आसुरी शक्तियों को भी मोक्ष देते हैं शिव :स्वामी नरसिंहदास

जबलपुर दर्पण। शिव और माँ पार्वती शक्ति सती प्रकृति तीनों का संयुक्त दर्शन अर्धनारीश्वर स्वरूप है। अर्धनारीश्वर तीन शब्दों का एक संयोजन है “अर्धा,” “नारी,” “ईश्वर” का अर्थ क्रमशः “आधा,” “महिला,” “भगवान” है, जिसका संयुक्त अर्थ है भगवान जिसका आधा एक महिला है ऐसा माना जाता है कि भगवान भगवान शिव हैं और महिला अंग उनकी पत्नी देवी पार्वती या शक्ति हैं ।अर्धनारीश्वर एक रचनात्मक और उत्पादक शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है ।अर्धनारीश्वर पुरुष और महिला सिद्धांतों के प्रतीक हैं जिन्हें अलग नहीं किया जा सकता है,भगवान शिव सृष्टि के निर्माता पुरुष हैं, और देवी पार्वती प्रकृति हैं, शक्ति का स्रोत जो पुरुष को अपना कार्य करने की शक्ति देती है। दोनों परस्पर एक दूसरे पर निर्भर हैं, सहजीवी तरीके से ब्रह्मांड में परस्पर भिन्न भिन्न विचारों की एकता का प्रतीक अर्धनारीश्वर स्वरूप है। भगवान गणेश अधिपति देवता हैं वे गणों का प्रतिनिधित्व करते हुए भक्त को बुध्दि देकर संकटों को दूर करते हैं। शिव देव दनुज दानव असुर सभी के पूज्य हैं लेकिन आसुरी शक्तियों को सीधे मोक्ष देते हैं जिससे प्रकृति में संतुलन बना रहे श्री शिव महापुराण के पंचम दिवस
उक्त उद्गार श्रावण मास महोत्सव की हरियाली तीज के पावन अवसर पर व्यासपीठ से नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह दास जी महाराज के मुखारविंद से शिव महापुराण में श्रीगणेश जन्म, तारकासुर मोक्ष, अर्धनारीश्वर चरित्र की कथा में
श्रीराम परिसर सरस्वती उ मा विद्यालय अधारताल में कहे।
शिव महापुराण व्यास पीठ पूजन आशा हीरालाल श्रीवास्तव, राममूर्ति मिश्रा, श्याम साहनी, रमेश शर्मा, प्रवेश खेड़ा, अंजना मनीष अग्रहरि, आकांक्षा अश्वनी, स्मृति अमित, प्रियंका, अलंकृत, अक्षत, डॉ अनुपम श्रीवास्तव , डा संदीप मिश्रा,राजेन्द्र यादव सतीश साहू, अज्जू ठाकुर सनातन धर्म महासभा, नरसिंह मंदिर गीता धाम शिष्य मंडल ने किया ।



