विकास कार्यों और आपसी ताल मेल न होने से संसदीय क्षेत्रों में बिगड़े हालातो की हो रहीं चर्चा, मंत्री, सांसद, विधायक भी विधानसभा के अधूरे कार्यों से हुए नाराज

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण । जबलपुर जिले निवासी राकेश सिंह एवं मध्य प्रदेश के वर्तमान लोक निर्माण विभाग (PWD) कैबिनेट मंत्री हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार में वे जबलपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए वह मंत्री बनने से पहले जबलपुर से लगातार चार बार (2004 से 2023 तक) भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा सांसद रहे और मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का पद भी संभाल चुके हैं।
अब इन दोनों क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि से जिले से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक आस टिकी हुई हैं।
सांसद आशीष दुबे के दो वर्ष का कार्यकाल सफल – सिहोरा की अपेक्षाएं अभी भी बनीं बरकरार
सांसदों की सिहोरा से दूरी के क्रम को तोड़ न सकें।
जबलपुर जिले के लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने जाने के बाद आशीष दुबे के कार्यकाल के दो वर्ष जून 2026 में पूर्ण हो चुके हैं। इस दौरान सिहोरा एवं आसपास के क्षेत्र में सांसद की सक्रियता को लेकर आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं बुद्धिजीवियों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि पूर्व की तुलना में सिहोरा और सांसद के बीच की दूरी कुछ हद तक कम अवश्य हुई है, लेकिन क्षेत्र की विकास संबंधी अपेक्षाओं के अनुरूप कोई व्यापक और स्पष्ट विकास रोडमैप अभी तक सामने नहीं आ सका है। सिहोरा क्षेत्र में लंबे समय से जिला सहित आधारभूत सुविधाओं, औद्योगिक क्षेत्रों का विकास, युवा रोजगार सृजन और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की मांग करता रहा है। अब ऐसे में लोगों को उम्मीद थी कि सांसद द्वारा क्षेत्र के लिए एक दीर्घकालिक विकास दृष्टि सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत की जाएगी।
क्यों उठीं सिहोरा जिला की मांग – चुनाव जीतने के बाद वादे पड़े अधूरे सिहोरा को जिला बनाए जाने की मांग यहां के नागरिकों की सबसे प्रमुख और पुरानी मांगों में शामिल रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि इस विषय पर सांसद की ओर से अब तक ऐसा कोई प्रभावी सार्वजनिक प्रयास या पहल नहीं दिखाई दी। जिससे यह संकेत मिले कि जिला निर्माण की मांग को लेकर कोई ठोस रणनीति बनाई जा रही है। यही कारण है कि इस मुद्दे पर लोगों के मन में अभी भी अनेक तरह के प्रश्न बने हुए हैं।
हालांकि केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सिहोरा क्षेत्र को भी देश के अन्य क्षेत्रों की तरह प्राप्त हुआ है। पर स्थानीय लोग इसे सांसद द्वारा की व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं देखते। उनका मानना है कि सांसद के दो वर्ष के इस कार्यकाल में दो ट्रेनों के सिहोरा स्टेशन में ठहराव के अलावा कोई ऐसी विशेष परियोजना या उपलब्धि क्षेत्र को नहीं मिली। जिसे सिहोरा की पहचान से जोड़कर लंबे समय तक याद रखा जा सके।
क्षेत्र के बुद्धिजीवियों का मत है कि सांसद को सिहोरा एवं आसपास के ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, किसानों और युवाओं के साथ संवाद स्थापित कर क्षेत्र से जुड़े विकास का एक समग्र रोडमैप तैयार करना चाहिए। उनका मानना है कि शेष बचे तीन वर्षों में यदि प्राथमिकताओं को निर्धारित कर योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए तो वह भी सिहोरा क्षेत्र विकास की नई दिशा प्रदान कर सकता है।
फिलहाल सांसद आशीष दुबे के कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने पर जहां कुछ उपलब्धियों को लेकर संतोष व्यक्त किया जा रहा है, वहीं सिहोरा को जिला बनाने, बड़े विकास कार्यों को गति देने और क्षेत्र की दीर्घकालिक आवश्यकताओं को पूरा करने को लेकर जनता की उम्मीदें अभी भी लगीं हुई हैं। आने वाले तीन वर्षों में इन अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरा जाता है, इस पर क्षेत्र की जनता की नजर बनी हुई हैं।



