जबलपुर दर्पण

संगोष्ठी व कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन

जबलपुर दर्पण। साहित्य अकादमी एवं गुलशन-ए-अदब के संयुक्त तत्वावधान में “गोंडवाना और महाकौशल में उर्दू भाषा और साहित्य की स्थिति” विषय पर अखिल भारतीय संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर से आए साहित्यकारों, शायरों और बुद्धिजीवियों ने भाग लेकर उर्दू भाषा, साहित्य और उसकी साझा तहज़ीब पर विचार व्यक्त किए।कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार चंद्रभान ख़याल ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि “उर्दू भाषा आम हिन्दुस्तानियों की भाषा है। यह केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी गंगा-जमुनी तहज़ीब और सांस्कृतिक विरासत की पहचान है।”कार्यक्रम के प्रारंभ में साहित्य अकादमी के सह-संचालक अनुपम तिवारी ने स्वागत भाषण दिया, जबकि उद्घाटन प्यारे साहब ने किया। प्रथम सत्र में जमील अहमद जमील, शफीक अंसारी, स्तुति अग्रवाल, डॉ. जलीलुर्रहमान, डॉ. महताब आलम एवं डॉ. अंजुम बाराबंकवी ने अपने आलेख प्रस्तुत किए। सत्र का संचालन शकील बाबू ने किया।
अतिथियों के स्वागत में शेख निज़ामी, शोएब अख्तर, साबिर खान, नैयरुल इस्लाम, श्रीमती यास्मीन बानो एवं सायरा बानो की विशेष भूमिका रही।कार्यक्रम के दौरान जनाब महबूब आलम को साहित्य सेवा के लिए सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने पर उपस्थित साहित्यकारों एवं श्रोताओं ने उनका अभिनंदन किया। दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन वरिष्ठ समाज सेवी मतीन अंसारी ने किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में सरदार हकीम बाबा उपस्थित रहे। कवि सम्मेलन में सोहन सलिल, परवेज़ परवाज़, डॉ. महताब आलम, डॉ. जलीलुर्रहमान, डॉ. अंजुम बाराबंकवी, बाबू अनवर निज़ामी, ताबिश नैयर दमोही, चंद्रभान ख़याल एवं स्तुति अग्रवाल ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन राशिद राही द्वारा किया गया।

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