जबलपुर दर्पण

आमरण सत्याग्रह एवं जिला सिहोरा की मांग ने दिखाया नगर के लिए आईना, आत्म दाह करने मंच से की युवा ने घोषणा

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण । सिहोरा जिला आंदोलन का तीसरे दिन भी पूरी तरह जनउभार, आक्रोश और दृढ़ संकल्प से भरा रहा।सिहोरा स्वाभिमान वाहन रैली शाम निकाली गई जिसमे शामिल सिहोरा वासियों का आक्रोश स्पष्ट दिखाई दिया।
दूसरी ओर, एक दर्जन महिलाएँ सुबह से भी बस स्टेंड में क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठ गईं, जिसने आंदोलन को नई दिशा और नई ताकत दे दी।

महिलाओं का यह रूप पहली बार किसी मंच पर दिखा जहां पर महिलाओं ने खुलकर अपनी बात रखी, वो भी भूखी रहकर।महिलाओं के इस संघर्ष ने पूरे सिहोरा को आंदोलित कर दिया है। आम जनता में स्पष्ट संदेश है:
“अब सिहोरा अपनी बात मनवाकर ही दम लेगा।”

भूख हड़ताल पर बैठी रूपाली सराफ ने कहा—
“कभी सिहोरा मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी तहसील था, लेकिन बहोरीबंद, मझौली और ढीमरखेड़ा को अलग कर इसका विखंडन किया गया।
तब नेता कहकर गए थे कि सिहोरा को जिला बनाया जाएगा, लेकिन आज तक वादा पूरा नहीं हुआ। अब सिहोरा चुप नहीं बैठेगा।”

श्रीमती सोनाली साहू ने कहा
“सिहोरा महानतम है, भारत का मध्य बिंदु है।
भौगोलिक, जनसंख्या और सुविधा हर आधार पर सिहोरा जिला बनने योग्य है।
लेकिन वर्षों से इसकी उपेक्षा की गई है, जो अब बर्दाश्त नहीं होगी।”

सरोज कुररिया ने कहा—
“चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्रियों, हमारे विधायक और कई नेताओं ने कहा था कि सिहोरा जिला बनेगा।
लेकिन जीत के बाद सभी सत्ता सुख भोगने में मस्त है और जनता सड़कों पर है।
जनता में स्वाभाविक है और अब यह नाराजगी आंदोलन में बदल रही है।”

भूख हड़ताल पर बैठी बबीता त्रिपाठी ने आंदोलन की भावना को शब्द देते हुए कहा—
“यह लड़ाई अब जमीन की नहीं, पहचान की है… यह लड़ाई सिहोरा के स्वाभिमान की है।पूरा सिहोरा अब एकजुट होकर जिला पाने तक संघर्ष के लिए तैयार है।
मुख्यमंत्री जी, किसी भी नई राजनीतिक स्थिति के बनने से पहले सिहोरा को जिला घोषित करें।”

ये बैठी क्रमिक भूख हड़ताल पर —
सरोज कुररिया, रूपाली श्रॉफ, बबीता त्रिपाठी, प्रतिभा मिश्रा, कविता सेठ, मधु प्यासी, रोशनी मिश्रा, रिचा पाठक, सोनाली साहू, शिवांगी साहू, तस्लीम बानो, संगीता विश्वकर्मा

रैली में जुड़े सभी संवर्ग के लोग –

एक और जहां महिलाएं क्रमिक भूख हड़ताल करती रही वहीं समाज के प्रत्येक वर्ग के लोगों ने एक सिहोरा स्वाभिमान रैली निकाली जो बाबाशाला से शुरू होकर संपूर्ण सिहोरा खितौला भ्रमण करते हुए धरना स्थल पुराने बस स्टैंड सिहोरा में समाप्त हुई। सिहोरा वासियों ने ऐलान किया कि अब वह किसी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं है सरकार को अप्रिय स्थिति बनने से पहले सिहोरा को जिला बनना पड़ेगा।

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