महाकोशल महाविद्यालय में 14–15 मार्च को अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी, भारतीय दर्शन और योग पर होगा मंथन

जबलपुर दर्पण । लखनादौन नगर परिषद में दुकानों के आवंटन से जुड़े लगभग 83 लाख रुपये के मामले में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की छापेमारी के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। नगर परिषद अध्यक्ष मीना बलराम गोल्हानी ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि जांच से सच्चाई सामने आएगी और गलत आरोप लगाने वालों का पर्दाफाश होगा। ईओडब्ल्यू जबलपुर ने वर्ष 2020 की निविदा प्रक्रिया में लगभग 82.70 लाख रुपये की कथित राजस्व क्षति का आकलन करते हुए प्रकरण क्रमांक 43/2026 दर्ज किया है। मामले में गजेंद्र पांडे, गीता वाल्मीकि तथा अध्यक्ष मीना गोल्हानी सहित कुल 23 लोगों को नामित बनाया गया है। जांच में आरोप लगाया गया है कि 13 दुकानों का बिना पूरा भुगतान कब्जा पाया गया और आरक्षित एसटी श्रेणी की एक दुकान के आवंटन में भी अनियमितता हुई। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (लोक सेवक द्वारा अमानत में ख्यानत), 120बी (अपराधिक षड्यंत्र) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(सी) और 13 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। अध्यक्ष मीना गोल्हानी ने अपने पक्ष में कहा कि वर्ष 2020 की निविदा प्रक्रिया उनके कार्यकाल की नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निविदा शर्तों की विधिक और तकनीकी जांच का दायित्व प्रशासनिक अधिकारियों का होता है, जबकि अध्यक्ष की भूमिका नीतिगत विभागीय तक सीमित रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि एसटी वर्ग के आरक्षण में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, बल्कि दुकानों के स्थल परिवर्तन की प्रक्रिया शासन के नियमों के तहत और प्रीमियम राशि राजकोष में जमा कराने के बाद की गई है। वहीं पूर्व सीएमओ गीता वाल्मीकि ने भी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि श्रेणी परिवर्तन और अन्य निर्णय निकाय की वित्तीय स्थिति और शासन के नियमों के अनुसार लिए गए थे, जिनके सभी दस्तावेज उपलब्ध हैं। अध्यक्ष मीना गोल्हानी ने आरोप लगाए कि शिकायतकर्ता पदनाम द्वारा निर्माण कार्य निम्न गुणवत्ता का किया जा रहा था। भ्रष्टाचार और गुणवत्ता से समझौता न करने के कारण प्रतिशोध की भावना से यह शिकायत की गई है। उन्होंने कहा कि नगर परिषद ने किसी को भी बिना भुगतान के दुकान का कब्जा नहीं दिया है और ईओडब्ल्यू की जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी।



