स्मार्ट कृषि उपज मंडी की आवश्यकता पर जबलपुर चेम्बर का जोर

जबलपुर दर्पण। जबलपुर शहर के निरंतर विस्तार और बढ़ती जनसंख्या के कारण 50 वर्ष पहले बनी 55 एकड़ में स्थित जबलपुर कृषि उपज मंडी अब पुरानी और छोटी पड़ गई है। शहर के बीचों-बीच स्थित होने के कारण न केवल किसानों को अपने कृषि उत्पाद को लाने और ले जाने में परेशानी होती है, बल्कि व्यापारियों को भी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ता है।
इस गंभीर समस्या को लेकर आज जबलपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के पदाधिकारियों और जबलपुर थोक सब्जी विक्रेता संघ के अध्यक्ष अजीत साहू के नेतृत्व में एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कृषि उपज मंडी के नवीकरण और आधुनिकता लाने के सुझावों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में जबलपुर थोक सब्जी विक्रेता संघ के पदाधिकारियों ने एक “स्मार्ट कृषि उपज मंडी” की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए। जबलपुर में लगभग 200 एकड़ में ऐसी एक मंडी बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है, जिसे शहर के बाहर रिंग रोड के पास स्थित किया जा सके, ताकि मंडी को एक नया और आधुनिक रूप दिया जा सके।
जबलपुर चेम्बर के अध्यक्ष प्रेम दुबे ने कहा कि किसानों और व्यापारियों की समस्याओं का समाधान केवल एक नई और समुचित कृषि उपज मंडी के निर्माण से ही संभव है, जो नई बाईपास रोड पर हो। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी के साथ एक बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि शहर से बाहर रिंग रोड के किनारे एक अत्याधुनिक होलसेल मार्केट बनाया जाएगा, जिसमें सभी थोक व्यापारी अपनी व्यापारिक गतिविधियाँ सुगमता से कर सकेंगे।
चेम्बर ने जिला प्रशासन (कलेक्टर) से अनुरोध किया है कि थोक व्यापारियों के लिए एक मास्टर प्लान तैयार कर केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी को भेजा जाए, ताकि केंद्र सरकार से सहायता प्राप्त कर एक सर्वसुविधायुक्त व्यवसायिक कॉम्पलेक्स का निर्माण संभव हो सके।
बैठक में जबलपुर चेम्बर के अन्य सदस्य जैसे कमल ग्रोवर, राधेश्याम अग्रवाल, अजय बख्तावर, अजय अग्रवाल, पंकज माहेश्वरी, वीरेन्द्र केशरवानी, नरिंदर सिंह पांधे, अरुण पवार, बलदीप सिंह मैनी, निखिल पाहवा, दीपक सेठी, राकेश श्रीवास्तव, देवी सिंह पटेल, शशिकांत पांडेय, रोशन मुलतानी, और उमेश ग्रावकर भी उपस्थित थे।



