सतना के चित्रकूट में आज भी डोली ही सहारा बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं आदिवासी ग्रामीण

सतना जबलपुर दर्पण । जिले के चित्रकूट नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 15 स्थित थर पहाड़ के आदिवासी आज भी 21वीं सदी में बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर हैं। शनिवार को एक बार फिर विकास की विफलता की तस्वीर सामने आई, जब प्रसव पीड़ा से तड़प रही शोभा मवासी को ग्रामीणों ने डोली में बैठाकर पहाड़ से नीचे उतारा। यह कोई पहली घटना नहीं है। मानसून आते ही यह पहाड़ी इलाका हर साल लगभग चार महीने तक पूरी तरह से मुख्यधारा से कट जाता है। करीब 1500 की आबादी वाले इस क्षेत्र में न सड़क है, न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, न पीने के पानी की कोई पुख्ता व्यवस्था।डोली और चादर ही हैं जीवन रेखा स्थानीय निवासी सुरेंद्र ने बताया कि सड़क मार्ग नहीं होने के कारण एंबुलेंस, जननी एक्सप्रेस या कोई वाहन यहाँ पहुंच ही नहीं पाता। बीमारों और गर्भवती महिलाओं को चादर या डोली के सहारे दो-तीन किलोमीटर नीचे लाना पड़ता है। पिछले साल की बरसात में पाँच महिलाओं की डिलीवरी रास्ते में हुई और इलाज न मिलने से चार लोगों की मौत हो चुकी है। छोटी बावड़ी बना है एकमात्र जलस्रोत ग्रामीणों ने बताया कि पाँच पीढ़ियों से यहाँ की एकमात्र जल व्यवस्था एक छोटी सी बावड़ी है। क्षेत्र में न तो कोई सरकारी नल, न कुएं और न ही बोरवेल हैं। जीवन यापन के लिए लोग जंगल से लकड़ी और पत्ते इकट्ठा कर बेचने को मजबूर हैं। वोट मांगने आते हैं, हाल पूछने नहीं ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव के समय नेता और जनप्रतिनिधि वोट मांगने तो जरूर आते हैं, लेकिन उसके बाद कोई देखने तक नहीं आता। नगर पंचायत हर साल शुल्क वसूलती है।
लेकिन बदले में न कोई सुविधा दी जाती है, न ही जनसुनवाई होती है। थर पहाड़ की यह स्थिति शासन-प्रशासन की विकास योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आदिवासी समुदाय आज भी मूलभूत अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है, जो निश्चित ही शासन की प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार की माँग करता है।



