सिस्टम में करप्शन, या उच्च अधिकारी में लिप्त हैं भ्रष्टाचार का कनेक्शन, कर्तव्य और जिम्मेदारी की बात करने वाले हाथ पे हाथ धरे क्यों बैठे बड़ा सवाल? स्वास्थ्य मिशन में फर्जी डिग्री डॉ को मिल रहा था शहर से वेतन?

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण । मध्यप्रदेश स्वास्थ्य मिशन सरकार द्वारा हालही में दमोह जिले पुलिस द्वारा संजीवनी क्लिनिक में पदस्थ फर्जी डिग्रीधारी डॉक्टरों के अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किए जाने के बाद अब जबलपुर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच हुआ है।
चेरीताल जबलपुर के संजीवनी क्लिनिक से गिरफ्तार फर्जी डॉक्टर अजय मौर्य के मामले में अब विभाग के जिले में पदस्थ एपीएमसंदीप नामदेव सहित अर्बन नोडल अधिकारी डॉ. अमजद खान की सीधी संलिप्तता और मोटी मोटी कमीशनखोरी के लिखित आवेदन पुख्ता दस्तावेज आरोप सामने नज़र आ रहे हैं।
वी आई पी जुगाड की ड्यूटी रेल्वे में ही लगाई –
विभागीय सूत्रों और स्थानीय शिकायतों के अनुसार, आरोपी अजय मौर्य बिना डिग्री के मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहा था। वह कभी क्लिनिक नहीं आता था, बल्कि एपीएमसंदीप नामदेव और नोडल अधिकारी डॉ. अमजद खान की मिलीभगत से जबलपुर से चलने वाली स्पेशल ट्रेनों में वीआईपी ड्यूटी चमका रहा था। दोनों अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी हर महीने मोटा कमीशन लेकर चुप रहे और बिना ड्यूटी के भी फर्जी डॉक्टर का सरकारी वेतन पास कराते रहे।
न्यायिक प्रक्रिया इन गंभीर कानूनी धाराओं (Sections) के तहत बनती है कार्रवाई –
इस पूरे संगठित अपराध और जनता की जान से खिलवाड़ करने के मामले में इन अधिकारियों के विरूद्ध निम्नलिखित धाराओं के तहत तत्काल मामला दर्ज होना चाहिए।
धारा 318 और 319 बीएनएसजालसाजी और धोखाधड़ी सरकारी खजाने से फर्जी तरीके से वेतन आहरित करने और जनता को डॉक्टर बताकर धोखा देने के लिए (पुरानी IPC धारा 420/467/468)।
धारा 336 बीएनएस(फर्जी दस्तावेजों का असली के रूप में उपयोग करना- यह जानते हुए भी कि डिग्री फर्जी है, उसे नौकरी और वेतन के लिए वैध मानना।
धारा 61 बीएनएस(आपराधिक साजिश/Criminal Conspiracy) फर्जी डॉक्टर, एपीएम संदीप नामदेव और डॉ. अमजद खान द्वारा मिलकर सरकारी धन की उगाही और अपराध को लगातार अंजाम देने की साजिश रचना एवं स्वास्थ्य विभाग का सीधा संरक्षण बनता है। पूर्व अपराध की भारतीय दंड संहिताधारा 120 B
धारा 198 बीएनएस बीएनएसमानव जीवन को खतरे में डालना बिना योग्यता के चिकित्सा कार्य संचालित करने संरक्षण देकर आम नागरिक और जनता की जान से खिलवाड़ व सीधे जोखिम में डालना अपराध की श्रेणी में माना जाता हैं। पूर्व की आई पी सी भारतीय दंड संहिता धारा 336 के तहत।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13 लोक सेवक (Public Servants) होते हुए पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से आर्थिक लाभ (कमीशन) कमाने के जुर्म में।
मध्य प्रदेश उपचर्या गृह तथा रुजोपचार स्थापना (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम के तहत अवैध रूप से बिना रजिस्ट्रेशन के क्लिनिक का संचालन होने देने पर
प्रमुख मांगें-
1. स्वास्थ्य विभाग के ऐसे पद का दुरुप्रयोग और भ्रष्टाचार में नम्बर वन को तत्कालीन एफआईआर और निलंबन की कार्यवाही हो – एपीएम संदीप नामदेव और अर्बन नोडल अधिकारी डॉ. अमजद खान को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ आपराधिक षड्यंत्रऔर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर तत्कालीन गिरफ्तार किया जाए।
2.एपीएमकी डिग्री की जांच यह आशंका प्रबल है कि खुद एपीएम संदीप नामदेव की भी डिग्री फर्जी हो सकती है, इसलिए उनके स्वयं के शैक्षणिक दस्तावेजों की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
3.संपत्ति की जांच – इन अधिकारियों ने कमीशनखोरी से जो अवैध संपत्ति अर्जित की है, उसकी आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से जांच कराई जाए।
4.जबलपुर के सभी क्लिनिकों का ऑडिट – जबलपुर संभाग के सभी संजीवनी क्लिनिकों में तैनात डॉक्टरों और स्टाफ के दस्तावेजों का तत्काल फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाए।
गरीबों के इलाज के लिए बनी संजीवनी क्लिनिक को इन कमीशनखोर अधिकारियों ने भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है। यदि पुलिस प्रशासन और उच्च अधिकारियों ने इन दोनों नामजद दोषियों पर तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की, तो जबलपुर की जनता स्वास्थ्य विभाग का घेराव कर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।



