नई दिल्ली

“पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं है” ज्यूडिशियल काउंसिल

नई दिल्ली (न्यूज़ वार्ता)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ज्यूडिशियल काउंसिल ने देशवासियों से पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन तथा भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने हेतु सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया । ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन श्री राजीव अग्निहोत्री ने अपने संदेश में कहा कि आज संपूर्ण विश्व जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जल संकट, जैव विविधता के क्षरण तथा वनों की कटाई जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन समस्याओं का प्रभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव स्वास्थ्य, कृषि, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन पर भी व्यापक रूप से पड़ रहा है। ज्यूडिशियल काउंसिल का मानना है कि स्वस्थ पर्यावरण प्रत्येक व्यक्ति का मूल अधिकार है। भारत के संविधान में भी पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। संविधान के अनुच्छेद 48(क) तथा अनुच्छेद 51(क)(ग) के अंतर्गत राज्य और नागरिकों दोनों को पर्यावरण, वन एवं वन्यजीवों की रक्षा एवं संवर्धन का दायित्व सौंपा गया है। ज्यूडिशियल काउंसिल ने कहा कि केवल सरकारी योजनाओं और नीतियों के माध्यम से पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, उद्योगों, युवाओं तथा आम नागरिकों की सहभागिता आवश्यक है। ज्यूडिशियल काउंसिल ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण हितैषी आदतों को अपनाएं, जैसे कि प्लास्टिक का कम उपयोग, जल संरक्षण, ऊर्जा की बचत, कचरे का उचित प्रबंधन तथा अधिक से अधिक वृक्षारोपण। एक-एक नागरिक का छोटा प्रयास भी सामूहिक रूप से बड़े परिवर्तन का आधार बन सकता है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ज्यूडिशियल काउंसिल ने “मेरा जीवन – मेरा वृक्ष” अभियान को भी प्रोत्साहित करते हुए प्रत्येक नागरिक से अपने जीवनकाल में कम से कम एक वृक्ष लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने का आग्रह किया। वृक्ष न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बल्कि वे भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ वायु, जल संरक्षण और बेहतर जीवन प्रदान करने का आधार भी हैं। काउंसिल ने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन परस्पर जुड़े हुए विषय हैं। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरणीय कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सार्वजनिक जवाबदेही को सुनिश्चित करना सतत विकास की दिशा में आवश्यक कदम हैं। ज्यूडिशियल काउंसिल ने सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, युवाओं तथा नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाने और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति समाज को प्रेरित करने का आह्वान किया। इस अवसर पर काउंसिल ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि प्रत्येक नागरिक पर्यावरण संरक्षण को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करे, तो भारत एक स्वच्छ, हरित और सतत विकास वाला राष्ट्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त कर सकता है। ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन श्री राजीव अग्निहोत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस पर जोर दे कर कहा “प्रकृति मानव जीवन की आधारशिला है। स्वच्छ वायु, शुद्ध जल और हरित पर्यावरण के बिना स्वस्थ समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम पर्यावरण संरक्षण को केवल एक दिवस तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। मैं सभी नागरिकों, विशेषकर युवाओं से आग्रह करता हूं कि वे पर्यावरण सुरक्षा के लिए आगे आएं और ‘मेरा जीवन – मेरा वृक्ष’ जैसे अभियानों से जुड़कर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं। प्रत्येक व्यक्ति यदि एक वृक्ष लगाए और उसकी देखभाल करे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और हरित भविष्य का निर्माण संभव है। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि पृथ्वी केवल हमारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी धरोहर है। आइए, हम सभी मिलकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लें और एक स्वच्छ, हरित तथा समृद्ध भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।”

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