स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार करने वाले लोगों को मंत्री दे रहे प्रमाण पत्र,

दस्तावेज एवं लाखों के हेर फेर में फिर इन शिकायत आवेदन का क्या? मैं विभाग में कुछ भी करूं मेरी मर्जी, क्यों हो रहीं स्वास्थ्य विभाग धूमिल छवि?
मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण । मध्यप्रदेश स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए दी जाने वाली ‘होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर’ किट की खरीदी में जिला कम्युनिटी मोबिलाइजर दीपिका साहू और शहरी सहायक प्रबंधक संदीप नामदेव द्वारा पद का दुरुपयोग कर शासकीय धन का बड़े पैमाने पर गबन (बंदरबांट) करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस महाघोटाले में शासकीय नियमों की न केवल धज्जियां उड़ाई गईं। बल्कि नवजातों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ किया गया है।
इस मामले के मुख्य बिंदु और वित्तीय अनियमितताएं निम्न प्रकार से
बिना निविदा (टेंडर) और कलेक्टर की अनुमति के क्रय – बिना किसी पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के तथा माननीय जिला कलेक्टर महोदय की अनिवार्य अनुमति के बिना सीधे 10 लाख रुपये से अधिक के क्रय आदेश (Purchase Orders) जारी किए गए।
नियम विरुद्ध टुकड़ों में ऑर्डर (Splitting of Orders) वित्तीय नियमों और निविदा प्रक्रिया से बचने के इरादे से पूरी क्रय राशि को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर नियम विरुद्ध भुगतान किया गया।
अमानक सामग्री एवं सैंपल जांच की उपेक्षा – राज्य शासन के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद, बिना किसी पूर्व सैंपल टेस्टिंग के अत्यंत घटिया और अमानक स्तर की सामग्री खरीदी गई। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी दीपिका साहू की थी। जिन्होंने भारी कमीशन के लालच में गुणवत्ता को दरकिनार किया।
शहरी क्षेत्रों में बिना मांग-पत्र व समिति के खरीदी – APM संदीप नामदेव द्वारा बिना किसी मांग-पत्र (Demand Letter) के और बिना किसी वैध क्रय समिति (Purchase Committee) के गठन के अमानक किट खरीदी गई।
सामग्री का वितरण न होना व राशि का गबन- शहरी क्षेत्र के कई संवेदनशील क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं को किट प्रदान ही नहीं की गई और कागजों पर शत-प्रतिशत भुगतान दिखाकर शासकीय राशि का गबन कर लिया गया।
इन संगीन धाराओं के तहत बनता है आपराधिक मामला (Proposed Legal Sections)
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, दीपिका साहू और संदीप नामदेव द्वारा किए गए इस कृत्य पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की निम्नलिखित गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज होना अनिवार्य है:
धारा 318 BNS (जालसाजी/Cheating) लोक सेवक के पद पर रहते हुए शासन और जनता के साथ धोखाधड़ी करने के संबंध में।
धारा 316 BNS (आपराधिक विश्वासघात/Criminal Breach of Trust) शासकीय बजट और नवजातों की सुरक्षा सामग्री का अमानत में ख्यानत (गबन) करने के लिए।
धारा 336/340 BNS (दस्तावेजों में हेरफेर/Forgery) फर्जी बिल, बिना मांग-पत्र और टुकड़ों में वाउचर बनाकर शासकीय रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ करने पर।
धारा 61 BNS (आपराधिक षड्यंत्र/Criminal Conspiracy) दोनों अधिकारियों द्वारा आपस में मिलकर शासकीय धन को हड़पने की सोची-समझी साजिश रचने के तहत।
धारा 7 एवं 13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act, 1988) लोक सेवक (Public Servant) के रूप में पद का दुरुपयोग कर अवैध परितोषण (भारी कमीशनखोरी) लिप्त व आपराधिक दुराचरण करने के जुर्म में।
“हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता” – आरोपियों का खुला चैलेंज
शिकायतकर्ताओं और पीड़ित आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि जब इस संबंध में आवाज उठाई गई, तो दोनों आरोपियों ने अपने राजनैतिक और प्रशासनिक रसूख की धौंस देते हुए कहा कि “हमारी सेटिंग बहुत मजबूत है, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, जिसको जहां शिकायत करनी है करे।”
यह बयान शासकीय मर्यादाओं का खुला उल्लंघन और प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती है।
निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग- शिकायत आवेदन के बाद भी विभाग बना अंधभक्त
चूंकि स्थानीय स्तर पर आरोपियों की साठगांठ की पूरी आशंका है। वहीं स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से सूबे मुखिया (मुख्यमंत्री), स्वास्थ्य मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की जाती है कि:
- इस पूरे घोटाले की जांच किसी अन्य जिले के उच्च अधिकारी एवं एसडीएम (SDM) स्तर के अधिकारी से निष्पक्ष रूप से कराई जाए।
- दोनों भ्रष्ट अधिकारियों (दीपिका साहू एवं संदीप नामदेव) को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) किया जाए ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें।
- इनके विरुद्ध पुलिस में नामजद एफआईआर दर्ज कर गबन की गई शत-प्रतिशत राशि की रिकवरी तथा (कुड़की) की जाए।
यदि इस अत्यंत संवेदनशील मामले में जल्द ही दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो आशा कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों द्वारा उग्र आंदोलन और न्यायालय की शरण ली जाएगी।


