सुगंध दशमी पर सुगंध से महक उठे जैन मंदिर

गोटेगांव जबलपुर दर्पण । गोटेगांव नगर के सभी आठ जैन मंदिरों में धूप दशमी अवसर पर नगर जैन समाज के श्रावक श्राविकाएं अपराह्न 3 बजे से चंदन की लकड़ी या लौंग आदि लेकर मंदिर पहुंचे और जिनेंद्र भगवान के दर्शन कर पंच परमेष्ठी भगवान की वंदना कर यह धूप खेवन क्रिया की। श्रावकों ने धूप खेवन की यह क्रिया अपनी आत्मा के अष्ट कर्मों के नाश के लिए बहुत ही उत्साह पूर्वक की। इस अवसर पर नगर में विराजमान परम पूज्य मुनि 108 प्रबुद्ध सागर महाराज के सानिध्य में चल रहे संस्कार शिविर में शामिल शिविरार्थियों ने 1008 पंचायती दिगंबर जैन बड़ा मंदिर से जुलूस निकालकर नगर के सभी जैन मंदिरों में पहुंच कर जिनेंद्र भगवान के दर्शन किए।यह पर्व राग, द्वेष,मोह माया से रहित होने के लिए, स्वयं अपने अंदर की भक्ति एवं धर्म रूपी ज्वाला से राग, द्वेष,मोह, माया को मिटाना होता है।धूप दशमी अर्थात सुगंध दशमी का अर्थ है अपने कर्मों की कालिमा को हटाना है। प्रतिवर्ष पर्युषण पर्व के दौरान भाद्र पक्ष शुक्ल दसवीं के दिन यह सुगंध दशमी व्रत मनाया जाता है। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से जहां सभी अशुभ कर्मों का क्षय होकर पुण्य बंध होता है। वही इस व्रत को करने से मनुष्य को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है।सुगंध दशमी के इस आत्मकल्याणक अवसर पर सभी जैन भक्त, बंधुओ ने जिनेंद्र भगवान के मंदिर जाकर जिनेंद्र भगवान के दर्शन कर अग्नि कुंड में धूप समर्पित की।यह पवित्र पर्व हमें यह सिखाता है कि जैसे धूप की सुगंध चारों ओर फैली रहती है। वैसे ही हमारी आत्मा भी पवित्रता शांति और धर्म फैलाएं। जिनेंद्र भगवान के समक्ष धूप समर्पित करने का अर्थ है, कि हमारे कर्मों को जलाकर आत्मा को निर्मल बनाना है। कर्मों का नाश यानि निज में लीन होकर राग द्वेष को मिटाना होता है कर्मों की निर्जरा मतलब मन, वचन काय की एकता होनी चाहिए आपके ये कर्म अग्नि में धूप डालने से खत्म नहीं होते,बल्कि मन वचन काय की शुद्धता के साथ तप, उपवास, आगम में बताए गए अनुसार धार्मिक क्रियाओं से इन कर्मों को हटाना होता है। अशुभ कर्मों का आपको क्षय करना है तो आत्मतत्व का चिंतन करना चाहिए। जिनेंद्र भगवान की भक्ति करना चाहिए। धूप दसवीं के अवसर पर यह धूप खेवन उन अष्ट कर्मों के नाश के लिए किया जाता है जो अपनी कालिमा से अपनी आत्मा को ढके हुए हैं। यह आत्म कल्याण का मार्ग महान पर्व है। यहां सुगंध का मतलब आत्मा की शुद्धता से है। यह बुरे कर्म काटने एवं मोक्ष प्राप्ति का मार्ग चुनने का पर्व है।
धूप खेना यानि अपने कर्म सिद्धांतों का क्षय कर निर्जरा करना होता है।



