आउटसोर्स कर्मचारियों की जानकारी देने से नपा कर रही परहेज

सीधी जबलपुर दर्पण । नगर पालिका परिषद सीधी में आउटसोर्स भर्ती का मामला जोरों पर चल रहा है। इस मामले में जिनकी नियुक्ति हुई है उसकी जानकारी देने से परहेज किया जा रहा है। जबकि इसी मामले को लेकर गत नगर पालिका परिषद की बैठक में हंगामे के बाद मारपीट की नौबत भी आई थी इसके बाद भी अभी जानकारी देने से परहेज किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो कुछ ऐसे कर्मचारी आउटसोर्स से भर्ती किए गए हैं जो कागजों में हैं, पगार तो हर महीने ले रहे हैं लेकिन ड्यूटी नहीं करते हैं।
नगर पालिका की तानाशाही मानें या फिर जो भी रवैया हो अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष की आपसी विवाद का फायदा कौन उठा रहा है यह सबको मालूम है लेकिन इसी बीच आउटसोर्स भर्ती किसने किया जिसमें कि 126 कर्मचारियों की नियुक्ति हुई। यह भी मालूम हो कि अध्यक्ष की अनुमति से ही यह सब काम हुआ है। अब यह आउटसोर्स कर्मचारी कहां कार्यरत हैं यह भी सभी को मालूम है। किस नेता के घर कितने कर्मचारी कार्यरत हैं। सफाई कर्मी से लेकर कहां-कहां कार्यरत हैं कोई तथ्य छिपा नहीं है।
निशाने पर नपा कर्मचारी संघ
हाल ही में नपा कर्मचारी संघ अध्यक्ष बृजेश सिंह गोरे के नेतृत्व में कर्मचारियों द्वारा अध्यक्ष एवं उनके ससुर के खिलाफ अभद्रता सहित कई आरोप लगाते हुए, अनाधिकृत व्यक्ति की मौजूदगी पर रोक लगाने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था, जिसका असर अब यहां उलटा दिखाई दे रहा है,
इस मामले में अब चिन्हित नपा कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई अभियान शुरू किया गया है। जानकारी अनुसार सबसे पहले नपा कर्मचारी संघ अध्यक्ष बृजेश सिंह गोरे को ही टारगेट करते हुए निलंबित कर दिया गया है। आरोप यह लगाया गया है कि उन्होने अपनी पत्नी के नाम आवास का लाभ उठाया है। जबकि नियम की जानकारी के अनुसार हितग्राही परिवार की वार्षिक आय 3 लाख से अधिक नहीं है एवं परिवार की परिभाषा में मुखिया उसकी पत्नी/पति एवं नाबालिग बच्चे माने जाएंगे। एक आवास में एक से अधिक विवाहित परिवार निवासरत करते हैं जिसके अलावा दैनिक वेतनभोगी के पद पर कार्य कर रहे स्थाईकर्मी को आवास का लाभ मिलना चाहिए इसके बाद भी निलंबन की कार्रवाई समझ से परे मानी जा सकती है। इसके अलावा कुछ अन्य कर्मचारियों को भी लिस्टेड किया गया है जिनके खिलाफ भी जल्द कार्यवाही की गाज गिर सकती हैं।



