स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन योजना के अंतर्गत”अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस“ पर कार्यक्रम आयोजित

जबलपुर दर्पण। स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन योजना, प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस, शासकीय महाकोशल स्वशासी अग्रणी महाविद्यालय जबलपुर एवं मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आज ”अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस“ के अवसर पर विद्यार्थियों हेतु “महाकौशल की ऐतिहासिक विरासत और संग्रहालयीय महत्व” विषय पर एक परिचर्चा आयोजित की गई।इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. अलकेश चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों को महाकौशल अंचल की समृद्ध पुरातात्त्विक, सांस्कृतिक एवं संग्रहालयीय धरोहर से परिचित कराते हुये बताया कि महाकौशल क्षेत्र केवल भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के प्राचीन विकास का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। नर्मदा घाटी के हथनौरा क्षेत्र से प्राप्त प्राचीन मानव अवशेष ‘नर्मदाकेसिस’ मानव विकास क्रम की अमूल्य धरोहर हैं। रूपनाथ का अशोक शिलालेख, तेवर एवं ककरेहटा के पुरातात्त्विक उत्खनन, बिलहरी एवं नरसिंहपुर के कलचुरीकालीन अवशेष, तिगवा का गुप्तकालीन विष्णु मंदिर तथा राम वन गमन पथ से जुड़े सांस्कृतिक साक्ष्य इस क्षेत्र की ऐतिहासिक निरंतरता को प्रमाणित करते हैं। संग्रहालय किसी भी देश की सभ्यता, संस्कृति, कला और इतिहास के संरक्षक होते हैं।प्रो. अरुण शुक्ल, संभागीय नोडल अधिकारी, स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन योजना, जबलपुर संभाग ने संग्रहालयों को “अतीत और वर्तमान के मध्य संवाद का जीवंत सेतु” बताते हुए कहा कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय संग्रहालय में संरक्षित ये धरोहरें हमारी ऐतिहासिक चेतना की अमूल्य निधि हैं। आधुनिक युग में तकनीक तेजी से बदल रही है, लेकिन संग्रहालय हमारी पहचान और विरासत को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। विज्ञान संग्रहालय, कला संग्रहालय और ऐतिहासिक संग्रहालय बच्चों और युवाओं के लिए ज्ञान का खजाना हैं।
इस अवसर पर महाविद्यालय डॉ. ज्योति जुनगरे, डॉ. बलीराम अहिरवार, डॉ. महेन्द्र कुशवाहा के साथ महाविद्यालय के लगभग 48 विद्यार्थी उपस्थित रहें।



