साहित्य दर्पण
गुरुपूर्णिमा के अवसर पर।
मैं नहीं करूं बखान आपकी…
लेखक एवं सम्पादकीय सलाह्कार- आशीष राय
मैं नहीं करूं बखान आपकी,
आपके सम्मुख कोई शब्द नहीं।
जिसका उदय अपार हो,
उसके गुणगान के लिय मै नही।
गोविन्द जिसके पाव लागे,
गुरुवर वो कहलाय।
हम दंडवत होत है,
जिनके आशीष से हम मनु कहलाय।
मोक्ष मिलत है श्रीचरण से,
ये बार बार बतलाये।
करलो बराम बार प्रणाम इन्हे,
फिर ना कोई समझाये।
जीवन मरण यही है बन्दे
जो आज झुक जाये,
फिर ना वो पल आत है,
जब पूरा जीवन बीत जाये।
सर्वाधिकार लेखक- आशीष राय



