जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

जोहिला नदी में ओडोनेटा की पहली इंटरनेशनल शोध रिपोर्ट, 07 माह में खोजी 35 प्रजातियां

डॉ. अर्जुन व शिवांजली ने उमरिया जिले में किया शोध, बहुतायत में मिली दुर्लभ प्रजातियां, अंतरराष्ट्रीय स्तर के वेब ऑफ़ साइंस जर्नल में हुआ शोध का प्रकाशन, उज्जैन में होंगे सम्मानित

जबलपुर दर्पण। अमरकंटक से निकलने वाली नर्मदा, सोन व जोहिला नदी का पौराणिक महत्व सभी ने सुना है पर उससे कहीं ज्यादा इन नदियों के जल से पर्यावरण को संरक्षित एवं संकेत देने वाले कई जीवो ने जन्म लिया है l बचपन से हेलीकॉप्टर जैसे इन ओडोनेटा को चुपचाप मोह से देखने के सिवाय शायद ही किसी को पता रहा हो कि ये मच्छरों और कृषि कीटों को नियंत्रित करते है एवं प्रदूषण, निवास स्थान की गुणवत्ता और लैंडस्केप में गड़बड़ी के संकेतक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं l डॉ. अर्जुन और शिवांजली की शोध : विगत 07 माह में उमरिया जिले से इन ओडोनेटा की 06 फैमिली के 35 प्रजातियों को पहली बार रिकॉर्ड कर शासकीय होम साइंस कॉलेज जबलपुर के प्राणीशास्त्र विभाग में शिक्षण सेवा दे रहे सर्वाधिक विश्व रिकॉर्ड का ख़िताब प्राप्त डॉ. अर्जुन शुक्ला व उनके निर्देशन पर शोध कर रही शिवांजली तिवारी ने इतिहास रच दिया है l 170 किलोमीटर की कुल लम्बाई वाली जोहिला पर उमरिया जिले में क्लास इन्सेक्टा के आर्डर ओडोनेटा पर यह पहली शोध रिपोर्ट थी जिसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेब ऑफ़ साइंस जर्नल में प्रकाशन हुआ l डॉ. अर्जुन ने बताया कि शोध के दौरान 22 ऐसी प्रजातियां ऐसी मिली जो अत्यंत दुर्लभ थी l कोपेरा मार्जिनिप्स, लेस्टेस एलाटस, ऑर्थेट्रम प्रुइनोसम, पेंटाला फ्लेवसेन्स जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ भी दर्ज की गई l इससे पूर्व जब डॉ. अर्जुन ने बाणसागर में सोन नदी पर कार्य किया तो उन्हें विगत एक वर्ष में 22 एवं जबलपुर नर्मदा नदी से 07 माह में 25 प्रजातियाँ ही ओडोनेटा की मिली l जो यह संकेत करती है कि जोहिला के जल में जीवों की विविधता सर्वाधिक है l शिवांजली ने शोध रिपोर्ट के आधार पर बताया कि 1793 मे फैब्रिअस द्वारा ड्रैगनफलीज़ के लिए लागू किया गया शब्द ओडोनेटा जिसकी आज दुनिया भर में 6,371 व भारत में 498 एवं मध्य प्रदेश में लगभग 75 के करीब प्रजातियां पाई जाती हैं l इनमें कई प्रजातियाँ कम दूरी पर एक निश्चित आवास में रहते हैं, इसलिए उन्हें अक्सर पर्यावरणीय स्वास्थ्य और संरक्षण प्रबंधन के संकेतक के रूप में सफलतापूर्वक उपयोग किया जाता है।

जोहिला के जल की ताकत है कि इसमें पाए जाने वाले घास से सूमा बनते है, रोजगार के अवसर देती नदी

डॉ. अर्जुन ने बताया कि जोहिला सबसे अधिक रोमांचकारी नदी है। इसकी मोवा इतनी ताकतवर होती है कि इसे घास कहना गलत होगा । यहां होने वाली घास को मोवा कहते है और इसी मोवे के ऊपरी हिस्से से रस्सी बनाई जाती है जिसे सूमा कहते है। यह सूमा विशेष रूप से चारपाई गूथने व पशुओं को बांधने के काम में आता है । जहां से जोहिला बहती हुई निकलती है वहां के लोगों के लिए सूमा बनाना भी एक रोजगार ही है । डॉ. अर्जुन ने शोध को लेकर कहा कि किसी की शोध में गहराई तो किसी के शोध में विस्तार होता है, अपने शोध को साझा करना अमरत्व को प्राप्त करने जैसा है, एक सफल शोधकर्ता वह होता है जो किसी नए सत्य को हमेशा खोजने का प्रयास करता है l

डॉ. अर्जुन और शिवांजली होंगे सम्मानित
डॉ. अर्जुन ने बताया कि इस शोध कार्य के लिए उज्जैन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन में उन्हें विज्ञान गौरव अवार्ड एवं 18 वर्ष की आयु में अपने शोध से नई पहचान बना रही शिवांजली तिवारी को युवा वैज्ञानिक अवार्ड से सम्मानित किया जायेगा l इससे पूर्व आप दोनों ने कीट विज्ञान पर आधारित पुस्तक द जर्नी ऑफ़ एंटोमॉलोजी पुस्तक का सफल प्रकाशन भी किये है l

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