कछपुरा में महाकाली प्रतिमा के खंडित होने पर विवाद, आयोजन समिति पर उठे सवाल

जबलपुर दर्पण। महाकाली प्रतिमा स्थापना के बाद उत्पन्न विवाद ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं। आयोजन समिति द्वारा खंडित प्रतिमा को पुनः पूजा और दर्शन के लिए प्रस्तुत किए जाने को लेकर स्थानीय लोग नाखुश हैं। कई लोगों ने इस कार्य को धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।
प्रतिमा के खंडित होने की घटना उस समय हुई जब अत्यधिक मालाओं के वजन के कारण महाकाली की प्रतिमा गिर गई। घटना के वक्त प्रतिमा के समक्ष तीन महिलाएं मौजूद थीं, जिन्होंने तुरंत अपनी जान बचाने के लिए वहां से भागने की कोशिश की। प्रतिमा के इस प्रकार गिरने और खंडित होने के बावजूद आयोजन समिति ने इसे जल्दबाज़ी में सुधार करवाकर फिर से पूजा और दर्शन के लिए चालू कर दिया, जो धार्मिक दृष्टिकोण से बेहद आपत्तिजनक माना जा रहा है।
स्थानीय धर्मगुरुओं और शास्त्रों के जानकारों के अनुसार, खंडित प्रतिमा का तुरंत विसर्जन किया जाना चाहिए। धार्मिक परंपराओं के अनुसार खंडित मूर्तियों की पूजा निषिद्ध मानी जाती है, लेकिन आयोजन समिति ने इन नियमों की अनदेखी करते हुए आर्थिक लाभ और व्यक्तिगत प्रचार के लिए प्रतिमा को पुनः सार्वजनिक किया।
आयोजन समिति द्वारा इस खंडित प्रतिमा का विसर्जन जुलूस 15 अक्टूबर को निकाले जाने की योजना बनाई गई है, जिसके लिए बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। लोगों से इस जुलूस में भारी संख्या में उपस्थित होने की अपील की जा रही है, ताकि चढ़ावा और दान दक्षिणा एकत्रित किया जा सके। स्थानीय लोग इस घटना को शास्त्र सम्मत मान्यताओं के खिलाफ बताते हुए इसे महज चंदा बटोरने का माध्यम बता रहे हैं।
इस घटना ने धार्मिक और सामाजिक नियमों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या धार्मिक आस्थाओं का व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग करना उचित है? स्थानीय समुदाय में इस विषय पर गहरी असंतुष्टि है और कई लोग इसे धार्मिक परंपराओं का उल्लंघन मान रहे हैं।



