जी 20:हरित विकासएवं सप्तर्षि बजटपर द्वि दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

जबलपुर दर्पण। किसी एक नीति द्वारा ही नहीं अपितु सभी के सम्यक और सतत् प्रयास और परिश्रम द्वारा ही पर्यावरण की सुरक्षा की जा सकती है और इसे रहने योग्य बनाया जा सकताहै।“उपर्युक्त उद्गार संगोष्ठी के समापन अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि मेजर जनरल पी. एस. दाहिया (चीफ ऑफ स्टाफ, मुख्यालय मध्य भारत क्षेत्र, जबलपुर) के द्वारा व्यक्त किए गए। समापन कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलन, प्रार्थना गीत एवं अतिथियों के स्वागत के द्वारा हुआ। तत्पश्चात संगोष्ठी की संयोजिका डॉ. रुपाली आहलुवालिया द्वारा संगोष्ठी की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फा. वलन अरासू ने स्वागत भाषण में कहा कि “जी. 20 के दो मुख्य लक्ष्य हरित विकास और रोजगार हैं।इन दोनों के द्वारा ही समाज एवं राष्ट्र को स्थायित्व प्राप्त होता है।“कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. एस. एस. संधू (निदेशक, डिजाइन और इनोवेशन सेंटर रा.दु.वि.वि., जबलपुर) का संदेश इस प्रकार था “हम सभी को वृक्ष संरक्षण के साथ ही जल संरक्षण विशेषत:शैवालों पर ध्यान देना आवश्यक है जिससे प्राणदायिनी ऑक्सीजन में भी बढ़ोतरी होगी।“विशिष्ट अतिथि डॉ.पुनीत गांधी (प्रोफेसर और प्रमुख आई.सी.एम.आर. अनुसंधान और प्रशिक्षणविभाग, भोपाल) ने संदेश दिया कि “बहुविषयक सहयोग और प्रयासके द्वारा ही पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है।“
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में चार तकनीकी संपन्न हुए। उपर्युक्त सत्रों में क्रमशः विषय विशेषज्ञ प्रो. कन्हैया आहूजा, डॉ. शुभाशीष भट्टाचार्य, डॉ. नमिता राजपूत एवं डॉ. पुनीत गाँधी थे तथा अध्यक्षता डॉ. नीलांजना पाठक, डॉ. कल्लोल दास, डॉ.सोनल राय एवंडॉ. अंजली डिसूजा द्वारा की गई । उपर्युक्त सत्रों में सौ से अधिक शोध पत्रों का वाचन किया गया।समापन कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन डॉ. निधि खुराना एवंश्री जतिन आनंद के द्वारा तथा आभार प्रदर्शन डॉ. तरविन्दर कौर किया गया।



