बाल साहित्य द्वारा कर सकते हैं प्राकृतिक चेतना की रक्षा आयोजन में हुआ अनेक पुस्तकों का विमोचन

भोपाल जबलपुर दर्पण । यह बाल साहित्य को संवर्द्धित करने का अवसर है।
बालकों को हम जैसा वातावरण देंगे, सांस्कृतिक, पारिवारिक, सामाजिक, जो हमारा है, वो उनको श्रेष्ठ बनाता है। प्राकृतिक चेतना की रक्षा बाल साहित्य द्वारा कर सकते हैं। उपदेश से परहेज क्यों ? बच्चे को दिशा-निर्देश दें। रोकना-टोकना करें, पर प्रकारेंतर से।
यह बात वरिष्ठ साहित्यकार एवं बाल पत्रिका ‘बालवाटिका’ के संपादक भेरूँलाल गर्ग ने बतौर अतिथि कही। अवसर रहा साहित्य अकादमी म.प्र. द्वारा स्व. कृष्ण कुमार अष्ठाना स्मृति बाल साहित्य राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन का, जो भोपाल स्थित एनआईटीटीटीआर (श्यामला हिल्स) में शुक्रवार को हुआ। इसका समग्र संयोजन बाल पत्रिका ‘देवपुत्र’ के सम्पादक गोपाल माहेश्वरी ने किया। प्रातः 11 बजे सैकड़ों बाल साहित्यकारों की उपस्थिति में इस संगोष्ठी का उद्घाटन मंच पर उपस्थित अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे, डॉ. भेरूलाल गर्ग, दिनेश पाठक और राजा चौरसिया ने दीप प्रज्ज्वलन से किया।
इसका संचालन गोपाल माहेश्वरी ने किया।
इस 2 दिनी संगोष्ठी में पहले दिन 12 से 1.30 बजे तक प्रथम सत्र में ‘बाल मनोविज्ञान और बाल साहित्य सृजन’ विषय पर समीक्षा तैलंग, डॉ. रश्मि अग्रवाल, डॉ. वर्षा महेश, शीला पाण्डेय, डॉ. सुनीता श्रीवास्तव, शशि पुरवार, राजकुमारी चौकसे, देवी प्रसाद गौड़, और देवेन्द्रसिंह सिसौदिया ने वक्ता के नाते अपनी अभिव्यक्ति दी।
ऐसे ही द्वितीय सत्र में ‘बाल-साहित्य में बदलती परिवार व्यवस्था, शिक्षक एवं समाज की भूमिका’ विषय पर
डॉ. रेखा लोढा, नीलम राकेश, उमेशचंद्र सिरसवारी, मीरा जैन और निरुपमा त्रिवेदी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।
तीसरे सत्र में ‘बाल-साहित्य में देशप्रेम, राष्ट्रीयता, पर्यावरण तथा भारतीय संस्कृति का भाव विषय पर सपना साहू ‘स्वप्निल’, आशा पांडेय,
सत्यनारायण सत्य, विष्णु शर्मा ‘हरिहर’ और हरीराम पथिक आदि ने बाल साहित्य के बिंदु प्रस्तुत किए।
देर शाम चौथे सत्र में ‘बाल-साहित्य में कल्पना एवं यथार्थ’ विषय पर
डॉ. आर.पी. सारस्वत, डॉ. वर्षा ढोबले सहित मीरा तिवारी आदि ने अपने भाव व्यक्त किए।
इस महती आयोजन में अकादमी से सम्बद्ध बाल साहित्य शोध सृजन पीठ की निदेशक और प्रसिद्ध बाल साहित्य लेखिका डॉ. मीनू पाण्डेय ‘नयन’, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रमेश यादव, डॉ. विमला भंडारी एवं डॉ. नागेश पांडेय ‘संजय’ आदि की उपस्थिति रही।
‘गली बचपन की’ शीर्षक से आयोजित उक्त संगोष्ठी में देशभर के बाल रचनाकार जुटे हैं, जो बदलते परिवेश में बाल साहित्य की भूमिका पर 14 मार्च को दूसरे दिन भी गंभीर चिंतन करेंगे।
◾देर शाम हुआ कवि सम्मेलन
अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे और सैकड़ों बाल साहित्यकार की मौजूदगी में अनुरंजन कार्यक्रम 8.30 बजे से कवि सम्मेलन के रूप में हुआ। विभिन्न बाल रचनाकारों ने इस में अपनी रचनाओं से सबको प्रभावित किया।



