जबलपुर में सनसनी अधिवक्ता पर हमला, एफआईआर के बाद भी गिरफ्तारी नहीं

जबलपुर दर्पण । जबलपुर में अधिवक्ता पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस कार्रवाई में देरी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है, जहां विजय नगर निवासी अधिवक्ता एकांश ढींगरा ने सोमवार को पुलिस अधीक्षक (SP) को आवेदन सौंपकर मुख्य आरोपी राजा तिवारी की तत्काल गिरफ्तारी, सह-आरोपियों की जल्द धरपकड़ और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है, पीड़ित का आरोप है कि घटना का स्पष्ट वीडियो साक्ष्य मौजूद होने के बावजूद आरोपी खुलेआम घूम रहा है और अपने प्रतिष्ठान पर बैठ रहा है जिससे उनके परिवार में भय का माहौल बना हुआ है, अधिवक्ता के अनुसार 2 मई 2026 को विजय नगर क्षेत्र में राजा तिवारी ने अपने साथियों के साथ मिलकर उन पर और उनके परिवार पर लाठी-रॉड से हमला किया था और उनकी गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ कर भारी नुकसान पहुंचाया गया, इस मामले में थाना विजय नगर में अपराध क्रमांक 0212/2026 दर्ज किया गया है जिसमें प्रारंभ में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296(b), 115(2), 324(4), 351(3), 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था और बाद में धारा 109 (जान से मारने की नीयत) भी जोड़ी गई, पीड़ित द्वारा दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि हमला अत्यंत गंभीर प्रकृति का था, आरोपी द्वारा गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया, घटना का वीडियो साक्ष्य मौजूद है, इसके बावजूद गिरफ्तारी नहीं की गई और आरोपी द्वारा लगातार परिवार को धमकाने की आशंका बनी हुई है, अधिवक्ता का कहना है कि आरोपी के खुले रहने से गवाहों को प्रभावित करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ और पुनः अपराध की संभावना बनी हुई है, इसलिए प्रशासन से मांग की गई है कि मुख्य आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, अन्य सह-आरोपियों को भी शीघ्र गिरफ्तार किया जाए, पीड़ित परिवार को पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए और मामले की उच्च स्तरीय निगरानी कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए, वहीं इस पूरे मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि घटना के बाद थाना विजय नगर में उनकी शिकायत दर्ज नहीं की जा रही थी जिससे अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया, मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला अधिवक्ता संघ जबलपुर के अध्यक्ष मनीष मिश्रा के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल थाना विजय नगर पहुंचा जिसमें मनोज शिवहरे, शैलेन्द्र यादव, विनोद विश्वकर्मा, रवीन्द्र दत्त, अनुभव शर्मा, राघवेन्द्र झा, निशांत झा, आदित्य सिंह ठाकुर, शुभम कुशवाह, आदित्य शर्मा सहित कई अधिवक्ता शामिल रहे जिन्होंने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया और पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बनाया, अधिवक्ताओं के विरोध और हस्तक्षेप के बाद आखिरकार पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और आरोपियों की तलाश जारी है, इस घटना ने एक बार फिर जबलपुर में कानून व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे गंभीर मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं होती है तो आम जनता का कानून व्यवस्था से विश्वास कमजोर हो सकता है, वहीं पीड़ित अधिवक्ता ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे उच्च अधिकारियों और न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।



