जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

महर्षि जाबालि से बना जाबालिपुरम , हो गया जबलपुर

जबलपुर दर्पण। नर्मदा की कल कल धारा, संगमरमर की वादियां, हरित क्षेत्र, जंगल और प्राकृतिक सौंदर्य। यह नजरासदियों से है। सिर्फ बदला है तो वह नाम। त्रिपुरी, जाबलिपुरम जब्बलपोर और फिर जबलपुर। किसी भी शहर की बसाहट में वहां नदी एक प्रमुख स्थान रखती है। जबलपुर के लिए यह सौभाग्य है कि यहां शिव पुत्री मां नर्मदा की धारा मिलती है। गोंड शासको के इस क्षेत्र में मुगलो के बाद मराठा और फिर अंग्रेजों ने शासन किया, लेकिन इसकी पहचान हमेशा महर्षि जाबालि के नाम से रही । जिनका उल्लेख रामायण के साथ ही नौ पुराणों और महर्षि जाबालि द्वारा विरचित जाबालदर्शनोपदेश,जाबालोनिषद और जाबाल्युपनिषद उपनिषदों में मिलता है। शहर की पहचान आध्यात्मिक क्षेत्र के साथ ही ऐतिहासिक क्षेत्र में भी महत्व रखती है।
ऋषियों की तपोभूमि रहा जबलपुर-शहर की खासतौर पर पहचान ऋषियों की तपोभूमि से है। भेड़ाघाट क्षेत्र महर्षि भृगु ऋषि का क्षेत्र था। त्रिपुर काल में उनका क्षेत्र भरूच तक था। उनके वंशज जमदग्नि और परशूराम थे।उनका क्षेत्र मालवा और गुजरात तक था। कार्तवीर्य अर्जुन के समय त्रिपुरी का चरमोत्कर्ष हुआ। परंतु भगवान परशुराम से युद्ध के उपरांत त्रिपुरी श्रीविहीन हो गई। वहीं महर्षि जाबालि का क्षेत्र सुतीक्षण आश्रम सतना चित्रकूट से कूंडम,बघराजी,मंडला के पहले पाटन, कटंगी और वर्तमान जबलपुर क्षेत्र था।जो एक गोल घेरा की तरह बनता है। इस क्षेत्र को तब से जाबलिपुरम के नाम से लोग जानने लगे। पुनः महान कल्चुरियों के समय त्रिपुरी का उत्थान हुआ। इसके बाद जब त्रिपुरी का पराभव हुआ,तब राजा जाजल्व देव के समय क्षेत्र को जाजल्लपुर भी कहा गया। यहां अन्य राजा भी आये,जो जबलपुर नाम का ही उल्लेख करते रहे।
बाल्मीकि रामायण में मिलता है उल्लेख-बाल्मीकि रामायण में महर्षि जाबालि का उल्लेख मिलता है। जो नर्मदा से चित्रकूट तक विचरण करते थे। जबलपुर में वे चट्टानों के नीचे तपस्या करते थे। तपस्वी महर्षि का नाम अमर और सार्थक रहे इसलिए इस क्षेत्र का नाम जाबलिपुरम रखा गया था,जो अब वर्तमान में जबलपुर नाम है। हमारे पूर्वजों और बुजुर्गों से सुना था कि एक बार पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जबलपुर आये और उन्होंने इसे गुंडों का शहर कहा। इसके बाद जब आचार्य विनोबा आये तो यह बात बताई गई तो उनका कहना था कि ” अरे जिस शहर में कल कल करती नर्मदा बह रही हो वह शहर संस्कारधानी कहे जाने योग्य है”। जाबालि ऋषि ने जिस शहर में तप किया हो ,वो जाबालि नगर है, जाबलिपुरम है।
नर्मदा कुआंरी हैं। शहर जबलपुर ऋषि मुनियों की तपोभूमि है। जहां रेवा कुंआरी बह रही है। देश विदेश में विख्यात है अपना शहर जबलपुर। इसलिए संस्कारधानी कहा गया है।

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