पाटन के पवईधाम अमरपुर में श्री शिवसमाराधन महायज्ञ द्वितीय दिवस उमड़े श्रद्धालु

जबलपुर दर्पण। जीवन-मरण, भय-दरिद्र एवं दुखों से मुक्ति प्रदान कर अभय पद एवं अमृत पान तथा आनंद की अनुभूति कराने वाला एकमात्र श्रीमद्भागवत महापुराण ही है। सदियों से जीव मात्र को मोक्ष प्रदान करने वाला यह ग्रंथ आज भी उतना ही प्रबल एवं प्रासंगिक है जितना कि अंधकार दूर करने में मार्तंड है। यह विचार वृंदावन से पधारे विश्व िवख्यात कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने पाटन के पवई धाम में श्री शिवसमाराध महायज्ञ के दौरान आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस व्यक्त िकए। उन्होंने कहा िक संपूर्ण मानव समुदाय को चाहिए कि वह भागवत की कथा सुनकर आत्म कल्याण अवश्य करें एवं अपने जीवन को परम सौभाग्य की प्राप्ति कराए।
भागवत जीवन दर्शन देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने कहा कि भागवत एक जीवन दर्शन है, इसमें ऐसी कथाएँ हैं जो मानव को जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा िक महर्षि वेदव्यास जी ने वेदों के चार भागों में िवभक्त किया। इसके बाद उन्होंने 17 पुराणों की रचना की। इससे भी वे संतुष्ट नहीं हुए। उनका मन खिन्न था। ऐसे में देवर्षि नारद ने उन्हें श्रीमद् भागवत कथा की रचना करने की प्रेरणा दी। वेदव्यास जी ने भागवत की रचना कर सुखदेव जी को भागवत का ज्ञान कराया। जिसे सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को श्रवण कराया। नर्मदा शुद्धिकरण का संकल्प दिलाएँगे कथा के पूर्व स्वामी महेन्द्रानंद महाराज ने बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा िक माँ नर्मदा के रूप में परमात्मा ने हम पर बड़ी कृपा की है। इसलिए हमारा दायित्व है िक हम माँ नर्मदा को स्वच्छ रखें। उन्होंने माँ नर्मदा की शुद्धिकरण के लिए अभियान चलाने की बात की रखी। इसके पूर्व प्रात: 108 यजमानों ने भगवान शंकर का पूजन-अभिषेक िकया। अमरकंटक से पधारे ऋषभ देव महाराज ने 108 वैदिक विद्वानों से पूजन संपन्न कराया। यजमानों ने वैदिक मंत्रों के बीच आहुतियाँ दीं। इस अवसर पर राजेश सिंह ठाकुर, पूर्व विधायक देवेन्द्र सिंह पटेल, महेन्द्र सिंह ठाकुर, आनंद मोहन पल्हा, श्याम मनोहर पटेल, हेमंत पटेल, हरमोहन शर्मा, निलेश पचौरी, गोविंद ठाकुर, ओम नारायण पचोरी, मोहन तिवारी, राकेश सिंह, देवेंद्र यादव, मनीष पचोरी, गोपाल साहू, ओंकार पटेल, रोहिणी, बादल, मुदित पचौरी, अनमोल पल्हा, जितेश पचोरी, वरुण पचोरी, राजेंद्र, श्रुति, लक्ष्य पचौरी, ठाकुर उदयभान सिंह, आचार्य जागेंद्र सिंह, अनिरुद्ध विश्नोई आदि मौजूद रहे।



