मध्य प्रदेश

आरक्षण, वनाधिकार सहित आदिवासी महोत्सव को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने दिया धरना, सौंपा ज्ञापन

मण्डला।‌ सर्व आदिवासी समाज व आदिवासी महापंचायत के तत्वावधान में शनिवार को जिले के सभी 9 विकासखंडों में विभिन्न मांगों व समस्याओं को लेकर धरना प्रदर्शन किया गया। इस हेतु पूर्व से ही बैठक करके तैयारियां की गई थीं और सभी विकासखंड मुख्यालय में धरना कार्यक्रम हेतु प्रभारी नियुक्त किये गए थे। प्रातः 11 बजे से धरना प्रारम्भ कर शाम को देश के महामहिम राष्ट्रपति व प्रदेश के उपराज्यपाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया। इस धरना कार्यक्रम में कांग्रेस, गोंडवाना सहित सामाजिक संगठनों का भी साथ मिला और धरना कार्यक्रम में उपस्थित होकर मांगो का समर्थन किया गया। 

ज्ञापन के माध्यम से सर्व आदिवासी समाज व आदिवासी महापंचायत ने अपनी मांगों व समस्याओं की पूर्ति व निराकरण की मांग की है। जिसमें शासकीय नियुक्ति में आरक्षण के प्रावधानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गए निर्णय को लेकर केंद्र सरकार द्वारा मजबूती के साथ पक्ष रखने की मांग की गई। इसी प्रकार वनाधिकार कानून को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा मजबूती के साथ पक्ष रखकर वन भूमि का समुचित अधिकार दिलाये जाने की मांग की गई है। साथ ही आरएसएस प्रमुख के द्वारा आदिवासी समाज को हिन्दू धर्म लिखे जाने की मांग का विरोध करते हुए आदिवासी समाज के लिए अलग धर्म कोड बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाये जाने की मांग की गई है। 

आदिवासियों के विकास के लिए बनाई गई आदिवासी उपयोजना जो केंद्र सरकार द्वारा बंद करने की तैयारी की जा रही है उसे पुनः मूल स्वरूप में लागू किये जाने की मांग की गई है एवं जिले में पूर्व के वर्षों में आयोजित किये गए आदिवासी महोत्सवों में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री व मंत्रियों द्वारा आदिवासी संस्कृति के सरंक्षण हेतु किये जाने विकास कार्यों की घोषणा पूरी कराने की मांग की गई है। धरना प्रदर्शन व ज्ञापन हेतु मवई में विधायक नारायण सिंह पट्टा, मोहगांव में विधायक डॉ अशोक मर्सकोले, घुघरी में कमल सिंह मरावी, बिछिया में सुनील उइके, निवास में चैन सिंह वरकड़े, नारायणगंज में भूपेंद्र वरकड़े, बीजाडांडी में राजेंद्र पुट्टा, नैनपुर में गुलाब उइके व मण्डला में गुलाब मरदारिया, इंदरजीत भंडारी, कमलेश तिलगाम को प्रभारी बनाया गया था जहां धरना प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान सभी ब्लॉक मुख्यालयों में आदिवासी समाज के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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