लावारिस बुजुर्ग महिला की तलाश में परिवार को मिला सहारा, मोक्ष आश्रय ने किया मदद

जबलपुर दर्पण । जिले से लावारिस अवस्था में अस्पताल भेजी गई एक बुजुर्ग महिला की तलाश में उसका परिवार भटक रहा था, जब उसे अस्पताल से कोई जानकारी नहीं मिली। अंततः मोक्ष मानव सेवा और जन उत्थान समिति ने उसकी तलाश करने में मदद की और उसे परिवार से मिलवाया। यह घटना 6 दिसंबर 2024 की है, जब सुरुचि केवट (65 वर्ष) को मंडला जिले में एक बैल ने मार दिया। उसे मंडला जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन दो दिन बाद 108 एंबुलेंस द्वारा महिला को जबलपुर मेडिकल भेजा गया। इसके बाद परिवार ने महिला की तलाश शुरू की, लेकिन मेडिकल से उसे लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। परिवार ने मृत मानकर उसकी तलाश की, यहां तक कि तिलवारा चौहानी श्मशान घाट तक जाकर रजिस्टर चेक किए, लेकिन कुछ पता नहीं चला। जब परिवार ने आशीष ठाकुर, मोक्ष आश्रय के संस्थापक से संपर्क किया, तो उन्हें पता चला कि महिला मोक्ष आश्रय में भर्ती की गई है। इसके बाद, परिवार के सदस्य अंबिका केवट, जो महिला की बहु हैं, अपने बच्चों के साथ मोक्ष आश्रय पहुंचे और अपनी सास को पहचान लिया। परिवार को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि महिला को एक दिन पहले 108 के माध्यम से लाया गया था, लेकिन बिना इलाज के उसे सड़क पर छोड़ दिया गया था। अंबिका केवट ने बताया कि उनकी सास सुरुचि केवट मंडला के रपटा क्षेत्र में रहती थीं। उनके दो बच्चे थे, एक बेटा जिसका निधन हो चुका है और एक बेटी भी मृत हो चुकी थी। अंबिका, जो खुद एक प्राइवेट कामकाजी महिला हैं, जब उन्हें जानकारी मिली तो वह तुरंत अपनी सास को लेने आईं। अंबिका ने यह भी बताया कि उनकी सास का आधार कार्ड और आयुष्मान कार्ड नहीं था, जो सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आवश्यक होते हैं। आशीष ठाकुर ने इस पर चिंता जताई कि ऐसे लावारिस मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं मिलता है और न ही उनके परिवार की तलाश की जाती है। उन्होंने कहा, “हर रोज़ अस्पतालों में ऐसे लावारिस मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिन्हें या तो इलाज नहीं मिल रहा या उन्हें आधा-अधूरा इलाज देकर छोड़ दिया जा रहा है।” मोक्ष आश्रय में ऐसे मरीजों का इलाज और देखभाल की जाती है, लेकिन इसके लिए आवश्यक संसाधन और सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। मोक्ष संस्था का कहना है कि इन मरीजों की मदद के लिए अस्पतालों और प्रशासन से सहयोग की आवश्यकता है। यदि यह लोग इलाज के दौरान ठीक हो जाते हैं तो उन्हें फिर से सड़क पर क्यों छोड़ा जाता है, इस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों से सहयोग की अपील की। अंबिका केवट ने मोक्ष संस्था का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अपनी सास को फिर से मिलाकर खुशी हुई है और वह चाहती हैं कि ऐसी लावारिस मरीजों को इलाज मिले और वे मुख्य धारा से जुड़ सकें। दो अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार
इससे पहले, 8-9 दिसंबर 2024 को थाना तिलवारा के अंतर्गत दो अज्ञात शवों की सूचना मोक्ष आश्रय को दी गई थी। संस्था के सदस्य आशीष ठाकुर ने शवों को कफन दफन करने के लिए तिलवारा श्मशान घाट भेजा। यह घटना भी लावारिस मरीजों और शवों की बढ़ती समस्या की ओर इशारा करती है, जो चिकित्सा संस्थाओं की उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं।
इस अवसर पर मोक्ष आश्रय के सदस्य विकास, विवेक, नीरज, आकाश, प्रशांत, और बबी भाई भी मौजूद रहे।



