बरहिया क्षेत्र में चल रहीं दर्जनों खदानों का निरीक्षण आखिरी बार किसने किया

जबलपुर दर्पण। यह सवाल वर्षों से हवा में तैर रहा है, लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं। नियमों के अनुसार खनन होने का दावा करने वाले अधिकारी किस दुनिया में निरीक्षण कर आते हैं, यह रहस्य अब तक स्थानीय लोग नहीं समझ पाए—शायद खदानों तक जाने का रास्ता सिर्फ कुर्तों और कारोबारियों को ही दिखता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बठिया–बरहिया में बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन हो रहा है, और इसमें सत्ता–विपक्ष दोनों खेमों के सफेद कपड़ों वाले चेहरों के साथ मैहर के नामचीन कारोबारी भी शामिल बताए जाते हैं। सिंडिकेट इतना मजबूत कि प्रशासन उसके सामने या तो लाचार दिखता है, या फिर सांठगांठ की धूप में आंखें मींचे बैठा है।हालत यह कि पत्थर निकल रहा है, पहाड़ कट रहे हैं, करोड़ों की माइनिंग चल रही है… पर निरीक्षण की फाइलें वही पन्ना पलटती हैं जिन्हें खनन माफिया पलटने देते हैं।
प्रश्न वही—अवैध उत्खनन रोकने में प्रशासन असमर्थ है, या अनदेखी ही असली परमिट है?



