मझौली में अन्नदाता की लड़ाई: 37 दिन से भुगतान को तरस रहे किसान, पुतला दहन कर जताया आक्रोश

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण । पाटन विधानसभा क्षेत्र के मझौली तहसील में धान भुक्तान को लेकर किसान अनिश्चित कालीन धरना स्थल में बैठ कर भुक्तान की मांग नियंत्रर करते चले आ रहे हैं। नाराज एवं आक्रोश हो कर 12 मार्च को मुख्यमंत्री एवं विधायक सहित प्रशासन का किया पुतला दहन ।
मझौली में विगत 37 दिनो से अधिक समय से किसान संघ किसानो के लिए आंदोलन करता आ रहा । लेकिन इन किसानो का भुगतान अभी तक नहीं किया गया। वहीं हम सभी किसान संघ के द्वारा लगातार क्षेत्रीय विधायक, जिला प्रशासन के साथ साथ मुख्यमंत्री को पत्राचार के माध्यम से लगातार आवेदन, निवेदन करते चले आ रहे हैं। साथ ही मिलकर संघर्ष से लड़ाई लड़ रहे हैं। पर शासन प्रशासन ने इस ओर कोई भी रूचि नहीं दिखाई हैं। और न ही कोई लिखित रूप से आदेश जारी किया गया। जब भी आवेदन पत्र देते। आश्वासन दे कर अपना पल्ला झाड़ लेते। इन सभी बातों और लम्बे इंतजार के बाद गुरुवार 12 मार्च 2026 को किसानों का धैर्य टूट गया। और इनके सहयोग में कांग्रेस पार्टी के द्वारा किसानो का भुगतान दिलाने के लिए आगे आईं खड़ी हुई । जिन्होंने मुख्यमंत्री, शासन प्रशासन सहित नारे बाजी करते हुए। तीनों का पुतला दहन किया। इस आंदोलन को बड़ा रूप दिखाते हुए आग के रूप में नज़र आया। हम उसका भी समर्थन करते हैं और हम सभी किसान मिलकर लड़ाई लड़ेंगे ताकि किसानों। का रुका हुआ भुक्तान जल्द भुगतान हो सके ।
किसान हित के लिए जो पार्टियां संघटन आगे आएंगे हम सभी मिलकर उनका पूर्ण समर्थन करते हैं।
साथ ही 12 मार्च को किसान संघ एवं काग्रेस कार्यकर्ताओं के द्वारा मुख्यमंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक , सहित प्रशासन का पुतला दहन कार्यक्रम पोला तिराहा में शाम को अधिक मात्रा में किसान साथियों की मौजूदगी में किया गया।
मीडिया को जानकारी देते हुए
किसान संघ के तहसील अध्यक्ष वीरेंद्र पटेल एवं महामंत्री रंजीत पटेल ने किसानों के हित में जितना सहयोग बना उन किसानो के लिए अथक प्रयास किया । और संघर्ष के साथ लड़ाई लड़ी पर आज बहुत दुख हुआ जब एक किसान की आंखों से आंसू आ गए । और 37 दिनों में क्या हासिल हुआ । और इन किसानों को उसका हक उसे नहीं मिला पाया। अपने आप को पदाधिकारी कहने वाले ऊपर के संघ के पदाधिकारी सिर्फ कलेक्टर और सीएम हाउस में जाकर बिसलेरी का पानी पीकर और मिठाई खाकर खुश रहते हैं । पर इन किसानो को उनका हक दिलाने में ये असक्षम है इनको पद में रहना ही नहीं चाहिए।
क्यों किसानों तक जा पहुंचीं गेहूं पंजीयन के बाद पैसों की मांग – किसानों की लगीं गेहूं की फसलें खेतों में लहरा रहीं हैं। और किसानों ने ई पोर्टल पंजीयन भी करा लिए हैं। अब भीड़ में वहां से आवाज आई कि समिति और वेयर हाउस में गेहूं खरीद केंद्रों के चालू होने के पहले ही साहब ने पैसों की मांग शुरू कर दी हैं। जिसकी राशि लगभग 50 हजार राशि से शुरुआत होगी। क्या ये बड़ा ही गम्भीर और प्रश्नों भरा वातावरण सामने दिखाई और सुनाई दे रहा। जिन साहब को जिम्मेदारी दी गई वे साहब ही किसानों के लिए दर्द बन रहे हैं। अब सवाल उठता हैं कि क्या जिला प्रशासन इस ओर कोई आदेश या फिर जांच पड़ताल कराएगी या इसे भी ठन्डे बस्ते में डाल कर मुस्कुराते नजर आयेगी।?



