बालाघाट दर्पण

बघोली में ‘परमात्मा एक’ सेवकों ने हर्षोल्लास से मनाई कोजागिरी; सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां

लालबर्रा जबलपुर दर्पण । नगर मुख्यालय से 05 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम बघोली में बीते 08 अक्टूबर, बुधवार की शाम ‘परमात्मा एक’ सेवक परिवार द्वारा भगवान बाबा हनुमान जी के स्थान पर कोजागिरी (शरद पूर्णिमा) पर्व का भव्य आयोजन किया गया। इस उत्साहपूर्ण कार्यक्रम में हजारों की संख्या में सेवकगण शामिल हुए। शाम 6 बजे से शुरू हुए इस आयोजन में सर्वप्रथम रंगोली प्रतियोगिता, कुर्सी दौड़ और एक विशेष चर्चा बैठक का आयोजन हुआ। इसके उपरांत, नन्हें-मुन्ने बच्चों ने डांस प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और उपस्थित लोगों का भरपूर मनोरंजन करते हुए समां बांधा।

अमृत रूपी खीर का वितरण

   पर्व के मुख्य आकर्षण के रूप में, रात्रि 12 बजे शरद पूर्णिमा की चंद्रकिरणों से प्रकाशित हुई अमृत रूपी खीर को तैयार किया गया। यह विशेष खीर प्रसादी के रूप में सभी सेवक-सेविकाओं ने श्रद्धा भाव से ग्रहण की। प्रसाद वितरण के बाद, बहेगांव भजन मंडल के कलाकारों द्वारा एक से बढ़कर एक भक्तिगीतों की प्रस्तुतियां दी गईं, जिसका उपस्थितजनों ने खूब लुत्फ उठाया।

मार्गदर्शकों ने दिया ‘सत्य, मर्यादा और प्रेम’ का संदेश

   आयोजित विशेष चर्चा बैठक में मार्गदर्शकों ने कोजागिरी पर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने महान त्यागी बाबा जुमदेव जी के उपदेशों पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि बाबा ने समाज को अंधविश्वास, अंधश्रद्धा एवं बुरे व्यसनों से दूर रहने की शिक्षा दी है। मार्गदर्शकों ने जोर दिया कि मानव को सदैव सत्य, मर्यादा और प्रेम का जीवन भर आचरण करना चाहिए और अपने परिवार को सुखमय जीवन जीने की प्रेरणा देनी चाहिए। उन्होंने सेवकों को बाबा जुमदेव जी के मार्ग पर चलने, जीवन को सच्चाई और सेवा के पथ पर अग्रसर करने का संदेश दिया।

चर्चा में यह भी कहा गया कि बाबा जुमदेव जी की शिक्षाएँ (शिकवण) आज भी समाज को नैतिकता और एकता के सूत्र में बांधने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। बघोली में कोजागिरी पर्व का यह आयोजन आध्यात्मिकता, सेवा और समरसता का अनोखा संगम बनकर सभी उपस्थितजनों के मन में सद्भावना और आनंद का भाव जगाने वाला सिद्ध हुआ।
आयोजित इस कार्यक्रम मे वरिष्ठ मार्गदर्शक धनीराम भोयर, मार्गदर्शक दिलीप बारेकर, सोमेश्वर उके, लाकेश सार्वे, एजेश बोरकर, फूलचंद बरैया, सहित हजारों की संख्या मे सेवक, सेविकाएं सम्मिलित हुए।

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