संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन से आडंबर ओर दहेज मुक्त विवाह कर समाज को दी एक अनोखी मिशाल

कबीर परमेश्वर भक्ति मुक्ति ट्रस्ट के माध्यम से हुआ दहेज कुरीति मुक्त मात्र 17 मिनट में दो जोड़ो का विवाह
पवन कौरव गाडरवारा। रविवार को कबीर परमेश्वर भक्ति मुक्ति ट्रस्ट के तत्वावधान में गाडरवारा के नजदीक गांव बगदरा जिला नरसिहपुर से दीनदयाल दास की पुत्री बबली दासी के साथ भगवान दास के पुत्र पूरन दास के साथ और दूसरा जोड़ा भवानी दास के पुत्र सूरज दास के साथ राकेश दास की पुत्री सगीता दासी के साथ मात्र 17 मिनट में हुई शादी की चर्चा का विषय पूरे गाडरवारा शहर में बना हुआ है । एक तरफ जहां लोग सादगी की बाते ही करते है , मगर इन दोनों जोड़ो ने करके भी दिखा दिया । कबीरपंथी संत रामपाल जी महाराज जी की शिक्षाओं पर चलकर ऐसी शादी से एक स्वच्छ और स्वस्थ समाज का निर्माण भी हो रहा है , खास बात ये रही की इस शादी में नाम मात्र के लोग ही शामिल हुए तथा शादी मात्र 17 मिनिट में गुरुवाणी सुनकर सम्पन्न हुई व इसमे समाज मे फैली कुरीतियों को त्याग यह अनोखी शादी की गई जिसमें ना ही किसी प्रकार का दहेज लिया व दिया गया और ना ही कोई आडंबर ना ही कोई दिखावा इस अनोखी शादी में देखने को मिला वही आज के पढ़े लिखे युवाओं की ऐंसी सोच केवल सन्त रामपाल जी महाराज के नेतृत्व में भारत को पुनः विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है ।ऐसी शादी के बारे में आए हुए लोगों ने सुना तो वे प्रभावित हुए और कहा कि ऐसा कार्य तो साक्षात भगवान ही करवा सकते है , वहीं शादी के साक्षी बने जिला कोडिनेटर हरिदास साहू, महेंद्र शर्मा , जगमोहन शर्मा दिनेश , प्रजापति ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज ऐसी शादियां प्रतिदिन हो रही है , जिससे दहेज मुक्त भारत का निर्माण हो रहा है । वर्तमान में दहेज जैसी कुरीति से बचना बहुत जरूरी है , ताकि कोई बहन बेटी दहेज के कारण अत्याचार का शिकार ना हो , विशेष तौरपर आज के समय में सतभक्ति और तत्वज्ञान से ही बचा जा सकता है , ये कार्य भी संत रामपाल भी महाराज जी अपने ज्ञान के द्वारा समाज में परिवर्तन की अनोखी लहर ला रहे है , जिससे समाज में नशा खोरी , दहेज , भ्रूण हत्या , रिश्वत खोरी आदि बुराईयों का अन्त होगा । इसमें सादगी की मिशाल पेश की है इस सादी में ना घोड़ा, ना बराती, ना बेंड ना बाजे, सिर्फ 17 मिनट में रमैनी शादी गुरुवाणी के द्वारा हो जाती है । इस शादी में कोरोना एडवाजरी का पूर्ण रूप से पालन किया गया ।
सत्संग का भी हुआ आयोजन सत्संगवही इस कार्यक्रम में सत्संग का भी आयोजन किया गया जिसमें सन्त रामपाल जी महाराज ने टेलीविजन के माध्यम से समाज बताया की
“मनुष्य जन्म दुर्लभ है ये मिले ना बारम्बार ,
जैंसे तरुवर से पत्ता टूट गिरे वो बहुर ना लगता डार ।।”
सतसंग की शुरुआत में बताया कि ” धन के पीछे लगने से मनुष्य अधोगति को प्राप्त होता है । नरसी भगत की यथार्थ सत्य कथा का वर्णन करते हुऐ बताया कि नरसी भगत के पास 56 करोड़ की संम्पति थी । संतान रुप में एक ही पुत्री थी वो व्याह दी थी । कोई पुत्र नहीं था । लेकिन नरसिंह बहुत कंजूस व्यक्ति था । कुछ भी दान धर्म नहीं करता था । परमात्मा जानते थे कि मरने के बाद इसकी बहुत बुरी दुर्गति बनेगी । इसलिए परमात्मा ने नरसिंह की परीक्षा लेकर उसे भक्ति मार्ग पर लगाया । आज भौतिकवादी और मॉर्डन युग में सतसंग और भक्ति का मजाक उड़ाया जाता है । लेकिन परमात्मा अपना विधान नहीं बदलते हैं । इसलिए भक्ति करना बहुत आवश्यक है । और इस सादी में संत रामपाल जी महाराज की संगत मौजूद रही जिसमे, हेमराज कुशवाहा, तीरथ, लखन कुशवाहा, जीवन प्रजापति, लखन कौरव , इमरत पाल , घसीराम मेहरा ,सचिन राजपूत , अर्पित शर्मा, बसंत मिर्धा , मनोज कहार आदि सन्त रामपाल जी महाराज की साध संगत उपस्थित रही ।



