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मोदी सरकार ने दूसरे कार्यकाल के प्रथम वर्ष में लिए ऐतिहासिक निर्णय

बीजेपी कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में बोलते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के प्रथम वर्ष की उपलब्धियां गिनाई

जबलपुर । भारतीय जनता पार्टी केंद्र सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष के समाप्त होने के उपलक्ष में जनता के समक्ष आकर अपनी उपलब्धियों को प्रस्तुत कर रही है ताकि उसके द्वारा किए गए कार्यों का लेखा-जोखा जनता तक पहुंचे और उनके कार्यों का आकलन कर सकें हालांकि विपक्ष पूरी कोशिश कर रहा है कि केंद्र सरकार के इस कार्यकाल को असफल बताया जाए। बीजेपी कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में बोलते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के प्रथम वर्ष की उपलब्धियां गिनाई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में देश ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि कहीं हम स्वप्न तो नहीं देख रहे हैं। लेकिन सच यह है कि वे सभी स्वप्न एक छोटे से कार्यकाल में पूरे कर दिए गए हैं, जिन्हें दीर्घकाल से देखा जा रहा था और जिन सपनों को पूरा करने के लिए भारत के लोग लगातार अनुनय, विनय, संघर्ष और बलिदान की पटकथा लिख रहे थे।

एक साल में वे सभी काम पूरे हुए हैं, जिन्हें वोटबैंक के लालच में तमाम राजनीतिक दलों ने लटकाकर रखा था। सरकार का यह एक साल उन कदमों के लिये भी याद किया जाएगा, जो उसने कोरोना महामारी से पैदा हुए संकट को अवसर में बदलने और देश को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए उठाए हैं। चाहे मुस्लिम बहनों को तीन तलाक के अभिशाप से मुक्ति की बात हो या कश्मीर से धारा-370 के कलंक को मिटाने की। नागरिकता संशोधन कानून को लागू करने का विषय हो या फिर राम मंदिर निर्माण का पुण्य कार्य प्रारंभ करने की बात हो, मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले साल का गौरवगान शताब्दियों तक होगा, यह तय है।

क्योंकि इस एक साल ने इतिहास के कलंकों को मिटाया है, कुरीतियों को धोया है और एक अनंत, अमिट और अभेद विश्वास का जागरण भारत के लोगों के भीतर किया है।

जम्मू-कश्मीर में विभाजन और आतंकवाद की मानसिकता को प्रश्रय देने वाली अनुच्छेद-370 और 35 ए के खिलाफ हमारा विचार परिवार लगातार संघर्ष कर रहा था। हम रोज ध्येय मंत्र की तरह नारा लगाते थे कि एक देश में दो निशान, दो प्रधान और दो विधान नहीं चलेंगे। इसके लिए हमारे अराध्य डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने अपना बलिदान दिया। इस बलिदान ने हमें एक संकल्प दिलाया कि जहां हुए बलिदान मुखर्जी वह कश्मीर हमारा है। जो कश्मीर हमारा है वो सारा का सारा है।

इसी संकल्प के तहत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गृहमंत्री श्री अमित शाह जी ने जिस दृड़ता और राष्ट्रभक्ति के साथ 370 और 35 ए से कश्मीर को मुक्ति दिलाई उसे सोचकर ही हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।

दुर्भाग्य से देश की तमाम राजनीतिक पार्टियां कश्मीर में हिंदुओं और सिखों का कत्लेआम, उनकी बहू-बेटियों से बलात्कार और उनकी संपत्तियों को कब्जाने और जलाने का कोहराम चुपचाप देखती रहीं। उन्होंने इन अमानवीय कृत्यों को अपना वोटबैंक खिसक जाने के डर से कभी विरोध नहीं किया।

अनुच्छेद-370 के कारण कुछ ऐसे प्रावधान जम्मू-कश्मीर में लागू थे जिनके कारण हमारे दलित समाज के भाई-बहनों को एकओर जहां आरक्षण के लाभ से वंचित रहना पड़ा, वहीं दूसरी ओर उन्हें सामान्य नागरिक अधिकार भी उपलब्ध नहीं थे। उन्हें केवल सफाई कमर्चारी की हेसियत से ही देखा जाता था।

लेकिन अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर न सिर्फ देश की मुख्यधारा से जुड़ा है बल्कि वहां से मारकाटकर भागए गए हिन्दुओं और सिखों के जीवन में अपनी मातृभूमि पर पुनः बसने और अपनी संपत्तियां पुनः प्राप्त करने की लालसा जागी है। आरक्षण सहित वे सभी कानून जम्मू-कश्मीर में लागू हो गए हैं जो शेष भारत में लागू रहते हैं।

जब नेतृत्व, ध्येयपथ पर अडिग होता है तब वह किसी संकट काल में भी अपनी ध्येय से विचलित नहीं होता। इसका ताजा उदाहरण है कि कोरोना महामारी के मोदी जी की सरकार की आंखों से कश्मीर के पीड़ितों की पीड़ा ओझल नहीं हुई। सरकार ने लगभग 5 लाख हिन्दू और सिख परिवारों को कश्मीर घाटी में पुनः बसाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
इस एक वर्ष को मुस्लिम समाज की बहनों के सम्मान की स्थापना और अत्याचार से मुक्ति के रूप में भी देखा जाएगा। जिस देश में 1985 में शाहबानों को वोट के लालच में भारत की सरकार ने तड़पने के लिए छोड़ दिया था, उसी देश में 2019 में एक दूसरी सरकार ने शायराबानो की पहल पर करोड़ो-करोड़ मुस्लिम बेटियों और बहनों को तीन तलाक के अभिशाप से मुक्ति दिला दी।

31 जुलाई 2019 का दिन मुस्लिम समाज में महिलाओं के सम्मान और बेहतरी की दिशा में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाएगा। अब कोई भी व्यक्ति किसी बहन-बेटी को तीन बार तलाक बोलकर उसकी जिंदगी बर्बाद नहीं कर सकेगा।

दुनिया के कई मुस्लिम देश दशकों पहले तीन तलाक प्रथा को अन्यायपूर्ण मानते हुए इस पर रोक लगा चुके हैं। लेकिन एक धर्मनिरपेक्ष देश होते हुए भी भारत की सरकारों ने सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के चलते इसे देश में चलने दिया।

मुस्लिमों के तुष्टिकरण के लिए कांग्रेस पार्टी किस हद तक जा सकती है, इसका उदाहरण शाह बानो प्रकरण में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने प्रस्तुत किया था, जिसने जानबूझकर मुस्लिम महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित कर दिया था। प्रधानमंत्री श्री मोदी की सरकार अपने पहले कार्यकाल में इसके लिए अध्यादेश लाई थी और दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही 31 जुलाई, 2019 को कानून बना दिया।
देश की आजादी और विभाजन के समय से ही पाकिस्तान, पूर्वी पाकिस्तान जो अब बांग्लादेश है, अफगानिस्तान आदि में गैर मुस्लिम अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया जाता रहा है। उनके घर जला दिये गए, कहीं बहनों और बेटियों को अगवा करके जबरन निकाह करा दिये गए और कई को तलवार के जोर पर धर्म बदलने पर मजबूर कर दिया गया।

विभाजन के बाद पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई और पारसी अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने की सलाह महात्मा गांधी, सरदार पटेल और स्वयं पं. नेहरू ने भी दी थी, लेकिन बाद की कांग्रेस सरकारों ने वोट बैंक की राजनीति के चलते इन नेताओं के आश्वासन को भी दरकिनार कर दिया। लेकिन जब इस देश में नरेंद्र मोदी जी की सरकार आई तो धर्म के आधार पर पीड़ित इस मानवता को न्याय और सम्मान दोनों देने की दृष्टि से भारत ने अपनी बाहें फैला दी। उन सभी लोगों को भारत की नागरिकता देने का ऐलान कर दिया, जिनके ऊपर गैर मुस्लिम होने के कारण जुल्म बरसाए जा रहे थे।

मोदी जी के दूसरे कार्यकाल के पहले साल में ही 10 जनवरी, 2020 को नागरिकता संशोधन कानून बनाकर इस वादे को पूरा भी कर दिया। अब ये शरणार्थी सिर उठाकर अपने देश में जी सकेंगे और इन्हें वह सभी अधिकार हासिल होंगे जो इस देश के नागरिकों को मिले हैं। दुर्भाग्य से कांग्रेस सहित अन्य कुछ पार्टियों ने इस कानून का विरोध किया। देश में अराजकता भड़काने का प्रयास किया गया। उन्हें हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी आदि लोगों के सम्मान और सुरक्षा से चिढे़ क्यों हैं ? समझ से परे है।
सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक जैसे साहिसक अभियानों से देश को आतंकवाद की आंखों में आंखें डालकर बात करना सिखाने वाली मोदी सरकार ने कानून की दृष्टि से आतंकवाद के खात्मे के लिए भी कई कदम उठाए हैं।

एनआईए जैसी जांच एजेंसी जब किसी आतंकी घटना की जांच के दौरान किसी संदिग्ध को हिरासत में लेती थी, तो उसे राज्य सरकार से अनुमति लेना होती थी। लेकिन अगस्त, 2019 में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम विधेयक (यू.ए.पी.ए.) को संसद के दोनों सदनों में पारित कराकर सरकार ने यह मुश्किल भी खत्म कर दी। अब एनआईए संदेह के आधार पर किसी को हिरासत में भी ले सकती है और आतंकवाद से जुड़े मामलों में संपत्ति कुर्क भी कर सकती है।
भारतीय जनता पार्टी प्रारंभ से ही विधि सम्मत तरीके से राम मंदिर निर्माण के पक्ष में रही है, जबकि कांग्रेस और उसके जैसी अन्य पार्टियां इसमें रोड़े अटकाने का काम कर रही थीं।
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मंदिर निर्माण के लिए कई स्तरों पर चर्चा हुई, आम सहमति बनाने के प्रयास हुए। लंबी सुनवाई के बाद नवंबर, 2019 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पांच जजों की स्पेशल बेंच ने बहुमत से राम मंदिर के हक में फैसला दिया। जिसके बाद केन्द्र सरकार ने कोर्ट के निर्देशानुसार मंदिर निर्माण के लिये ट्रस्ट का गठन कर दिया है और भव्य राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

राम मंदिर का निर्माण करोड़ों करोड़ भारतीयों की आस्था का प्रश्न है और वर्षों से भगवान राम के मंदिर को भव्य रूप में देखने की लालसा लिये हुये संघर्ष के पथ पर गये हजारों लोगों ने अपना बलिदान दिया है।
मोदी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में शुरू किए आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाते हुए बीते एक साल में भी कई ऐसे प्रावधान किए हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक मंदी की स्थिति में भी गति देंगे।

मोदी सरकार ने बैंकों का एनपीए कम करने की मंशा से देश के 10 बड़े सरकारी बैंकों का मर्जर किया। इसके अलावा बैंकों के लिए 55250 करोड़ रुपये के बेलआउट पैकेज की घोषणा भी की है।

इनके अलावा सरकार ने नागरिक उड्डयन में एफडीआई का रास्ता साफ करने, कार्पोरेट टैक्स को कम करने, कंपनी एक्ट को लचीला बनाने तथा एमएसएमई के लिए आसान ऋण उपलब्ध कराने जैसे कदम भी उठाए हैं।
दूसरे कार्यकाल के पहले ही साल में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार को कोरोना महामारी के वैश्विक संकट से भी दो चार होना पड़ा। मोदी सरकार ने संकट के इस दौर में भी गरीब कल्याण का रास्ता नहीं छोड़ा और सरकार गरीबों, मजदूरों और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्तियों की चिंता बराबर करती रही। इसी के चलते मोदी सरकार ने लॉकडॉउन के साथ ही 1.70 लाख करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की।

इसमें से 16 मई तक देश के 8.19 करोड़ किसानों को किसान सम्मान निधि के रूप में 2000 रुपये दिये गए। कोरोना से लड़ाई में शामिल 22 लाख अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं डॉक्टर्स, नर्स, स्वास्थ्यकर्मियों आदि के लिए 50 लाख के बीमे का प्रावधान किया गया। 80 करोड़ गरीबों को 5 किलो गेंहू/चावल एवं 1 किलो दाल प्रतिमाह निःशुल्क दिये जाने का प्रावधान किया गया। 6.81 करोड़ उज्जवला गैस सिलेंडर मुफ्त दिये गए हैं। 20 करोड़ महिलाओं को प्रतिमाह 500 रुपये तथा 3.2 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों, विकलांगों, विधवाओं आदि को 1000 रु. पेंशन दिये जाने सहित 2.2 करोड़ कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को भी 3950 करोड़ रुपये की मदद दी गई है।
कोरोना संकट के दौरान दूसरे और बड़े राहत पैकेज की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने 12 मई को की। उन्होंने इस 20 लाख करोड़ के पैकेज को देश को आत्मनिर्भर बनाने के अभियान का नाम दिया।
इसमें एमएसएमई, निजी क्षेत्र के कर्मचारियों, करदाताओं, मजदूरों, किसानों आदि सभी वर्गों के लिए राहतभरे प्रावधान शामिल हैं। इसमें देश के 700 एमएसएमई क्लस्टर्स के लिए तीन लाख करोड़ का प्रावधान है, तो मनरेगा के तहत 40 हजार करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है, ताकि प्रवासी मजदूरों को अपने गांव में रोजगार मिल सके।

कोरोना महामारी से मुकाबले के लिए जिला स्तर तथा ब्लॉक स्तर पर प्रयोगशालाएं तथा गांव, कस्बों और शहरों में संक्रामक बीमारियों के लिए अस्पताल बनाए जाने के प्रावधान भी हैं। इस पैकेज में मोदी सरकार ने जो प्रावधान किए हैं, उनसे सामर्थ्य, उद्यमशीलता, वैज्ञानिक उन्नति और कौशल के आधार पर भारत को वैश्विक मैन्युफेक्चरिंग हब बनाने तथा अधिकाधिक युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

गांव, कृषि और श्रम आधारित अर्थव्यवस्था के विकास की दिशा में आत्मनिर्भर भारत अभियान में ऐसे तमाम प्रावधान किए गए हैं, जो भारत के लोगों को अपनी जड़ों से तो जोड़ेंगे ही, साथ-साथ रोजगार की दिशा में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएंगे। आने वाले वर्षों में यह अभियान ना केवल देश के आर्थिक ढांचे को बदलने वाला साबित होगा, बल्कि इसका व्यापक कूटनीतिक असर भी देखने को मिलेगा। स्थानीय उत्पादों को महत्व देने की प्रधानमंत्री जी की पहल उनके दूरगामी दृष्टिकोण का द्योतक है।
भारत को विश्वगुरु बनाने के अपने अभियान में प्रधानमंत्री श्री मोदी दूसरे कार्यकाल में भी पहले कार्यकाल की ही तरह सक्रिय रहे हैं। पहले कार्यकाल में जहां भारत को विश्व योग दिवस जैसी गौरवशाली उपलब्धी प्राप्त हुई, वहीं इस एक साल में ह्यूस्टन में ‘हाउडी मोदी’ और अहमदाबाद में ‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रमों का सफल आयोजन मोदी जी के वैश्विक नेता और भारत के विश्वगुरु के रूप में उभरने का संकेत दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वैसे तो सारी दुनिया से ही संबंध सुधारे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं दुनिया के इस्लामिक देशों के साथ भारत के रिश्ते। सऊदी अरब से लेकर यूएई सहित तमाम इस्लामिक देशों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है।

यह इस्लामिक देशों के साथ भारत के प्रगाढ़ रिश्तों का ही परिणाम था कि कश्मीर मसले पर दुनिया के अधिकांश इस्लामिक देश भारत के साथ खड़े रहे। यह मोदी जी के सफल नेतृत्व और कूटनीति का ही परिणाम है कि ओआईसी की बैठक में पाकिस्तान जब भारत विरोधी प्रस्ताव लाता है, तो दुनिया के इस्लामिक देश ही उसे वीटो कर देते हैं।
वैश्विक मंच पर मोदी सरकार ने चीन के नेतृत्व् वाले आरसीईपी का विरोध किया, जिससे देश के किसानों, छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा हुई।
देश की रक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा सेना के तीनों अंगों में बेहतर तालमेल के लिए मोदी सरकार ने चीफ ऑफ डिफेंस का पद बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
मोदी सरकार ने एक देश-एक राशनकॉर्ड योजना शुरू की, ताकि देश का कोई भी गरीब व्यक्ति सब्सिडी आधारित खाद्य पदार्थों से वंचित न रहे। इस योजना के तहत अगस्त, 2020 तक 23 राज्यों के 67 करोड़ लाभार्थियों को कवर करने का लक्ष्य है।

बाल यौन शोषण को लेकर कड़ा कानून बनाना तथा दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नया सड़क सुरक्षा कानून मोदी सरकार की ऐसी उपलब्धियां हैं, जिनसे समाज को नई दिशा मिलेगी।
सरकार ने अटकी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 25 हजार करोड़ का वैकल्पिक निवेश कोष बनाने को मंजूरी दी है। इससे 1600 आवासीय परियोजनाओं को लाभ होगा।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस कोरोना संकट काल में जिस आत्मनिर्भर भारत बनाने के अभियान की बात कही है उसे लेकर हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में भाजपा देश में सभी जगह कार्यक्रम करेगी जिसमें वर्चुअल रैली, वर्चुअल कॉन्फ्रेंस, विडियों कान्फ्रेंस के माध्यम से लोगों के बीच प्रधानमंत्री जी की बात पहुंचाने एवं किस तरह आत्मनिर्भर भारत में हमारा योगदान हो इस पर चर्चा की जायेगी। इसी तारतम्य में मध्यप्रदेश भाजपा द्वारा आगामी 10 जून को केन्द्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी लगभग 50 हजार लोगों से जुड़कर वर्चुअल रैली को संबोधित करेंगें। साथ ही सभी संभागों में वर्चुअल रैली तथा सभी मोर्चों द्वारा वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर युवाओं, महिलाओं, अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग के लोगों के साथ जुड़कर वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस अभियान में जोड़ा जायेगा।
भाजपा आगामी 10 जून से ही प्रदेश के सभी बूथों में हमारे कार्यकर्ता दो दो की टोली बनाकर घर घर संपर्क करेंगें जिसमें प्रधानमंत्री जी का जनता के नाम पत्र, मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की उपलब्धियां तथा प्रदेश सरकार की योजनाओं के पत्रक के साथ संकल्प पत्र जिसमें स्वदेशी एवं स्थानीय उत्पादों के उपयोग कहा आह्वान होगा उसे घर घर पहुंचायेंगें।
पत्रकार वार्ता में नगर अध्यक्ष जीएस ठाकुर, ग्रामीण अध्यक्ष रानू तिवारी, विधायक अजय विश्नोई, अशोक रोहाणी, नंदनी मरावी, युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष पाण्डे, पूर्व मंत्री अंचल सोनकर, शरद जैन, हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू, प्रतिभा सिंह, पूर्व महापौर स्वाति गोडबोले उपस्थित रहे।

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