डिंडोरी दर्पणमध्य प्रदेश

पति-पत्नी के नाम से फर्जी जॉब कार्ड तैयार कर निकाली जा रही राशि

बजाग जनपद अंतर्गत पिड़रूखी ग्राम पंचायत का मामला।

डिंडोरी दर्पण ब्यूरो। जिले के जनपद पंचायत बजाग अंतर्गत ग्राम पंचायत पिड़रूखी गांव में पंचायत प्रतिनिधियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जहां पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा फर्जी जॉब कार्ड तैयार कर रोजगार गारंटी के तहत राशि निकाली जा रही है,जिसकी शिकायत स्थानीय ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से करते हुए पंचायत के जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की मांग की गई है।कोरोना काल में एक तरफ रोजगार गारंटी के तहत स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो वहीं दूसरी ओर फर्जी जॉब कार्ड तैयार कर रोजगार गारंटी के तहत जिम्मेदारों के द्वारा पैसे निकाले जा रहे हैं। मामला सामने आने के बाद जिम्मेदारों पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं,बावजूद शासन प्रशासन द्वारा अभी तक जिम्मेदारों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

  • फर्जी फार्म को कर रहे लाखों का भुगतान।
    ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत के सरपंच, सचिव व उपयंत्री द्वारा निर्माण कार्यों के नाम पर जमकर धांधली की जा रही है, बिना फार्म के फर्जी सप्लायर को लाखों का भुगतान किया जा रहा है,आरोप है कि इन्हीं सप्लायर के नाम मनरेगा के तहत जॉब कार्डों में भरे जा रहे हैं। मनमानी पूर्वक फर्जी फार्म को लाखों रुपए के भुगतान कर विकास कार्यों के लिए आई शासकीय राशि का जिम्मेदार जमकर बंटाधार करने में लगे हुए हैं।इसी तरह अन्य निर्माण कार्यों में भी जमकर मनमानी बरती गई है, शौचालय निर्माण आज भी अधूरे पड़े हुए हैं, सीसी सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा साथ ही पीएम आवास के तहत अपने सगे संबंधी व रिस्तेदारो को आवास योजना का लाभ दिया जा रहा है,जबकि गरीब तबके के लोग जो आज भी कच्ची व जर्जर घरों में निवास कर रहे हैं,उन्हें पीएम आवास योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा। पंचायत की मनमानी को लेकर स्थानीय ग्रामीण परेशान है और जिला कलेक्टर को शिकायत कर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
  • तीन सौ दिवस का मनमानी फर्जी भुगतान।
    स्थानीय लोगों ने जिला कलेक्टर से की गई शिकायत में उल्लेख किया कि मनरेगा के तहत स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार उपलब्ध नहीं हो पाता, वही जिम्मेदारों द्वारा फर्जी जॉब कार्ड तैयार कर हजारों रुपए की राशि का आहरण मनमानी पूर्वक किया जा रहा है। वैसे आमतौर पर मनरेगा के तहत 100 दिनों के कार्य 1 वर्ष में उपलब्ध करवाए जाने के निर्देश थे, लेकिन कोरोना काल में नियमों में बदलाव करते हुए प्रति जॉब कार्डों की रोजगार दिवस की संख्या बढ़ाई गई है। लेकिन यहां पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा फर्जी जॉब कार्डो में 300 दिवस की फर्जी हाजिरी चढ़ाकर राशि निकाली गई, जबकि स्थानीय लोगों को केवल वर्ष में 20 से 25 दिनों के रोजगार ही उपलब्ध करवाए जाते हैं। ग्रामीणों की मानें तो पिड़रुखी ग्राम पंचायत में की गई भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद भी अभी तक जांच नहीं हो पाई है, जिससे जिम्मेदारों के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने जांच कराकर पंचायत के जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की मांग की मांग की गई है।

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