारा इस नियम के विपरीत बिना सक्षम स्वीकृति के नामांकन में परिवर्तन किया गया है। इस कारण डॉ. संजय मिश्रा द्वारा कोषालय सॉफ्टवेयर में किया गया परिवर्तन मान्य नहीं है। अत उक्त आरोप पूर्णतः प्रमाणित हो रहा है। इस प्रकार आपका उपरोक्त वर्णित कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम के अनुरूप न होकर कदाचरण की श्रेणी में आता है तथा आप उक्त नियमों का पालन न कर अपने कार्य के प्रति संनिष्ठ एवं कर्तव्यपरायण न रहते हुये, स्वयं को अनुशासनात्मक कार्यवाही का भागी बना लिया हैं।
स्वास्थ्य विभाग में प्राप्त प्रथम नियुक्ति अवैध
आरोप पत्र में लेख है कि शिकायतकर्ताओं द्वारा आरोप लगाया है कि वर्श 1990 में लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयन होने के बाद भी अपने चयनित पद पर डॉ मिश्रा 7 वर्ष के पश्चात उपस्थित हुए, अतः उनकी नियुक्ति प्रचलित नियमों के विपरीत है। डॉ मिश्रा ने अपने कथन में बताया कि वे वर्ष 1990 में पैथोलाजी विशय में अध्ययन कर रहे थे जिसके लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मंडला द्वारा अनुमति दी गई लेकिन डॉ मिश्रा के द्वारा उपरोक्त वर्णित अनुमति के संबंध में कोई दस्तावेज व साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए।
डॉ. मिश्रा के जवाबों ने उन्हें ही साबित कर दिया दोषी
हालांकि, जबलपुर के सीएमएचओ डॉक्टर संजय मिश्रा को भेजे गए कारण बताओ नोटिस के बाद डॉ. मिश्रा ने इन आरोपों के जवाब में कई तथ्यों और दस्तावेजों का हवाला देते हुए संचालनालय के समक्ष अपना जबाव प्रस्तुत किया गया था। डॉ. संजय मिश्रा के खिलाफ लगे आरोपों को उनके जवाब ने खुद ही सही साबित कर दिया है। प्रशासनिक स्तर पर जारी जांच रिपोर्ट में हर मामले में उनके जवाबों को अस्पष्ट और विरोधाभासी माना गया। जांच कमेटी को दिए गए जवाब में वह खुद उलझ गए। जिसके कारण विभाग ने साफ कर दिया है कि अब डॉक्टर संजय मिश्रा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और इससे विभागीय जांच शुरू कर दी गई।

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