आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के आरक्षण की वैधानिकता पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय ऐतिहासिक

अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा (स) मप्र इकाई ने निर्णय का किया स्वागत
जबलपुर दर्पण। वर्ष 2019 में भारत सरकार द्वारा 103 वें संविधान संशोधन के द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10% आरक्षण देना का ऐतिहासिक कदम उठाया था जिसकी वैधानिकता पर प्रश्नचिन्ह लगाने वाली समस्त याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आज देश की सर्वोच्च अदालत ने भारत सरकार द्वारा गरीब सवर्णों को दिए गए 10% आरक्षण के इस संविधान संशोधन को संविधान के मूल ढाँचे तथा समानता के अधिकार का उल्लंघन नही माना। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा (सनातन) मध्यप्रदेश इकाई जबलपुर के जिला अध्यक्ष पंडित गौरव शर्मा ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया और कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय ऐतिहासिक है, इस निर्णय से लाखों गरीब सवर्णों को शिक्षा एवं नौकरियों में अन्य आरक्षित वर्गों के समान समस्त लाभ प्राप्त हो सकेंगे जिससे वे वर्षों से वंचित थे। श्री शर्मा ने कहा कि अब यही मौका है कि जिस प्रकार भाजपा की मोदी सरकार ने राजनीति से उपर उठकर 2019 में गरीब सवर्णों के हित मे कार्य किया था उसी कार्य को आगे बढ़ाकर भाजपा की शिवराज सरकार को भी समानता के मूल अधिकार और माननीय प्रधानमंत्री जी की मंशा के अनुरूप EWS वर्ग के उत्थान की दिशा में कार्य करते हुए ई डब्ल्यू एस आयोग का गठन करना चाहिए साथ ही आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को उन समस्त लाभ को पहुँचाने का कार्य करना चाहिए जिसका लाभ वर्षो से अन्य आरक्षित वर्गों को मिलता आ रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त उप पुलिस अधीक्षक केडी सोनकिया और प्रदेश महासचिव दिलीप मिश्रा ने शिवराज सरकार से माँग की है कि भारतीय संविधान में वर्णित अनुच्छेद 309 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जल्द ईडब्ल्यूएस वर्ग को शासकीय सेवाओ की भर्ती में आयुसीमा में छूट, शैक्षणिक संस्थाओं में शुल्क में छूट, स्कॉलरशिप आदि का प्रावधान किया जाए साथ ही ईडब्ल्यूएस वर्ग को उन समस्त योजनाओं में शामिल किया जाए जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान हेतु बनाई गई है। इस हेतु जल्द महासभा के राष्ट्रीय महासचिव द्वारा एक पत्र मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा।



