छिंदवाड़ा दर्पण

वंदनीय राष्ट्रसंत तूकड़ोंजी महाराज का 57 वा पुण्य स्मरण महोत्सव में मौन श्रद्धांजलि का आयोजन

पांढुरना जबलपुर दर्पण । श्री गुरुदेव सेवा मंडल शुक्रवार बाजार जिला पांढुरना के तत्वाधान में 57 वा पुण्य स्मरण महोत्सव मनाया जा रहा है, वंदनीय राष्ट्रसंत जी का जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित रहा है उन्होंने अपने खंजरी भजनों के माध्यम से देहाती गांव में जाकर अलख जगाई है महाराज जी ने भारत स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी जी के साथ जन जागृति अंग्रेज भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी महाराज जी ने हिंदी तथा मराठी भजन साहित्य की अनेक रचनाएं की गई तथा ग्रामगीता ग्रंथ की रचना करके गांव के लोगों को समर्पित किया गया। तुकडोजी महाराज का जन्म महाराष्ट्र के यावली ग्राम में 30 अप्रैल 1909 में हुआ था। उन्होंने समर्थ आडकोजी महाराज से गुरु दीक्षा प्राप्त की वह एक महान स्वयंसिद्ध संत संगीतकार एवं प्रखर वक्ता थे उन्होंने हिंदी ओर मराठी में 3000 से अधिक भजनों एवं अभंग की रचना की उन्होंने धर्म, समाज, राष्ट्र, शिक्षा पर कहीं लेख लिखें वे सामाजिक आध्यात्मिक को फिर से परिभाषित करने और राष्ट्र को पुनर्जीवित और जागृत करने के लिए दृढ़ संकल्पीत थे। उन्होंने व्यक्तिगत सत्याग्रह किया तथा 1941 में भारत छोड़ो आंदोलन के जन आंदोलन में भाग लिया। उन्होंन अखिल भारतीय गुरुदेव सेवा मंडल की स्थापना की तथा समन्वित ग्रामीण विकास के लिए अनेक कार्यक्रम विकसित किये उनकी गतिविधिया इतनी प्रभावशाली थी कि तत्कालीन भारत के राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें “राष्ट्र संत” की उपाधि प्रदान की वह विश्व हिंदू परिषद के संस्थापक में से एक थे। उन्होंने आचार्य विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में भाग लिया तथा 1955 में जापान में विश्व धर्म और विश्व शांति सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने राष्ट्रीय हित के लिए अनेक मोर्चो पर कार्य किया, बंगाल अकाल 1945, चीन युद्ध 1962 तथा पाकिस्तान आक्रमण 1965 तथा कोयना भूकंप विनाश 1962 के समय राष्ट्र संत तुकडोजी महाराज अपने मिशन के साथ प्रभावित लोगों की मदद करने गए और रचनात्मक राहत कार्यो का आयोजन किया।
राष्ट्र संत तुकडोजी महाराज अंतिम क्षण गुरुकुंज आश्रम में 11 अक्टूबर 1968 आश्विन कृष्ण पक्ष पंचमी को 4 बजकर 58 मि, को अपना नश्वर शरीर त्याग कर ब्रह्मलीन हो गए। ऐसे महान व्यक्तित्व मानवता के पुजारी वंदनीय राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज जी का मौन श्रद्धांजलि आश्विन कृष्ण पक्ष पंचमी शनिवार दिनांक11 अक्टूबर को खंजरी भजन दोपहर 11:00 बजे से 01:30 बजे तक श्री गुरुदेव सेवा मंडल हिवरा सेनाडवार द्वारा प्रस्तुत उसके बाद राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज जीवन चरित्र पर कीर्तन 02:00 बजे से 4:00 बजे तक श्री ह.भ.प. मनोज महाराज बैस इनका होगा। विशेष उपस्थिति मे श्री वीररूद्रमुनि शिवाचार्य महाराज, ब्रह्म चैतन्य संत श्री विभुदत्त जी महाराज, रामाश्रयी प्रवीण पालीवाल की उपस्थिति में मौन श्रद्धांजलि अर्थात सर्व संत स्मृति दिन मानवता के महान पुजारी वंदनीय राष्ट्रीय संत श्री तुकडोजी महाराज तथा सभी धर्म के संतों की स्मृति में और राष्ट्र सुरक्षा के शहीद वीर भारतीय जवानों के लिए श्रद्धांजलि ठीक शाम 4:58 को अर्पित की जाएंगे। तत्पश्चात सामुदायिक प्रार्थना एवं राष्ट्र वंदना होगी।गोपाल काला कीर्तन रविवार दिनांक 12 अक्टूबर 2025 को सुबह 10:30 बजे से ह भ प श्री ज्ञानेश्वर महाराज पालधिकर, जलगांव इनके मधुर वाणी से गोपाल काला कीर्तन होगा तुरंत बाद महाप्रसाद का वितरण प्रारभ होगा।

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