जबलपुर दर्पण

निवास छेत्र में भू-माफियाओं का जाल एकड़ में खरीद फुट में बिक्री ऊंचे दामों में नियमों को ताक पर रख धड़ल्ले से कट रहीं कॉलोनियां, किसानों की जमीनों पर बिल्डरों की नजर

जबलपुर दर्पण निवास। तहसील मुख्यालय और नगर परिषद क्षेत्र में इन दिनों अवैध कॉलोनियों के निर्माण की मानो होड़ मची हुई है। नगर परिषद बनने के वर्षों बाद भी क्षेत्र में व्यवस्थित शहरी विकास का सपना अधूरा दिखाई दे रहा है, जबकि दूसरी ओर भू-माफिया और बिल्डर खुलेआम नियमों को दरकिनार कर करोड़ों का खेल खेल रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निवास और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की जमीनें औने-पौने दामों में खरीदकर बिना वैधानिक अनुमति और बिना कॉलोनी विकास गाइडलाइन का पालन किए प्लॉट काटे जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन कॉलोनियों में लाखों रुपये में प्लॉट बेचे जा रहे हैं, वहां मूलभूत सुविधाओं तक का अभाव है। कई जगह न सड़क है, न पानी की व्यवस्था, न बिजली और न ही सार्वजनिक गार्डन जैसी आवश्यक सुविधाएं।
पांच लाख से दस लाख तक बिक रहे प्लॉट- सूत्रों के अनुसार बिल्डरों द्वारा किसानों से 3 से 5 लाख रुपए एकड़ के भाव से जमीन कृय कर और इस्कुर फुट में काटे जा रहे प्लॉटों की कीमत 5 लाख से लेकर 10 लाख रुपये से अधिक तक बताई जा रही है। जबकि नियमानुसार किसी भी कॉलोनी के निर्माण से पहले भूमि का वैधानिक रूपांतरण, नक्शा स्वीकृति, सड़क, बिजली, पानी और अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करना अनिवार्य होता है। आरोप है कि इन प्रक्रियाओं को नजरअंदाज कर चोरी-छिपे जमीनों की खरीद-फरोख्त की जा रही है, जिससे शासन को मिलने वाला राजस्व भी प्रभावित हो रहा है।
मिलीभगत के आरोप, किसानों में आक्रोश- स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ मामलों में जमीन पर कब्जा किसी और का है, लेकिन मिलीभगत के चलते बिक्री किसी अन्य व्यक्ति को कर दी गई। कई भूमि स्वामियों और पुराने निवासियों ने इसकी शिकायत तहसील और एसडीएम कार्यालय तक पहुंचाई है। सीमांकन, पंचनामा और राजस्व रिपोर्ट तक तैयार हो चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई अब तक ठंडे बस्ते में पड़ी है।
आरोप यह भी हैं कि इस पूरे खेल में कुछ जिम्मेदार अधिकारियों, राजस्व अमले और स्थानीय कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। कई कर्मचारियों के नाम भी राजस्व रिकॉर्ड में प्लॉट धारकों के रूप में दर्ज बताए जा रहे हैं।
कार्रवाई के इंतजार में भटक रहे आवेदक- शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वर्षों से आवेदन तहसील और एसडीएम कार्यालयों में लंबित पड़े हैं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कार्यालयों के चक्कर लगवाए जा रहे हैं। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का ध्यान इस ओर जाएगा? क्या अवैध कॉलोनियों और भू-माफियाओं पर कार्रवाई होगी, या फिर किसानों की जमीनों पर यूं ही मुनाफे का खेल चलता रहेगा?

इनका कहना है-“सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निवास एवं आसपास के क्षेत्रों में भूमाफियाओं द्वारा अवैध कॉलोनियां काटने का खेल तेजी से चल रहा है, जो पूरी तरह गलत और कानून के विरुद्ध है। जानकारी के मुताबिक पटवारी हल्का नंबर 36 एवं 31 में ऐसे मामले सामने आए हैं। बाहरी भूमाफिया भोले-भाले किसानों को बहला-फुसलाकर कम कीमत में जमीन खरीद रहे हैं और बाद में उसी जमीन को कई गुना अधिक दामों में बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे मामले में राजस्व विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों एवं पटवारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है, जिसके कारण अवैध प्लाटिंग और कॉलोनियों का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ऐसे भूमाफियाओं और उनसे जुड़े लोगों का पुरजोर विरोध करती है। प्रशासन को तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि किसानों की जमीन और क्षेत्र की व्यवस्था को बचाया जा सके।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी प्रदेश प्रवक्ता
मदन शाह कुलस्ते

इनका कहना है- जानकारी के मुताबिक निवास में भूमाफियाओं का धंधा फल-फूल रहा है। जबकि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जल, जंगल और जमीन की लड़ाई कई वर्षों लड़ रही है। वहीं बाहरी भूमाफिया निवास क्षेत्र में आकर किसानों को बहला-फुसलाकर कम दाम में जमीन खरीद रहे हैं और बाद में उन्हें लाखों रुपये में बेच रहे हैं। सवाल यह उठता है कि अवैध कॉलोनियों की कटाई और इस तरह के जमीन कारोबार को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने इसका विरोध करते हुए भूमाफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करतीं हैं और अगर इस तरह के कारोबार में सुधार नहीं आया तो गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जल्द ही आंदोलन करेगी।
घनश्याम कुम्हारे ब्लांक अध्यक्ष निवास गोंडवाना गणतंत्र पार्टी

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