धनौली पंचायत में लिखी जा रही भ्रष्टाचार की इबारत,मनरेगा के नियम तार-तार, निर्माण कार्यों में मनमानी का बोलबाला

सीधी जबलपुर दर्पण । प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन एवं बुनियादी ढांचे के विकास के उद्देश्य से चलाई जा रही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचने के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। जनपद पंचायत मझौली अंतर्गत ग्राम पंचायत धनौली में नियमों की खुलेआम अनदेखी कर निर्माण कार्यों को मनमाने ढंग से कराया जा रहा है।पंचायत क्षेत्र में हो रहे पुलिया निर्माण कार्य के दौरान ग्रामीण यांत्रिक विभाग के समयपाल (टाइम कीपर) एवं उपयंत्री के प्रतिनिधि शिव प्रसाद नापित ने निरीक्षण के दौरान गुणवत्ता की भारी अनदेखी पाई। उन्होंने निर्माण एजेंसी को मौके पर ही मोबाइल के माध्यम से फटकार लगाई। हैरान करने वाली बात यह रही कि निर्माण स्थल पर अनिवार्य सूचना पटल भी नहीं लगाया गया था, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रमुख आधार होता है। मौके पर मस्टर रोल भी अनुपस्थित पाया गया, जिससे संदेह गहराया कि मजदूरों से कार्य कराए बिना ही दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, यह केवल एक उदाहरण है — धनौली पंचायत में अधिकांश निर्माण कार्यों में इसी तरह मनमानी और गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है।सूत्रों की मानें तो वर्ष 2025 में लगभग 10 हितग्राहियों के नाम पर खेत तालाब एवं पार्कोलेशन टैंक निर्माण के नाम पर लगभग 20 लाख रुपए के मस्टर रोल तैयार किए गए, जबकि संपूर्ण कार्य जेसीबी मशीनों से कराया गया। यह स्पष्ट रूप से मनरेगा अधिनियम का उल्लंघन है, जिसमें मजदूरों को रोजगार देना प्राथमिक उद्देश्य है।ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की निगरानी के लिए जिम्मेदार उपयंत्री पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब निर्माण कार्य मजदूरों से कराना अनिवार्य है, तो मशीन से कराए गए कार्य का सत्यापन कैसे किया गया? यदि मस्टर रोल फर्जी हैं।
, तो सत्यापन किस आधार पर हुआ? इससे साफ है कि जिनके ऊपर निगरानी की जिम्मेदारी है, वही संरक्षणदाता की भूमिका निभा रहे हैं।



