सुख और दुख जीवन के दो किनारे हैं:- जनसंत विरंजन सागर

जबलपुर दर्पण। व्यक्ति को अपने कर्मों का फल मिलता है जो जैसे कर्म करेगा उसको वैसा ही फल मिलेगा। स्वर्ग और नर्क किसी ने नहीं देखा पर अपने कर्मों के परिणामों से व्यक्ति यही स्वर्ग का सुख पा लेता है और यही नर्क के दुख भोगता है। अतः जीवन में हमेशा अच्छे कर्म करते रहिए यह संदेश जनसंत उपाध्याय मुनि विरंजन सागर जी महराज ने तारण तरण चैत्यालय में प्रवचन सभा को संबोधित करते हुए कही।
मुनि श्री ने कहा सुख और दुख जीवन के दो किनारे हैं जीवन में सुख भी आते हैं और दुख श्री। ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो केवल सुखी हो और उसके जीवन में दुख नहीं है। जिस प्रकार एक काली रात के बाद नूतन सुबह आती है उसी प्रकार दुखो के एक निश्चित समय के बाद सुख भी आते हैं। दुखों के समय में हमारे कर्म हमारे समता भव और ईश्वर के प्रति भक्ति हमारे भविष्य का निर्माण करती है। कई लोग जीवन में सिर्फ दुख के समय ईश्वर का जाप करते हैं और सुख के समय बहन आनंद के छार्ला को व्यतीत करते हुए ईश्वर के प्रति श्रद्धा और ईश्वर को याद करना भूल जाते हैं। पर परमात्मा का नाम हमेशा लेना चाहिए। यदि जीवन में सुख है तो हमें यह सोचना चाहिए हमारे अच्छे कर्मों के कारण ईश्वर ने हमें यह खुशी के पल दिए हैं। यदि दुख का समय है तो हमें यह सोचना चाहिए हमारे कर्मों के उदय के कारण ईश्वर हमारी परीक्षा ले रहा है महत्वपूर्ण यह है उस समय हम अपने भाव और परिणामों को कैसा रखे। मुनि श्री ने कहा एक निश्चित दूरी होने के बाद पानी भाषा और रहन सहन भी बदल जाता है उसी तरह बुरे समय के बाद ईश्वर आपको आनंद के पल भी देगा बस अपनी भक्ति सकारात्मक रखें। ईश्वर एक अदृश्य ऊर्जा है जिसे अपनी आत्मा में विराजमान करने की आवश्यकता है। मुनि श्री ने कहा यदि कोई राजा है तो वह भी उसके कमी का
पुण्य प्रताप है और यदि कोई रंक है तो वह भी उसके कर्मी का प्रतिफल है। मुनि श्री ने विशेष तौर पर युवाओं को आध्यात्मिक और धार्मिक राह पर चलने की अपील की। जीवन में अच्छे कार्य करके अपने नैतिक मूल्यों से भी ईश्वर के करीब आया जा सकता है। और यदि आप ईश्वर के करीब आना चाहते हैं तो निश्चित थी ईश्वर आपके करीब आएंगे। उन्होंने प्रवचन में सभी धर्म गुरुओं और सिद्धांती में समभाव रखते हुए धर्म का मर्म समझाया।
जात हो तारण तरण चैत्यला में पहली बार दिगंबर मुनि की प्रवचन सभा हुई। इस बैठक के अवसर पर डॉ. अखिल जैन सागर, काकू मधवाल, सुनील तारबाबू, निधि तारबाबू, अंकुश भैया ग्वालियर, श्री प्रवीण चंद जैन, प्रेमांश जैन मंत्री, अंकित समैया, संयम, रितेश, मोहित, अर्पण, स्वप्निल, संस्कार समैया , राहुल क्रॉकरी, मनीष कलेक्टोरेट, मुरली बसंल, गुवा परिषद जबलपुर, एवं सकल तारण तरण दिगंबर जैन समाज उपस्थित थे।



