सीधी दर्पण

कुपोषित बच्चों को नहीं मिल रहा समुचित उपचार, कागज़ों में ही दौड़ रहा “कुपोषण मुक्त” का रथ

सीधी जबलपुर दर्पण। जिले में कुपोषित बच्चों को चिन्हांकन तो किया जा रहा है, लेकिन उन्हें पोषित करने आवश्यक कदम नहीं उठाये जा रहे हैं। कुपोषित बच्चों को पोषित करने शासन स्तर से पोषण पुनर्वास केंद्रों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण पोषण पुनर्वास केंद्र के बेड खाली पड़े रहते हैं। जिला मुख्यालय सहित जिले के समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक-एक पोषण पुनर्वास केंद्र खोला गया है। जिला अस्पताल सीधी परिसर स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र 20 बेड का है, जबकि सीएचसी के केंद्र 10-10 बेड के हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार कुल 80 बेड के पोषण पुनर्वास केंद्रों में वर्ष भर में 1920 कुपोषित बच्चों को भर्ती करने का लक्ष्य निर्धरित किया गया है, जिसके विरूद्ध माह अप्रेल 2024 से माह मार्च 2025 तक कुल 1263 कुपोषित बच्चे ही भर्ती कराये जा सके। जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण सुविधा के बावजूद कुपोषित बच्चे पोषण पुनर्वास केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, और केंद्रों के बेड खाली पड़े रहते हैं। बता दें कि जिले में पोषण पुनर्वास केेंद्रों की संख्या 07 है, वहीं स्वीकृत बिस्तरों की संख्या 80 है जिसमें सबसे बेहतर स्थिति में मझौली और सबसे खराब स्थिति में पोषण पुनर्वास केन्द्र सेमरिया हैं।
अति कम वजन के 31, कम वजन के 211 बच्चे
महिला बाल विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में अति कम वजन के 31 व कम वजन के 211 बच्चे चिन्हित हैं। इन्हे पोषित करने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने की आवश्यकता है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि मैदानी अमले को इस संबंध में आवश्यक निर्देश भी दिये गए हैं, लेकिन उनकी लाख समझाइस के बाद भी माता-पिता भर्ती कराने को तैयार नहीं होते। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिला अस्पताल सीधी के परिसर में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र कुपोषित बच्चों को भर्ती कराने का वार्षिक लक्ष्य- 1920 हैं
लक्ष्य के विरूद्ध वर्ष भर में भर्ती कराये गए कुपोषित बच्चे- 1263 हैं।
सेमरिया केंद्र हैं सबसे खराब
पोषण पुनर्वास केंद्रों में वर्ष भर में भर्ती कराये गए कुपोषित बच्चों के आंकड़े पर नजर दौड़ाएं तो सबसे बेहतर स्थिति मझौली की है, यहां 240 लक्ष्य के विरूद्ध 192 कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया गया। जबकि सबसे खराब स्थित सेमरिया सीएचसी की रही, यहां 240 वार्षिक लक्ष्य के विरूद्ध महज 93 कुपोषित बच्चे ही भर्ती कराये गए। इसके अलावा जिला अस्पताल के एनआरसी में 480 वार्षिक लक्ष्य के विरूद्ध 326, रामपुर नैकिन में 240 के विरूद्ध 185, सिहावल में 240 के विरूद्ध 169 और कुसमी में 240 के विरूद्ध 130 कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया गया।

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