कल्पकथा और शब्द सागर का साहित्यिक संगम, 257वीं काव्यगोष्ठी में बही सृजन-सुधा की अविरल धारा

जबलपुर दर्पण । प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार एवं शब्द सागर समूह इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 257वीं साप्ताहिक काव्यगोष्ठी साहित्यिक समन्वय और सृजनात्मक नवाचार का अनुपम उदाहरण बनी। काव्य, संस्कृति और संवेदनाओं के इस सुंदर संगम में देश के विभिन्न अंचलों से जुड़े सृजनकारों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा से आयोजन को गरिमामयी बना दिया। संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह की सूचना के अनुसार कार्यक्रम का संचालन भास्कर सिंह माणिक एवं मनीषा पटेल मनु ने किया। अध्यक्षता डॉ. अखिलेश राव ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में अरुण सक्सेना अपेक्षित उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा प्रस्तुत संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुआ। लगभग दो चरणों एवं पांच घंटे तक चले इस विशेष आयोजन में साठ से अधिक काव्य रचनाओं का भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण हुआ, जिसमें विविध भावों और साहित्यिक शैलियों का सुंदर समागम देखने को मिला। काव्य पाठ में शब्द सागर समूह की ओर से डॉ. अखिलेश राव, अरुण सक्सेना अपेक्षित, मनीषा पटेल मनु, मंजू मित्तल, अनिल ओझा, दीप्ति गुप्ता, दिनेश दवे, प्रशांत राव चौकसे, पूनम सिंह प्रिय श्री, नीरल मंगला, कल्याणी गुप्ता कृति, एवं कल्पकथा परिवार की ओर से विजय रघुनाथराव डांगे, भास्कर सिंह माणिक, बिनोद कुमार पाण्डेय, प्रमोद कुमार पटले, मणिका वर्मा, दिनेश कुमार दुबे, शोभा प्रसाद, भगवान दास शर्मा प्रशांत, रमापति मौर्य, ज्योति प्यासी, डॉ. श्याम बिहारी मिश्र, नरेंद्र कुमार वर्मा नरेन, ब्रजेश चौहान, डॉ. मंजू शकुन खरे, सविता बांगड़ सुर, राधा श्री शर्मा एवं पवनेश मिश्र ने अपनी मौलिक रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” के 150वें स्मरणोत्सव वर्ष के अंतर्गत राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन किया गया। राधा श्री शर्मा ने अतिथियों, साहित्यकारों एवं दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया। “सर्वे भवन्तु सुखिनः” शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।



