पंजीयन में देरी होने से बनने के बाद भी शुरू नहीं हो रहीं क्षेत्र में पांच गोशालाएं

गोटेगांव जबलपुर दर्पण । तहसील क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर लाखों रुपए खर्च करने के बाद बेसहारा विचरण करने वाले गोवंशों को शरण देने के लिए गोशालाओं का निर्माण कार्य किया गया है। मगर पशु चिकित्सालय विभाग के माध्यम से भोपाल पहुंचाई गई फाइलों का पंजीयन नहीं होने के कारण अधिकांश निर्मित गोशालाएं खाली पड़ी हुई है। जिसके कारण गोटेगांव की सड़क से लेकर ग्रामीण अंचल की सड़कों पर बेसहारा गोवंश अपना डेरा जमाए हुए रहता है। वहीं बारिश होने पर ऐसे गोवंश इधर उधर जाकर बचने का प्रयास करता है और जैसे ही बारिश का पानी थम जाता है यह वह फिर से सड़क पर आकर अपनी शरण स्थली बना लेते हैं। जिसके कारण बहुत से गोवंश सड़क से निकलने वाले वाहनों के शिकार हो जाने से जख्मी हो जाते है। ग्राम सालीबाड़ा समेत ग्राम पंचायत नेगुंवा, ग्राम पंचायत बुढै़ना, राजाकछार, ग्राम पंचायत बाबली में गोशालाओं का निर्माण शासन की योजनाओं के अनुसार करवाया गया है। मगर गोवंशों को कोई भी शरण नहीं मिल रही है। कहा जा रहा है कि इन गोशालाओं का पंजीयन का कार्य पूरा नहीं हुआ है।ग्राम पंचायत सालीबाड़ा में निर्मित गोशाला में गायों को शरण नहीं मिल रही है। सिर्फ दिखाने के लिए चौकीदार के ही मवेशी गोशाला के अंदर रहते है। इसका मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि यहां पर जो मवेशियों को पानी पिलाने के लिए टयूब बैल खोदा गया है उसका विद्युत कनेक्शन नहीं हो पा रहा है। पिछले एक माह पहले सीईओं वर्षा झारिया के द्वारा बताया गया था कि गोशाला सालीवाड़ा के टयूब बैल को संचालित करने के लिए ट्रांसफार्मर की मंजूरी मिल चुकी है। जो एक सप्ताह में लग जाने पर टयूब बैल चालू हो जाएगा। मगर एक माह से अधिक समय व्यतीत हो गया, यहां पर विद्युत मंडल ने स्वीकृति के बाद भी गोशाला स्थल पर ट्रांसफार्मर नहीं रखा है। जिसके कारण टयूब बैल चालू नहीं हो पा रहा है। यही बहाना बना कर ग्राम पंचायत गोशाला के अंदर निर्धारित संख्या के आधार पर गोवंशों को शरण नहीं दे रही है गोशाला सालीवाड़ा में दिखाने के लिए मौजूद चौकीदार के ही कुछ मवेशी यहां पर मौजूद रहते है और जहां पर गोवंश बांधने की व्यवस्था है वहां पर मवेशी नहीं होने पर चौकीदार के सदस्य खाना बनाने का कार्य करते रहते है। इसके कारण दो साल से अधिक समय व्यतीत हो जाने के बाद भी गोशाला विधिवत संचालित नहीं हो पा रहा है। इसी प्रकार ग्राम पंचायत नेगुंवा, ग्राम पंचायत बुढै़ना, ग्राम पंचायत राजाकछार, ग्राम पंचायत बाबली में गोशालाओं का निर्माण शासन की योजनाओं के अनुसार करवाया गया है। मगर यहां पर भी बेसहारा विचरण करने वाले गोवंशों को कोई भी शरण नहीं मिल रही है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि इन गोशालाओं का पंजीयन नहीं हुआ है।
फसलों को हो रहा नुकसान-वर्तमान समय में बेसहारा मवेशियों की संख्या इतनी अधिक बढ़ गई है कि बायपास सड़क से लेकर गोटेगांव की प्रमुख सड़कों पर ऐसे मवेशी अपना डेरा जमाए रहते है और वह कहीं आस पास के खेत में पहुंचते है एवं सुबह के समय जो कचरा रहवासी डालते है उस स्थल पर पहुंच कर अपना पेट भरने का प्रयास करते है। प्रशासन जिन पंचायतों में गोशालाओं का निर्माण हो चुका है उनको जल्द ही पंजीयन कराने की दिशा में कदम उठाए ताकि इन निर्मित गोशालाओं के जरिए इधर उधर डेरा जमाने वाले गोवंशों को सुरक्षित आश्ररा मिल सके



