सीधी दर्पण

नपा उपाध्यक्ष कक्ष को लेकर फिर सुर्खियों में आया मामला

सीधी जबलपुर दर्पण । नगर पालिका परिषद सीधी के उपाध्यक्ष कक्ष को लेकर एक बार फिर जिले की सियासत में उबाल आ गया है, शुक्रवार को उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अध्यक्ष के कक्ष को भी लेकर संकट में डाल दिया है, अगर इस मामले में नगर पालिका के अधिवक्ता द्वारा नियत पेशी दिनांक 08 सितम्बर को समुचित आधार नहीं पेश किया तो अध्यक्ष को भी अपना कक्ष छोड़ना पड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि नगर पालिका परिषद सीधी में बीते माह अध्यक्ष द्वारा उपाध्यक्ष की गैर मौजूदगी में उनके कक्ष का ताला तोड़कर कक्ष के भीतर उनके द्वारा रखें गए आवश्यक दस्तावेज को हटाते हुए अपना कक्ष बना लिया था, जिसकी जानकारी मिलने पर उपाध्यक्ष दान बहादुर सिंह चौहान ने अपने कक्ष का ताला तोड़ने की सूचना सिटी कोतवाली सहित नगर पालिका परिषद की सीएमओ एवं नगरीय निकाय के वरिष्ठ अधिकारियों को देते हुए न्याय के न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिस मामले में उच्च न्यायालय जबलपुर के माननीय न्यायाधीश ने सुनवाई करते हुए अध्यक्ष कक्ष को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इस मामले की सुनवाई का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होते ही जिले की सियासत में खलबली मच गई है, अब देखना यह है कि 08 सितम्बर को माननीय न्यायाधीश द्वारा क्या फैसला सुनाया जाता है, हालांकि उनके द्वारा जो सवाल नगर पालिका परिषद सीधी की ओर अधिकृत अधिवक्ता से सवाल पूंछे गए हैं उससे आमजन में यह चर्चा शुरू हो गई है कि अध्यक्ष श्रीमती काजल वर्मा को उपाध्यक्ष दान बहादुर सिंह चौहान का कक्ष खाली कराना महंगा पड़ सकता हैं।
क्या हैं यह पूरा मामला
बता दें कि नगर पालिका परिषद सीधी के उपाध्यक्ष दान बहादुर सिंह के कक्ष क्रमांक 26 को 24 फरवरी 2025 को अध्यक्ष सहित पार्षद व अन्य लोगों की मौजूदगी में ताला तोडकर खाली करा दिया गया था। जिसके विरोध में श्री सिंह ने उच्च न्यायालय एवं थाना सिटी कोतवाली तथा मुख्य नगर पालिका अधिकारी सीधी को पत्र लिखकर उचित कार्यवाही की मांग की थी। इसी मामले में उच्च न्यायालय म.प्र. जबलपुर के डब्ल्यूपी नं. 13590/2025 में पारित निर्णय आदेश दिनांक 22 अप्रैल 2025 के अनुसार उच्च न्यायालय ने यह साफ कर दिया था कि प्रशासनिक आदेश में हस्तक्षेप यह न्यायालय नहीं कर सकता है लेकिन सीएमओ को याचिकाकर्ता के मांग अनुसार सुविधाजनक कार्यव्यवस्था करनी चाहिए। बावजूद इसके आज दिनांक तक उपाध्यक्ष को सुविधाजनक कार्यव्यवस्था नहीं बनाई गई।
क्या कहा न्यायाधीश ने
इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय जबलपुर की डबल बेंच ने नगर पालिका के अधिवक्ता को संकट में डाल दिया है, कारण कि माननीय न्यायाधीश ने यह साफ कहा है कि नियम में अगर उपाध्यक्ष को कक्ष देने का नहीं है तो अध्यक्ष को भी कक्ष देने का प्रावधान नहीं है, अध्यक्ष भी खड़े होकर कार्य करें। या फिर यह बताएं कि उपाध्यक्ष का कक्ष क्यों खाली कराया गया। माननीय न्यायाधीश ने यह भी कहा कि अगर अध्यक्ष के साथ मिलकर नहीं चलेंगे तो उपाध्यक्ष का कक्ष ही खाली करवा दिया जाएगा, ऐसा नहीं चलेगा, अध्यक्ष भी खड़े होकर कार्य करें। कुल मिलाकर शुक्रवार को उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश द्वारा प्रकरण की सुनवाई के दौरान यह साफ कर दिया है कि अध्यक्ष को भी अपना कक्ष खाली करना पड़ेगा। हालांकि इसका निराकरण 08 सितम्बर की सुनवाई में होगा की किसके पास कक्ष रहेगा, किसके पास नहीं।

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