
जबलपुर दर्पण। मध्यप्रदेश से राजराजेश्वरी शिवनेत्री महामंडलेश्वर योगी पूज्य संत श्री राधे जी सरकार नाथ का कहना है कि भारत वर्ष को पर्वों के देश के रुप में जाना जाता है। ऐसा कोई दिन नहीं होगा जिसमें कोई ना कोई पर्व का आयोजन न होता हो। ऐतिहासिक घटनाओं विजय श्री तथा जीवन की ही कुछ अवस्थाओं को भी पर्वों से जोड़ दिया गया है, उन्हीं पर्वों के ही क्रम में महाशिवरात्रि पर्व का भी विशेष महत्व है और इसे बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व आगामी 11 मार्च को धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके लिए शहरी क्षेत्र ही नहीं अपितु ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित मंदिर शिवालयों व आश्रमों में जोरशोर से तैयारियां चल रही है ।
क्यों मनाई जाती हैं महाशिवरात्रि: महामंडलेश्वर राधे जी सरकार का कहना है कि हर चन्द्र मास का 14 वां दिन अथवा अमावस्या से पूर्व का एक दिन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। यह पर्व हर वर्ष फरवरी या मार्च माह में आता है
वह एक ऐसा दिन है जब प्रकृति मनुष्य को उसके आध्यात्मिक शिखर तक ले जाने में मदद करती है।
इस समय का उपयोग करने के लिए यह पर्व ही एक ऐसा पर्व है जो पूरी रात चलता है।
महाशिवरात्रि का महत्व :
संत राधे सरकार का कहना है कि महाशिवरात्रि आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधकों के लिए बहुत महत्व रखती है। यह उनके लिए भी महत्वपूर्ण है जो पारिवारिक परिस्थितियों में है और संसार की महत्वाकंक्षाओं मै मग्न हैं।
महाशिवरात्रि को शिव जी के विवाह के उत्सव की तरह भी मनाया जाता है। साधकों के लिए यह वह दिन है जिस दिन भगवान शिव कैलाश पर्व के साथ एकात्म हो गए थे।
महामंडलेश्वर संत राधे सरकार का कहना है कि यौगिक परंपरा मै भगवान शिव को किसी देवता की तरह नहीं पूजा जाता, उन्हें आदि गुरु माना गया है। यह पहले गुरु हैं जिनसे ज्ञान उपजा है। धार्मिक ग्रंथों में भी उल्लेख है कि ध्यान की अनेक सहस्त्राब्दियों के बाद एक दिन भगवान शिव पूर्ण रूप से स्थिर हो गए, वहीं दिन महाशिवरात्रि का था। तभी से महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इसलिए योगियों के लिए यह महाशिवरात्रि पर्व अति महत्वपूर्ण है। योगी वह व्यक्ति है जिसने अस्तित्व की एकात्मकता को जान लिया है। एकात्म भाव को जानने की रात योगियों को इसी एकात्मकता का अनुभव कराती है। भोग से योग की यात्रा कराने वाला पर्व है महाशिवरात्रि, वासनाओं से उपासनाओ की ओर ले जाने वाला पर्व है महाशिवरात्रि



