कटनी दर्पणमध्य प्रदेश

सोसाइटी फाॅर प्राइवेट स्कूल डायरेक्टर्सःमप्र (सोपास)

कटनी दर्पण। शासन के ध्यानाकर्षण हेतु 12 जुलाई 2021 को प्रदेश के सभी निजी विद्यालयों में एक दिवसीय सांकेतिक बंद। वही हम सोसायटी फॉर प्राइवेट स्कूल डायरेक्टर्स मध्य प्रदेश व हमारे मित्र संगठनों से जुङे संस्थायें मिलकर राज्य में सीबीएसई, आईसीएसई और एमपी बोर्ड से संबद्ध लगभग 20,000 से ज्यादा गैर अनुदान प्राप्त निजी विद्यालयों का प्रतिनिधित्व करते हैं।विगत 18 माह से पूरा विश्व कोरोना की महामारी से जूझ रहा है, महामारी की द्वितीय लहर ने हमें इसकी भयावहता से परिचित करवाया है और विशेषज्ञों की माने तो महामारी की तीसरी लहर आने की भी संभावना है। इस महामारी से सभी व्यावसयिक क्षेत्र प्रभावित हुए हैं, किन्तु स्कूली शिक्षा सबसे अधिक प्रभावित हुई है। कक्षा नौवीं से बारहवीं के विद्यार्थियों को छोड़ कर जिन्होंने गत सत्र में दो-तीन माह स्कूल अटेंड किया है, अन्य सभी विद्यार्थी विगत 16 माह से स्कूल आकर शिक्षा ग्रहण करने से वंचित हैं इससे उनके शिक्षण की ही नहीं वरन मानसिक एवं शारीरिक विकास की भी हानि लगातार हो रही है।
लॉकडाऊन के समय प्राइवेट स्कूल द्वारा ऑनलाइन शिक्षण को जिस प्रकार सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया गया है वह बच्चों के लिए लाभकारी सिद्ध हुई है किन्तु केवल ऑनलाइन शिक्षण बच्चों के लिए काफी नहीं है यह बहुत लम्बे समय तक दिए जाने वाला विकल्प भी नहीं है। हम सरकार को बधाई देते हैं कि सरकार ने प्रदेश में कोरोना को पूरी तरह से नियंत्रित कर लिया है द्वितीय लहर गुजरने के पश्चात एक ओर जहां सरकार ने हर क्षेत्र में ढील देते हुए व्यापार एवं सेवाओं को बहाल करने का काम किया है वही दूसरी ओर शिक्षण संस्थाएं आज भी बंद हैं। बच्चे अकेले अथवा अपने पालकों के साथ बाजार, मॉल, शादी, पिकनिक, मेले, भ्रमण इत्यादि में जा रहे हैं परन्तु उनके बच्चों के स्कूल जाने पर रोक लगी हुई है। इसी तारतम्य में हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री महोदय द्वारा कोरोना की तीसरी लहर की संभावना के चलते विद्यालयों को बंद रखने की घोषणा की गई जबकि अन्य राज्य एक के बाद एक स्कूल खोलने की घोषणा कर रहे हैं।माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा की गई घोषणा ने पूरे प्रदेश के शिक्षकों, विद्यार्थियों, पालकों एवं शिक्षाविदों को हिला कर रख दिया है। सरकार के पक्षपातपूर्ण (सौतेले) रवैये से सभी व्यथित हैं । अतः आज प्रदेश की लगभग सभी अशासकीय विद्यालयों की ओर से हम आपके माध्यम से सरकार के समक्ष हमारी कुछ जायज मांगे इस आशा से रख रहे हैं कि सरकार संवेदनशील तरीके से निर्णय लेगी व जिसके प्रभाव से प्रदेश के शैक्षिक विकास में योगदान देने वाली ये अशासकीय शिक्षण संस्थान जीवित रह सकेंगी:-
सरकार से हमारी माँगें निम्नानुसार हैं:-
1. कोरोना की तीसरी लहर की संभावना के चलते स्कूल बंद रखे जाने का बगैर सोचे समझे लिये गया निर्णय तत्काल वापस ले तथा अन्य राज्यों की तरह हमारे प्रदेश में भी विद्यालय खोले जाएं।
2. चूँकि शिक्षा हमेशा से सरकार हेतु प्राथमिक विषय रहा है अतः 16 माह से बन्द विद्यालयों के आर्थिक संकट को दूर करने के लिए:- प्रदेश के सभी निजी विद्यालयों को आर्थिक पैकेज घोषित किया जाये, जिसके अन्तर्गत उनके द्वारा लिए गए ऋण पर लगने वाले ब्याज की प्रतिपूर्ति हो सके और वे दिवालिया होने से बच सकें। स्कूल खुलने तक सभी प्रकार के ऋणों की वसूली बंद हो। सभी शिक्षण संस्थानों के बिजली बिल उपयोग के अनुसार लेते हुए पुराने बिल समायोजित किये जायें। भू व्यपवर्तन कर, संपत्ति कर, स्कूल के वाहनो का रोड टैक्स एवं परमिट शुक्ल वर्ष 20-21 एवं 21 -22 हेतु शून्य किया जावे।
IV. RTE के अंतर्गत प्रवेशित विद्यार्थों के शिक्षण सत्र 20 – 21 तक की बकाया शुल्क की प्रतिपूर्ति अविलंब की जावे।
3. केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में जारी दिशानिर्देशों (SOP) के अनुसार कक्षा नौंवी से बारहवीं के स्कूल अविलंब खोले जाएं। साथ ही साथ अन्य कक्षाओं को क्रमवार खोलने के तारीख भी घोषित की जाए।
4. माननीय उच्च एवं उच्चतम न्यायालय के निर्णयानुसार केवल शिक्षण शुल्क (ट्यूशन फीस) ही लेने का आदेश सत्र 20 -21 हेतु था, अतः सत्र 21 -22 में विद्यालयों को शिक्षण शुल्क के साथ साथ अन्य शुल्क जैसे वार्षिक शुल्क, विकास शुल्क, इत्यादि लेने की अनुमति फीस नियंत्रण कानून के अंतर्गत दी जावे।
5. शिक्षा के अधिकार कानून के अंतर्गत जैसे स्कूल बच्चों की नियमित शिक्षा देने हेतु बाध्य है उसी प्रकार माता-पिता को भी अपने बच्चे की निर्बाध शिक्षण हेतु स्कूल की फीस भुगतान हेतु आदेश जारी होना चाहिए। छत्तीसगढ उच्च न्यायालय ने पालक द्वारा फीस ना जमा करने को उस विद्यालय में अध्ययनरत अन्य विद्यार्थियों की शिक्षा के अधिकार का हनन माना है। इसलिए यदि कोई पालक जानबूझकर स्कूल फीस के भुगतान में देरी /आनाकानी करते है तो उन्हें विलम्ब शुल्क सहित फीस जमा करने को बाध्य करने के आदेश दिया जाना चाहिए। इस तरह के आदेश ना होने के कारण अनेक पालकों ने विद्यालय की फीस जमा नहीं की है।
6. मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा मार्च में नोटिस जारी किया गया था कि कोई भी स्कूल बिना टीसी के किसी अन्य बच्चे को प्रवेश नहीं देगा परंतु कई निजी एवं सरकारी विद्यालय बिना टीसी के बच्चों को प्रवेश दे रहे हैं ऐसे स्कूलों पर शिक्षा विभाग को बिना किसी पक्षपात के दंडात्मक कार्यवाही करनी चाहिए l
7. राज्य सरकार एवं माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार जो पालक अपने बच्चों का शिक्षण शुल्क बिना किसी पर्याप्त कारण के जमा नही कर रहे है उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाना चाहिए।
8. सरकार प्राइवेट स्कूल संचालकों के साथ मिलकर मंथन करे साथ ही निजी स्कूलों के बारे में निर्णय लेते समय निजी स्कूल एसोसिएशन को निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होना चाहिए। ताकि प्रदेश में विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की अकादमिक क्षति ना हो ।
9. माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्धता प्राप्त स्कूलों की मान्यता नवीनीकरण 5 वर्ष के लिए कर दी जाए जैसा कि शिक्षा मंत्री ने स्वयं इस बात की घोषणा की थी

विदित हो कि शासन एवं कोर्ट के ट्यूशन फीस का भुगतान करने के आदेश के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से भी कम विद्यार्थियों के पालकों ने शिक्षण शुल्क का भुगतान किया है इस कारण प्रदेश के हज़ारों शिक्षण संस्थान भयंकर आर्थिक संकट का सामना कर रहे है और उनकी व्यस्थाएं चरमरा चुकी है। यदि सरकार अब नहीं चेती तो प्रदेश के 15 लाख परिवार जो इन संस्थाओं से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं उनके समक्ष जीवनयापन का संकट उत्पन्न हो जावेगा।
इसलिए हमारा सरकार से अनुरोध है की शीघ्र व यथोचित निर्णय ले।
आशा है हमारा यह सांकेतिक बंद हमारी सरकार को विषय की गम्भीरता से परिचय कराएगा और वो यथाशीघ्र हमारे पक्ष में निर्णय लेंगे।।

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