मान्यता रद्द आयुष्मान हॉस्पिटल के संचालक,स्वास्थ्य विभाग के आदेशो को दिखा रहे ठेंगा

मान्यता रद्द होने के बाद भी कर रहे नए मरीजों भर्ती : प्रशासन मौन
जबलपुर दर्पण नप्र। कलेक्टर के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय ने फायर एनओसी नहीं होने एव अन्य मापदंडों को पूरा न करने वाले चार निजी अस्पतालों के पंजीयन निरस्त कर दिये थे। इन अस्पतालों में डॉ खान ईएनटी हॉस्पिटल सिविल लाइन जबलपुर, तिगनाथ हॉस्पिटल राइट टाउन जबलपुर, लाईफ लाइन मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल सुहागी जबलपुर एवं आयुष्मान हॉस्पिटल सिहोरा शामिल थी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा ने चारों अस्पतालों में नये मरीजों को भर्ती करने पर रोक लगा दी थी तथा अस्पताल संचालकों को वर्तमान में भर्ती मरीजों का समुचित उपचार करने के सक्त निर्देश दिये थे। इन चार अस्पतालों को मिलाकर अब तक फायर एनओसी नहीं होने और आवश्यक मापदण्डों में कमी पाये जाने पर 28 अस्पतालों की मान्यता रद्द कर दी गई थी।
लेकिन जिला कलेक्टर एव मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए आयुष्मान हॉस्पिटल सिहोरा, नए मरीजों को भर्ती करके उनका इलाज करके शासन के आदेशों को नही मान रहे है। भोले भाले गांव के मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे है। क्या जिला प्रशासन ने इतने बड़े अग्निकांड से कोई सबक नहीं लिया, क्या हम मान ले कि प्रशासन एव स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में ही जिले में हॉस्पिटल माफिया फल फूल रहा है। प्रशासन को इन पर कार्यवाही करने में क्या परेशानी है। नियमों को ताक में रखकर आयुष्मान हॉस्पिटल सिहोरा के संचालक द्वारा नए मरीजों का उपचार किया जा रहा है। अब देखना होगा प्रशासन एव स्वास्थ्य विभाग इन लापरवाह हॉस्पिटल संचालित करने वाले डाक्टर पर क्या कार्यवाही करता है।




