सतानंद दमाहे की शिकायत पर शासकीय महाविद्यालय लालबर्रा में जांच दल ने की जांच

लालबर्रा जगलपुर दर्पण । शासकीय महाविद्यालय लालबर्रा से जुड़ी दो प्रमुख शिकायतों—कर्मचारियों के मुख्यालय में न रहने और लैब अटेंडेंट की कथित अनियमित नियुक्तियों—की जांच के लिए शुक्रवार को बालाघाट से तीन सदस्यीय जांच समिति कॉलेज पहुंची। जटाशंकर त्रिवेदी स्नातकोत्तर महाविद्यालय (प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस), बालाघाट से गठित समिति में प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार मराठे, प्रो. पी.एस. अतुलकर एवं डॉ. भूपेंद्र ब्रम्हे शामिल थे। समिति ने कॉलेज में पहुंचकर प्राचार्य कक्ष में बैठक की और संबंधित सभी पक्षों से उनके लिखित बयान लिए। हालांकि, इस दौरान किसी से प्रत्यक्ष रूप से पूछताछ नहीं की गई और न ही किसी दस्तावेज की जांच की गई। जांच प्रक्रिया पूरी तरह लिखित प्रतिवेदनों पर आधारित रही। ग्राम नगपुरा के पूर्व सरपंच सतानंद दमाहे, जिन्होंने यह शिकायत उच्च शिक्षा विभाग एवं कलेक्टर बालाघाट को की थी, उन्हें भी कॉलेज में अपना पक्ष रखने बुलवाया गया। श्री दमाहे ने कहा कि वे जांच समिति के समक्ष मौखिक रूप से पक्ष रखने की तैयारी करके आए थे, लेकिन केवल लिखित रूप में बयान लेने की प्रक्रिया अपनाई गई।
जांच दल ने पत्रकारों के सवालों के नहीं दिए जवाब
जांच समिति एवं कॉलेज प्रबंधन ने पत्रकारों से बातचीत करने से इनकार कर दिया। मीडिया द्वारा पूछे जाने पर समिति ने केवल इतना कहा कि सभी पक्षों से बयान लेकर रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जो दो दिन में उच्च शिक्षा विभाग को भेजी जाएगी।
जांच में है दो प्रमुख बिंदु
शिकायतकर्ता श्री दमाहे ने कॉलेज के प्राध्यापकों और कर्मचारियों पर मुख्यालय में न रहने का आरोप लगाया है, जिससे नियमित पढ़ाई और अनुशासन पर असर पड़ने की बात कही गई है। दूसरी शिकायत में 3 मई को सेडमैप के माध्यम से चार लैब अटेंडेंट की नियुक्तियों में पारदर्शिता की कमी, बिना सार्वजनिक विज्ञापन के चयन और जनभागीदारी समिति के निर्देशों की अवहेलना के आरोप शामिल हैं।
जांच रपट की प्रतीक्षा में दोनों पक्ष
जांच के निष्कर्ष अब उच्च शिक्षा विभाग के स्तर पर तय होंगे। रिपोर्ट के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि आरोप सही हैं या नहीं, और यदि हैं, तो संबंधित जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी। फिलहाल महाविद्यालय प्रशासन और शिकायतकर्ता दोनों ही जांच के परिणाम की प्रतीक्षा में हैं।



